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हॉर्मुज जलडमरूमध्य विवाद: ईरान और अमेरिका के बीच सुलह की कोशिशें 

हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान-अमेरिका के बीच तनाव बढ़ा है। कतर और पाकिस्तान मध्यस्थता की कोशिशों में जुटे हैं, पर स्थिति जटिल है।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव वैश्विक शांति के लिए एक नई चुनौती बन गया है। ईरान द्वारा फारस की खाड़ी में एक नया प्राधिकरण (PGSA) गठित कर टोल लगाने की कोशिशों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खलबली मचा दी है। इस बीच, कतर ने तेहरान में मध्यस्थों की एक टीम भेजी है ताकि इस विवाद को कूटनीतिक बातचीत के जरिए सुलझाया जा सके और अमेरिकी प्रतिबंधों पर चर्चा हो सके।

कूटनीतिक हलचल तेज

ईरान की योजना है कि वह हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों पर टोल लगाए और उन्हें विशेष जलमार्गों का उपयोग करने के लिए मजबूर करे। हालांकि, अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी हाल में ईरान को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर नियंत्रण या टोल वसूलने की अनुमति नहीं देगा। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे एक "खतरनाक मिसाल" बताते हुए अन्य देशों से ईरान की इस मांग को खारिज करने की अपील की है।

वर्तमान में, पाकिस्तान और कतर जैसे देश सक्रिय रूप से पर्दे के पीछे से मध्यस्थता की भूमिका निभा रहे हैं। पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर और आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी की तेहरान यात्राओं से कयास लगाए जा रहे हैं कि कोई बड़ा समझौता हो सकता है। हालांकि, ईरान ने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े किसी भी समझौते की बातों को फिलहाल खारिज किया है और अपना पूरा ध्यान युद्धविराम और आर्थिक प्रतिबंधों पर केंद्रित रखा है।[1]

खाड़ी देशों की चिंता

बहरीन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री प्राधिकरण को एक पत्र लिखकर ईरान के नए प्राधिकरण को अवैध करार दिया है। इन पांचों देशों का मानना है कि ईरान की यह चाल वास्तव में उनके क्षेत्रीय जलक्षेत्र का दुरुपयोग करके धन कमाने का एक हथकंडा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि ईरान के इस दावे को स्वीकार किया गया, तो भविष्य में समुद्री व्यापार की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।

संयुक्त अरब अमीरात के राजनयिक सलाहकार अनवर गरगाश का कहना है कि ईरान बातचीत के दौरान अपनी स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है। वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने साफ किया कि उनका मुख्य उद्देश्य लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध को समाप्त करना और अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाना है। वे यूरेनियम भंडार पर अमेरिकी दावों को केवल मीडिया की अटकलें मान रहे हैं।

परमाणु कार्यक्रम का पेच

अमेरिकी दबाव के बावजूद ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार को सौंपने के लिए तैयार नहीं है। ईरान का कहना है कि वह इस भंडार को किसी अन्य देश को देने के बजाय अपने भीतर ही निष्क्रिय (downblend) कर लेगा। इस बीच, रूस ने भी इस भंडार को स्वीकार करने की पेशकश की थी। परमाणु कार्यक्रम और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य पर चल रही ये बातचीत अगले कुछ दिनों में किसी निर्णायक मोड़ पर पहुँच सकती है।

विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका के कड़े बयानों के पीछे कच्चा तेल की कीमतों को नियंत्रित करने का एक बड़ा लक्ष्य भी हो सकता है। वाशिंगटन किसी भी स्थिति में वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता नहीं चाहता। ट्रंप प्रशासन की ओर से ईरान पर संभावित सैन्य हमले की चर्चाएं भी चल रही हैं, हालांकि अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। तनावपूर्ण माहौल के बीच पूरी दुनिया की नजरें अब बीजिंग और तेहरान के बीच होने वाली वार्ताओं पर टिकी हैं।

समाधान की राह

पाकिस्तान संभवतः इस पूरे मामले में चीन को एक गारंटीकर्ता के रूप में शामिल करने की कोशिश कर सकता है, ताकि किसी भी समझौते का पालन सुनिश्चित हो सके। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की बीजिंग यात्रा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में कोई संयुक्त नियंत्रण की योजना बनती है, तो ही इस विवाद का स्थायी समाधान निकलना संभव है।

ईरान को यह समझना होगा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का उल्लंघन करना उसके आर्थिक संकट को और गहरा सकता है। वहीं, अमेरिका और उसके सहयोगियों को भी कूटनीतिक लचीलापन दिखाना होगा ताकि मध्य-पूर्व में एक नए सैन्य संघर्ष से बचा जा सके। आने वाला समय ही बताएगा कि क्या कतर और पाकिस्तान की यह मध्यस्थता ईरान और अमेरिका को किसी सुरक्षित समझौते की मेज पर ला पाती है या तनाव और बढ़ेगा।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस रिपोर्ट में प्रस्तुत जानकारी अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों और राजनयिक सूत्रों पर आधारित है। यह केवल सूचना साझा करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। भू-राजनीतिक स्थिति और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी किसी भी नीति के लिए अंतरराष्ट्रीय आधिकारिक स्रोतों का संदर्भ लेना उचित होगा। इस जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय या परिणामों के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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