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दिव्यांग बच्चों के लिए ग्रीष्मकालीन अभिरुचि शिविर बना नई उम्मीद

भारत विकास परिषद द्वारा आयोजित ग्रीष्मकालीन अभिरुचि शिविर बौद्धिक दिव्यांग और दृष्टिहीन बच्चों की छिपी प्रतिभा को नई उड़ान दे रहा है।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg ग्रीष्मकालीन अभिरुचि शिविर

ग्रीष्मकालीन अभिरुचि शिविर

भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। ग्रीष्मकालीन अभिरुचि शिविर का आयोजन इन दिनों बौद्धिक दिव्यांग और दृष्टिहीन बच्चों के जीवन में नई खुशियां और उम्मीदें लेकर आया है। समाज में जब प्रतिभाओं को सही मंच और स्नेह मिलता है, तो उनकी छिपी हुई क्षमताएं अद्भुत रूप से निखर कर सामने आती हैं। विवेकानंद शाखा द्वारा आयोजित इस विशेष शिविर में बच्चों के हौसलों को पंख दिए जा रहे हैं, जहां वे न केवल नई विधाएं सीख रहे हैं, बल्कि अपनी जिंदगी को खुलकर जी रहे हैं।

विशेष बच्चों का कौशल

शाखा अध्यक्ष गिरीश अग्रवाल के अनुसार, यह आयोजन विशेष रूप से उन बच्चों के लिए है जिन्हें समाज में मुख्यधारा से जुड़ने और प्रोत्साहित किए जाने की सबसे अधिक आवश्यकता है। सचिव केजी सोनी ने बताया कि शिविर में शामिल 36 बौद्धिक दिव्यांग बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी रचनात्मकता को निखारने का कार्य किया जा रहा है। "इन बच्चों को नृत्य, सिलाई, जिमनास्टिक और संगीत के साथ-साथ आर्ट एंड क्राफ्ट व गिफ्ट पैकिंग की बारीकियां सिखाई जा रही हैं।"

बच्चे वेस्ट कांच की बोतलों और आइसक्रीम की खाली डिब्बियों को रंगों व सुंदर कलाकृतियों से सजाकर बेहद आकर्षक पेन स्टैंड और गमले बना रहे हैं। उनकी इस जादुई कलात्मकता को देखकर हर कोई आश्चर्यचकित है। यह न केवल उनके हाथों की कुशलता को दर्शाता है, बल्कि उनके मानसिक विकास और एकाग्रता को भी बढ़ावा देता है। शिविर का वातावरण पूरी तरह से इन बच्चों की सकारात्मक ऊर्जा से भरा हुआ है।

तकनीक और खेल

शिविर में शामिल 8 दृष्टिहीन बच्चों के लिए यह अनुभव बेहद चमत्कारी साबित हो रहा है। इन बच्चों को विशेष रूप से तैयार किए गए लूडो और सांप-सीढ़ी के माध्यम से खेलों का आनंद लेना सिखाया जा रहा है। इतना ही नहीं, आधुनिक तकनीक के साथ कदमताल मिलाने के लिए इन बच्चों को कंप्यूटर और मोबाइल चलाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। "उद्देश्य यह है कि ये बच्चे भविष्य में पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सकें।"

इन बच्चों के उत्साह का ठिकाना नहीं है। बच्चों ने बताया कि उन्होंने जिंदगी में पहली बार संगीत की धुन पर नृत्य करना सीखा है, जो उन्हें बेहद पसंद आ रहा है। सांप-सीढ़ी और लूडो के खेल ने उनकी खुशियों को दोगुना कर दिया है। तकनीक का प्रशिक्षण उन्हें यह विश्वास दिला रहा है कि वे दुनिया में किसी से कम नहीं हैं और भविष्य में वे भी अपनी योग्यता के बल पर सम्मानजनक जीवन जी सकते हैं।

बच्चों के अनमोल भाव

ग्रीष्मकालीन अभिरुचि शिविर के माहौल से बच्चे इस कदर भावुक रूप से जुड़ चुके हैं कि अब उन्हें इसके समापन का डर सताने लगा है। अपनी मासूमियत से भाव व्यक्त करते हुए बच्चों ने कहा कि "यहां रोज आना और नई चीजें सीखना हमें बहुत अच्छा लग रहा है, हमें यहीं रहना है।" बच्चों के चेहरे पर दिख रही यह अनमोल मुस्कान ही इस आयोजन की सबसे बड़ी और सार्थक सफलता है, जो किसी भी पुरस्कार से कहीं ज्यादा बड़ी है।

इस ग्रीष्मकालीन अभिरुचि शिविर की उपयोगिता इसी बात से सिद्ध होती है कि बच्चे इसे घर जैसा अनुभव कर रहे हैं। आयोजकों का मानना है कि ऐसे प्रयास समाज में समानता और संवेदनशीलता को बढ़ावा देते हैं। बच्चों के मन में पनपी यह सकारात्मकता उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में सहायक होगी। यह आयोजन उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो विशेष बच्चों के कल्याण के लिए कार्य करना चाहते हैं।

समापन का कार्यक्रम

इस अद्भुत ग्रीष्मकालीन अभिरुचि शिविर का समापन आगामी 24 मई को शांति अतिथि गृह में शाम 6 बजे आयोजित किया जाएगा। इस दौरान बच्चे अपनी सीखी हुई कलाओं और नृत्य का प्रदर्शन भी करेंगे। आयोजन से जुड़े सभी सदस्य इस बात को लेकर बेहद संतुष्ट हैं कि उनका प्रयास बच्चों के चेहरों पर खुशी लाने में सफल रहा है। भविष्य में भी ऐसे और भी कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प दोहराया गया है।

अंत में, यह आयोजन केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं के मिलन का केंद्र रहा है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को ऐसे कार्यों में सहयोग करना चाहिए ताकि हर विशेष बच्चा खुद को सक्षम महसूस कर सके। बच्चों की प्रतिभा को निखारने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का यह सार्थक प्रयास निस्संदेह सराहनीय है। यह शिविर याद दिलाता है कि सहानुभूति और प्रेम से हर बाधा पार की जा सकती है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस रिपोर्ट में प्रस्तुत जानकारी संबंधित शाखा और आयोजकों द्वारा उपलब्ध कराए गए तथ्यों पर आधारित है। यह केवल जनहित में सूचना साझा करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। आयोजनों की समय-सारणी और भविष्य के कार्यक्रमों की पुष्टि के लिए आधिकारिक जानकारी प्राप्त करना उचित होगा। इस जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय या परिणामों के लिए लेखक एवं प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief