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विकास के नए आयाम: धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान

धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत गांवों में सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पहुंचाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।

By अजय त्यागी
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advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रेस वार्ता

प्रेस वार्ता

राजसमंद (शिंभु सिंह शेखावत)। धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत विशेष मुहिम छेड़ी गई है। इस अभियान का मुख्य ध्येय "सबसे दूर, सबसे पहले" की भावना के साथ समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुँचाना है। प्रशासन ने इस महत्वाकांक्षी योजना की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए बताया कि इसका लाभ दूरस्थ और वंचित जनजातीय गांवों तक पहुँचेगा, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा।

अभियान की प्रमुख रूपरेखा

धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत चिह्नित जनजातीय गांवों को इस मुहिम में शामिल किया गया है। "उद्देश्य दूरस्थ एवं वंचित जनजातीय क्षेत्रों तक शासन की सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना है," जिसके लिए प्रशासन की ओर से पूरी कार्ययोजना तैयार की गई है। यह केवल सरकारी योजनाओं का प्रसार नहीं, बल्कि एक सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम है, जो सीधे तौर पर लोगों के जीवन को बेहतर बना रहा है।

यह अभियान कौशल विकास, शत-प्रतिशत विद्युत सुविधा, रोजगार, शुद्ध पेयजल और स्वास्थ्य जैसी 11 प्रमुख सेवाओं पर केंद्रित है। प्रशासन की प्राथमिकता है कि किसी भी नागरिक को सुविधाओं के लिए सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें और उन्हें घर के पास लाभ मिले। इससे न केवल समय की बचत होती है, बल्कि योजनाओं का लाभ सही पात्र व्यक्ति तक पहुंचना सुनिश्चित हो पाता है।

आदि कर्मयोगियों की भूमिका

धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक चयनित गांव में 'आदि कर्मयोगियों' की नियुक्ति की गई है। ये कर्मयोगी गांव स्तर पर प्रशासनिक मशीनरी और आमजन के बीच एक सेतु की तरह कार्य कर रहे हैं। वे न केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुँचा रहे हैं, बल्कि पात्र व्यक्तियों को योजनाओं से जोड़ने में भी मदद कर रहे हैं। प्रशासन इनकी गतिविधियों की सतत मॉनिटरिंग कर रहा है।

अभियान सप्ताह का शुभारंभ करते हुए विभिन्न स्तरों पर अधिकारियों का ओरिएंटेशन किया गया है। गांवों में सैचुरेशन एवं पौधरोपण अभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जा रहा है। इसके साथ ही, विभिन्न स्थानों पर विशेष पात्रता शिविर और स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि हर पात्र व्यक्ति को स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सेवाओं का लाभ सुगमता से मिल सके।

जनसुनवाई और पारदर्शिता

अभियान के तहत फील्ड स्तर पर 'ग्राम संपर्क' गतिविधियाँ आयोजित की गईं। इन आयोजनों में अधिकारियों, आदि कर्मयोगियों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं ने गांवों में पैदल दौरा (ट्रांजेक्ट वॉक) कर वास्तविक धरातलीय स्थिति का आकलन किया। इस दौरान ग्रामीणों को आगामी जनसुनवाई तिथियों की जानकारी भी प्रदान की गई, ताकि वे अपनी समस्याओं को लेकर पूरी तरह सजग और तैयार रह सकें।

जनसुनवाई गतिविधियों के माध्यम से आमजन की शिकायतों का त्वरित निराकरण और पात्रता संबंधी प्रकरणों का निस्तारण किया जा रहा है। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि "अभियान का उद्देश्य केवल योजनाओं की जानकारी देना नहीं बल्कि अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाकर वास्तविक सामाजिक परिवर्तन सुनिश्चित करना है," ताकि जनजाति समाज का सर्वांगीण विकास हो सके और वे देश की मुख्यधारा से मजबूती के साथ जुड़ सकें।

रिपोर्टिंग और दस्तावेज

अभियान के आगामी चरण में व्यापक डॉक्यूमेंटेशन की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इसके तहत प्रूफ कार्ड बनाने और प्रोग्रेस रिपोर्ट तैयार करने का कार्य किया जा रहा है, जिसमें शिकायतों की सुनवाई, निस्तारित प्रकरणों और लंबित मामलों का पूरा विवरण संकलित होगा। यह रिपोर्ट भविष्य के फॉलोअप के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित होगी और इसकी मदद से पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाएगा।

प्रशासन इस अभियान को केवल एक औपचारिक कार्यक्रम के बजाय सेवा संतृप्ति और आजीविका सशक्तिकरण के माध्यम के रूप में देख रहा है। धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान की सफलता के लिए सभी विभागीय अधिकारी समन्वित रूप से कार्य कर रहे हैं, ताकि जनजाति समाज के विकास का संकल्प फलीभूत हो और उन्हें बेहतर भविष्य के अवसर मिल सकें।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस रिपोर्ट में प्रस्तुत जानकारी संबंधित जिला प्रशासन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्तियों और आधिकारिक विभागीय दिशा-निर्देशों पर आधारित है। यह रिपोर्ट केवल जनहित में सूचना साझा करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी सरकारी योजना का लाभ उठाने हेतु पात्रता की पुष्टि के लिए आवेदक को अपने निकटतम संबंधित सरकारी कार्यालय से संपर्क करना चाहिए। इस जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी प्रशासनिक निर्णय या व्यक्तिगत परिणाम के लिए लेखक और प्रकाशक/संपादक उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief