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भोजशाला में पहली बार शुक्रवार की नमाज नहीं होगी सुरक्षा बढ़ी

अदालत के फैसले के बाद ऐतिहासिक भोजशाला में पहली बार शुक्रवार की नमाज नहीं होगी। प्रशासन ने शांति व्यवस्था के लिए सुरक्षा बढ़ा दी है।

By अजय त्यागी
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advertisement13Aug2026%20copy.jpg भोजशाला मंदिर परिसर

भोजशाला मंदिर परिसर

भोजशाला में पहली बार शुक्रवार की नमाज नहीं होना इस पूरे विवाद में एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ के हालिया फैसले के बाद से स्थिति पूरी तरह बदल गई है। वर्षों से चली आ रही नमाज की परंपरा पर आज विराम लग गया है, जिसे हिंदू पक्ष अपनी आस्था की एक बड़ी जीत के रूप में देख रहा है।

कानूनी बदलाव का असर

उच्च न्यायालय के आदेश के बाद धार स्थित इस परिसर की तस्वीर आज एकदम अलग नजर आएगी। यह पहला मौका है जब भोजशाला में पहली बार शुक्रवार की नमाज नहीं होगी और इसके बजाए यहां महाआरती का आयोजन किया जाएगा। "परिसर में शुक्रवार को नमाज का न होना एक बड़ा बदलाव है," जिससे स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कानून के इस निर्णय ने क्षेत्र के धार्मिक और सामाजिक संतुलन को एक नई दिशा प्रदान की है।

हालांकि, मुस्लिम पक्ष ने उच्च न्यायालय के इस निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है। 21 मई की रात दायर की गई विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई की संभावना बनी हुई है। कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए प्रशासन ने परिसर के भीतर और बाहर शांति बनाए रखने के लिए अपनी पूरी तैयारी कर ली है ताकि किसी भी तरह का अप्रिय विवाद न हो।[1]

प्रशासन की कड़ी सतर्कता

किसी भी संभावित विरोध या तनावपूर्ण स्थिति को रोकने के लिए धार जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। सुरक्षा व्यवस्था को तीन स्तरों में विभाजित किया गया है। प्रशासन ने "700 से ज्यादा पुलिसकर्मियों और अन्य सुरक्षा बलों को तैनात किया है," जो शहर के हर संवेदनशील इलाके पर बारीक नजर रखेंगे। शांति व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की पहली प्राथमिकता बनी हुई है।

सुरक्षा घेरे को और अधिक अभेद्य बनाने के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की दो कंपनियां भी मौके पर मौजूद हैं। आसपास के जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाकर सुरक्षा घेरा मजबूत किया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून का पालन करना सभी पक्षों के लिए अनिवार्य है। किसी भी व्यक्ति को कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

महाआरती की तैयारियां

भोजशाला में पहली बार शुक्रवार की नमाज नहीं आयोजित होने के कारण हिंदू पक्ष में काफी उत्साह है। महाआरती के लिए परिसर की सफाई और व्यवस्थाओं को व्यवस्थित किया जा रहा है। श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुरूप पूजा करने के लिए उत्सुक हैं। प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि पूजा-पाठ की गतिविधियां निर्धारित नियमों और अदालती दिशा-निर्देशों के दायरे में रहकर ही पूरी हों।

पुलिस अधीक्षक और जिला कलेक्टर स्वयं स्थिति का जायजा ले रहे हैं। संवेदनशीलता को देखते हुए सोशल मीडिया पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है, ताकि कोई भी भड़काऊ सामग्री अशांति न फैला सके। अधिकारियों का कहना है कि शहर में अमन और चैन बनाए रखना ही उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है, जिसके लिए वे पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।

शांति का संदेश

यह मामला न केवल एक धार्मिक स्थल का है, बल्कि यह न्यायपालिका के प्रति विश्वास का भी है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति बनाए रखने में सहयोग करें। "शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है," जिसे निभाने के लिए सभी वर्गों को आगे आना होगा और प्रशासन का साथ देना होगा।

भोजशाला में पहली बार शुक्रवार की नमाज नहीं होने का यह निर्णय इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएगा। भविष्य में सर्वोच्च न्यायालय का जो भी फैसला आएगा, वह अंतिम होगा। तब तक धार जिले में कानून-व्यवस्था को बनाए रखना और शांतिपूर्वक स्थितियों का सामना करना ही प्रशासन और नागरिकों के लिए सर्वोपरि है। कानून के दायरे में रहकर ही समाज में सौहार्दपूर्ण वातावरण संभव है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस रिपोर्ट में प्रस्तुत जानकारी संबंधित अदालती आदेशों, सुरक्षा व्यवस्था और आधिकारिक प्रशासनिक बयानों पर आधारित है। यह केवल जनहित में सूचना साझा करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इस संवेदनशील मामले में किसी भी कानूनी प्रक्रिया या सरकारी आदेश की पुष्टि के लिए आधिकारिक न्यायिक दस्तावेजों का संदर्भ लेना उचित होगा। इस जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय या होने वाले परिणाम के लिए लेखक और प्रकाशक/संपादक उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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