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पाटन में राजस्व न्यायालय की स्थापना को लेकर ज्ञापन सौंपा

पाटन के नागरिकों ने सरकार को ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र में राजस्व न्यायालय की स्थापना और बाईपास सड़क के सुधार की पुरजोर मांग की है।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg पाटन क्षेत्र की मांगो के लिए ज्ञापन सौंपा

पाटन क्षेत्र की मांगो के लिए ज्ञापन सौंपा

नीमकाथाना (शिंभू सिंह शेखावत)। पाटन क्षेत्र के निवासियों ने प्रशासन के माध्यम से राजस्थान सरकार को ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं के समाधान की मांग की है। निवासियों की मुख्य मांगों में पाटन में राजस्व न्यायालय की स्थापना करना और कोटपूतली-नीम का थाना बाईपास सड़क की जर्जर स्थिति को सुधारना शामिल है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि वर्षों से चली आ रही इन प्रशासनिक और बुनियादी समस्याओं के कारण उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

सुगम न्याय की राह

वर्तमान में पाटन तहसील के राजस्व मामलों की सुनवाई के लिए ग्रामीणों को नीमकाथाना स्थित न्यायालय में जाना पड़ता है। निवासियों के अनुसार, यह लंबी दूरी उनके लिए अत्यंत कष्टकारी है। क्षेत्र में राजस्व न्यायालय की स्थापना होने से किसानों, मजदूरों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी। यह कदम न्याय प्रक्रिया को सुलभ बनाने के साथ-साथ आमजन के समय और धन की बर्बादी को रोकने में भी सहायक सिद्ध होगा।

ग्रामीणों ने अपने ज्ञापन में तर्क दिया है कि पाटन तहसील में राजस्व गांवों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिसके परिणामस्वरूप भूमि विवादों और अन्य मामलों में भी वृद्धि हुई है। ऐसी स्थिति में वर्तमान व्यवस्था पूरी तरह से अपर्याप्त साबित हो रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि सरकार पाटन में राजस्व न्यायालय की स्थापना करती है, तो इससे त्वरित और निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित हो सकेगा।

सड़क की जर्जर हालत

दूसरे ज्ञापन में निवासियों ने कोटपूतली से नीम का थाना बाईपास तक के राज्य राजमार्ग की खस्ताहाल स्थिति पर आक्रोश व्यक्त किया है। हजारों वाहनों का भार वहन करने वाला यह मार्ग आज गहरे गड्ढों और धूल का गढ़ बन चुका है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि "सड़क निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का उपयोग और रखरखाव का अभाव ही इस मार्ग के विनाश का मुख्य कारण बना हुआ है।"

सड़क पर उड़ती धूल के कारण स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों को सांस संबंधी गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीणों ने मांग की है कि तत्काल प्रभाव से सड़क की मरम्मत कराई जाए और निर्माण कार्य के दौरान धूल को नियंत्रित करने के लिए पानी का नियमित छिड़काव किया जाए। सुरक्षा मानकों की अनदेखी किसी भी बड़ी दुर्घटना का आमंत्रण बन सकती है, जिसे रोकना अनिवार्य है।

प्रशासनिक जवाबदेही तय

ज्ञापन सौंपने के दौरान पाटन प्रशासक मनोज चौधरी, एडवोकेट नीर सिंह मीणा, टिंकू योगी, अनिल चौधरी, सुमित यादव राजपुरा और नेतराम यादव जैसे अनेक जागरूक नागरिक उपस्थित रहे। इन प्रतिनिधियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रशासन को अब अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सजग होना होगा। उनके अनुसार, राजस्व न्यायालय की स्थापना जैसे जनहितकारी निर्णय क्षेत्र में प्रशासनिक सुचिता और विकास को एक नई गति देने के लिए नितांत आवश्यक हैं।

प्रशासनिक अधिकारियों ने सभी मांगों को गंभीरता से सुनने के बाद आश्वस्त किया है कि वे इसे सरकार के उच्च स्तर तक प्रेषित करेंगे। क्षेत्रवासी अब इस उम्मीद में हैं कि सरकार जल्द ही पाटन में राजस्व न्यायालय और सड़क सुधार के लिए सकारात्मक निर्णय लेगी। यदि इस दिशा में समय रहते कोई कार्यवाही नहीं की गई, तो पाटन के लोग अपने अधिकारों और सुविधाओं की सुरक्षा के लिए आंदोलन करने को विवश होंगे।

विकास का भविष्य

अंत में, यह स्पष्ट है कि पाटन के नागरिकों ने अपने हक की लड़ाई को अब प्राथमिकता के स्तर पर शुरू कर दिया है। सरकार को चाहिए कि वह जनता की इन मांगों को जनहित में स्वीकार कर तत्काल प्रभाव से कार्य शुरू करवाए, ताकि विकास की गति अवरुद्ध न हो। पाटन में राजस्व न्यायालय की स्थापना और सड़क का नवीनीकरण क्षेत्र के लिए एक नई सुबह की शुरुआत होगी, जिससे भविष्य में सर्वांगीण विकास संभव हो सकेगा।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस रिपोर्ट में प्रस्तुत जानकारी क्षेत्रवासियों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन और स्थानीय जन प्रतिनिधियों के बयानों पर आधारित है। यह केवल जनहित में सूचना साझा करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। प्रशासनिक कार्यों और सरकारी नीतियों से जुड़ी आधिकारिक जानकारी के लिए संबंधित जिला कार्यालय के पोर्टल का अवलोकन करें। इस रिपोर्ट में दी गई जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय या परिणामों के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief