WA Join our WhatsApp Group
Advertisement Advertisement
प्रादेशिक

अधिवक्ता कॉलोनी की मांग हेतु जिला अभिभाषक संस्था का ज्ञापन

जिला अभिभाषक संस्था ने अधिवक्ता कॉलोनी की मांग एवं पार्किंग समस्या को लेकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा, जिस पर सकारात्मक आश्वासन मिला है।

By अजय त्यागी
1 min read
अधिवक्ता कॉलोनी की मांग

अधिवक्ता कॉलोनी की मांग

Thanks to all the readers for their 3+ Years of dedication and trust

भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। अधिवक्ता कॉलोनी की मांग को लेकर जिला अभिभाषक संस्था के पदाधिकारियों ने जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू से औपचारिक मुलाकात की। इस दौरान अधिवक्ताओं की प्रमुख आवासीय समस्याओं एवं न्यायिक परिसर में बुनियादी सुविधाओं को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। संस्था अध्यक्ष उम्मेदसिंह राठौड़ के नेतृत्व में सौंपे गए इस ज्ञापन में कानूनी बिरादरी की सुविधा हेतु प्रशासनिक हस्तक्षेप की पुरजोर पैरवी की गई है।

कॉलोनी की अनिवार्य आवश्यकता

संस्था अध्यक्ष ने जिला कलेक्टर को अवगत कराया कि शहर में अधिवक्ताओं के लिए एक सुव्यवस्थित कॉलोनी का निर्माण समय की बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि "अधिवक्ता हितों के लिए स्वायत्त शासन विभाग जयपुर द्वारा 10 सितंबर 2021 को नगर परिषद की स्वामित्व वाली 18 बीघा भूमि ग्राम सांगानेर में जिला एवं सेशन न्यायालय को आवंटित की गई थी," जिसका उपयोग आवासीय कॉलोनी हेतु किया जा सकता है।

प्रशासन को बताया गया कि उक्त भूमि के समीप ही जिला न्यायालय के लिए 62 बीघा भूमि पहले से आवंटित है। ऐसी स्थिति में संस्था ने सरकार से मांग की है कि शेष 18 बीघा भूमि और आसपास की सरकारी खाली जमीन को अधिवक्ता कॉलोनी की मांग को पूरा करने हेतु आरक्षित किया जाए। इससे कानूनी विशेषज्ञों को आवासीय सुविधाएं सुलभ हो सकेंगी, जिससे उनकी कार्यक्षमता में और अधिक वृद्धि होगी।

कलेक्टर का सकारात्मक रुख

जिला कलेक्टर ने अधिवक्ताओं की इस जायज मांग को गंभीरता से सुना। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त करते हुए कहा कि "18 बीघा भूमि को अधिवक्ता कॉलोनी हेतु आरक्षित करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जाएगा।" प्रशासन का यह रुख अधिवक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। इससे न केवल उनके आवासीय संकट का समाधान होगा, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े लोगों को भी कार्यस्थल के समीप घर मिल सकेगा।

पार्किंग की गंभीर समस्या

ज्ञापन के माध्यम से न्यायालय परिसर में व्याप्त पार्किंग समस्या को भी प्रमुखता से उठाया गया। पदाधिकारियों ने बताया कि न्यायालय परिसर में वर्तमान में पार्किंग का निर्माण कार्य चल रहा है। इस कारण अधिवक्ता और आमजन अपने वाहन सड़क पर खड़े करने को मजबूर हैं, जिससे आए दिन जाम की स्थिति बनती है। यह स्थिति न केवल अव्यवस्था पैदा कर रही है, बल्कि आमजन के लिए परेशानी का कारण भी बनी हुई है।

समाधान की ठोस रणनीति

पार्किंग की समस्या के स्थाई निराकरण के लिए संस्था ने पुलिस अधीक्षक आवास के ठीक सामने स्थित पार्क के पास रिक्त पड़ी भूमि को पार्किंग के लिए उपयोग करने का सुझाव दिया। कलेक्टर ने इसे स्वीकार करते हुए पुलिस अधीक्षक के साथ चर्चा करने और उक्त स्थान को पार्किंग के लिए जल्द उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। यह निर्णय न्यायालय आने वाले नागरिकों और अधिवक्ताओं के लिए अत्यधिक सुविधाजनक सिद्ध होगा।

संस्था का निरंतर संघर्ष

संस्था अध्यक्ष उम्मेदसिंह राठौड़ ने कहा कि "जिला अभिभाषक संस्था सदैव अधिवक्ता हितों के लिए कार्य करती आई है और अधिवक्ताओं की समस्याओं का समाधान करना संस्था का प्रमुख ध्येय है।" उन्होंने इस बात पर बल दिया कि कानूनी बिरादरी की समस्याओं को प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी ढंग से रखना उनका दायित्व है। संस्था भविष्य में भी अधिवक्ताओं के अधिकारों और सुविधाओं के लिए निरंतर संघर्षरत रहेगी।

प्रतिनिधिमंडल में उपाध्यक्ष महिपाल सिंह राणावत, महासचिव पंकज दाधीच, रेवेन्यू महासचिव मनोहरलाल बुनकर, कोषाध्यक्ष गोरानी, सह सचिव आदित्य सिंह चौहान, पुस्तकालय सचिव प्रताप तेली सहित कार्यकारिणी के सदस्य मौजूद रहे। प्रशासन के इस आश्वासन के बाद अधिवक्ताओं में उत्साह है। प्रशासन यदि अधिवक्ता कॉलोनी की मांग को धरातल पर उतारता है, तो कानूनी क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होगी और अधिवक्ताओं की जीवनशैली में व्यापक सुधार देखा जाएगा।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस रिपोर्ट में प्रस्तुत जानकारी संबंधित जिला अभिभाषक संस्था और प्रशासनिक बैठकों के तथ्यों पर आधारित है। यह केवल जनहित में सूचना साझा करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। प्रशासनिक प्रस्तावों के क्रियान्वयन और सरकारी भूमि आवंटन संबंधी प्रक्रिया के लिए अधिकृत सरकारी कार्यालयों के आधिकारिक आदेशों की पुष्टि करना उचित होगा। इस जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय या होने वाले परिणाम के लिए लेखक और प्रकाशक/संपादक उत्तरदायी नहीं होंगे।

Thanks to all the readers for their 3+ Years of dedication and trust
Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief