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अंधविश्वास का खौफनाक अंत: महिला की मिट्टी में दबने से मौत

पानीपत में करंट लगने के बाद एक महिला को अंधविश्वास के चलते मिट्टी में दबा दिया गया, जिससे उसकी मौत हो गई। प्रशासन अब जांच में जुटा है।

By अजय त्यागी
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advertisement13Aug2026%20copy.jpg अंधविश्वास का खौफनाक अंत

अंधविश्वास का खौफनाक अंत

हरियाणा के पानीपत जिले में एक अत्यंत चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ करंट लगने के बाद अंधविश्वास के चलते एक महिला को बचाने के नाम पर मिट्टी में दबा दिया गया। चिकित्सा विज्ञान को दरकिनार कर परिवार ने अंधविश्वास का सहारा लिया, जिसका परिणाम महिला की दर्दनाक मौत के रूप में सामने आया। यह घटना न केवल दुखद है, बल्कि समाज में व्याप्त कुरीतियों और वैज्ञानिक सोच की कमी पर बड़े सवाल भी खड़े करती है।

घटना का भयावह सच

मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम को घर पर काम करते समय महिला को जोरदार बिजली का झटका (करंट) लगा था। परिजन उसे फौरन एक निजी अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया था। चिकित्सकों ने परिजनों को शव ले जाने की सलाह दी, लेकिन वे इसे मानने को तैयार नहीं थे और किसी अज्ञात व्यक्ति की सलाह पर अंधविश्वास का शिकार हो गए।

किसी ने परिजनों को गुमराह किया कि यदि मृत शरीर को जमीन में मिट्टी के भीतर दबा दिया जाए और हाथ मले जाएं, तो करंट का असर खत्म हो सकता है। यह सलाह महिला के परिजनों के लिए अंतिम रास्ता बन गई। बिना सोचे-समझे उन्होंने जीटी रोड स्थित संजय चौक के पास निर्माणाधीन नाले की मिट्टी में महिला को दबा दिया। इस पूरी प्रक्रिया के फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।[1]

सामाजिक कुरीतियों का प्रभाव

सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस के होश उड़ा दिए। यह मामला न केवल लापरवाही का है, बल्कि समाज के उस अंधेपन का प्रतीक है जो आज भी वैज्ञानिक युग में ऐसे अंधविश्वास को बढ़ावा दे रहा है। लोगों का मानना है कि सही समय पर अस्पताल की सलाह को न मानने और ऐसी अवैज्ञानिक प्रक्रियाओं के पीछे शिक्षा का अभाव एक बड़ा कारण हो सकता है।

पुलिस विभाग को जैसे ही इस भयावह घटना की सूचना मिली, टीम फौरन मौके पर पहुँची। हालांकि, तब तक परिजन शव को लेकर वहाँ से जा चुके थे। पुलिस का कहना है कि उन्हें इस संबंध में अब तक कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए वे अपने स्तर पर जाँच-पड़ताल कर रहे हैं ताकि सच्चाई का पता लगाया जा सके।

वैज्ञानिकों की सख्त चेतावनी

चिकित्सकों का मानना है कि करंट लगने पर शरीर की नसें और हृदय तंत्र बुरी तरह प्रभावित होते हैं। ऐसे में करंट उतारने के नाम पर किसी भी तरह की मिट्टी या अन्य चीजों का उपयोग करना पूरी तरह व्यर्थ और खतरनाक है। "चिकित्सकों ने महिला को मृत घोषित कर दिया था," इसके बावजूद इस तरह के टोटकों का सहारा लेना समाज की संवेदनहीनता को दर्शाता है।

ऐसी घटनाएं अक्सर ग्रामीण या अर्ध-शहरी इलाकों में देखने को मिलती हैं जहाँ लोग हताशा में आकर किसी भी अजीब सलाह को मान लेते हैं। विशेषज्ञ इसे 'मिराकल क्योर' का भ्रम मानते हैं, जो कभी-कभी जानलेवा साबित होता है। इस मामले में पुलिस प्रशासन की ओर से अब आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता चल सके कि किसने परिजनों को ऐसी सलाह दी थी।

कानूनी और सामाजिक पहलू

यदि परिवार ने मृत घोषित होने के बाद ऐसा किया है, तो यह मृत शरीर के अनादर का मामला भी बनता है। कानून के जानकार बताते हैं कि इस तरह की हरकतों को रोकना सामाजिक और प्रशासनिक दोनों जिम्मेदारियों में आता है। अंधविश्वास के कारण हुई इस मौत ने पानीपत के लोगों को झकझोर कर रख दिया है। प्रशासन अब ऐसे मामलों को रोकने के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाने पर भी विचार कर रहा है।

अंत में, यह घटना हमें याद दिलाती है कि विज्ञान से बढ़कर कुछ नहीं है। करंट लगने या किसी अन्य आपात स्थिति में केवल डॉक्टर और मेडिकल सहायता ही एकमात्र विकल्प है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना बेहद जरूरी है। उम्मीद है कि पुलिस इस मामले में कड़ी कार्रवाई करेगी ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसे अंधविश्वास के कारण अपनों को न खोना पड़े।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस रिपोर्ट में प्रस्तुत जानकारी प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस द्वारा दी गई प्रारंभिक सूचनाओं पर आधारित है। यह केवल जनहित में जागरूकता के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी आपातकालीन स्थिति में केवल पंजीकृत चिकित्सकों की सलाह लें। इस रिपोर्ट में दी गई जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी प्रशासनिक या व्यक्तिगत निर्णय हेतु लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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