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विश्व स्किज़ोफ्रेनिया जागरूकता दिवस 2026: भ्रांतियों का निवारण

विश्व स्किज़ोफ्रेनिया जागरूकता दिवस 2026 पर पीबीएम अस्पताल में कार्यशाला हुई। विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक उपचार और समय पर पहचान पर बल दिया।

By अजय त्यागी
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advertisement13Aug2026%20copy.jpg विश्व स्किज़ोफ्रेनिया जागरूकता दिवस कार्यक्रम

विश्व स्किज़ोफ्रेनिया जागरूकता दिवस कार्यक्रम

बीकानेर के पीबीएम अस्पताल के मानसिक एवं नशामुक्ति विभाग में विश्व स्किज़ोफ्रेनिया जागरूकता दिवस 2026 के उपलक्ष में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस वर्ष की थीम 'शीघ्र पहचान, समय पर उपचार और बेहतर पुनर्प्राप्ति' के इर्द-गिर्द केंद्रित रही। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में इस गंभीर मानसिक विकार के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना और रोगियों के शुरुआती दौर में उपचार सुनिश्चित करना है।

विभाग के आचार्य एवं विभागाध्यक्ष डॉ. हरफूल सिंह ने बताया कि पूरे विश्व की लगभग 1 प्रतिशत आबादी इस बीमारी से प्रभावित है। उन्होंने कहा कि "हमें मानसिक बीमारियों को डर, अंधविश्वास और कलंक की दृष्टि से नहीं, बल्कि समझ, संवेदनशीलता और वैज्ञानिक उपचार के नजरिए से देखने की आवश्यकता है।" यह दिवस हमें याद दिलाता है कि सही समय पर लिया गया उपचार किसी का जीवन बदल सकता है।

स्किज़ोफ्रेनिया और लक्षण

स्किज़ोफ्रेनिया एक गंभीर लेकिन उपचार योग्य मानसिक विकार है, जिसमें व्यक्ति की सोच, व्यवहार और वास्तविकता को समझने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। इसमें रोगी को ऐसी आवाजें सुनाई दे सकती हैं जो मौजूद नहीं होतीं, अत्यधिक शक हो सकता है या वह स्वयं को दूसरों से अलग करने लगता है। इसका प्रभाव व्यक्ति की पढ़ाई, नौकरी और पारिवारिक जीवन पर बहुत गहरा पड़ता है।

अक्सर परिवार वाले इन शुरुआती बदलावों जैसे चुप्पी, व्यवहार में असामान्यता या अनावश्यक भय को महज तनाव, जिद या स्वभाव मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। डॉ. हरफूल सिंह ने स्पष्ट किया कि विश्व स्किज़ोफ्रेनिया जागरूकता दिवस 2026 का संदेश यही है कि लक्षणों को पहचानते ही चिकित्सकीय परामर्श लिया जाए। बीमारी को समय पर पहचानना ही बेहतर पुनर्प्राप्ति की दिशा में सबसे पहला और अनिवार्य कदम है।

भ्रांतियां और उपचार

विभाग के आचार्य डॉ. श्रीगोपाल गोयल ने कहा कि समाज में आज भी कई लोग इन लक्षणों को ऊपरी हवा, जादू-टोना या देवी-प्रकोप से जोड़ देते हैं। परिणामस्वरूप परिवार झाड़-फूंक या तांत्रिक उपायों का सहारा लेते हैं। "आस्था मनोबल दे सकती है, लेकिन यह वैज्ञानिक उपचार का विकल्प नहीं बन सकती।" उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी हानिकारक प्रथाओं से शारीरिक चोटों के साथ मानसिक पीड़ा और उपचार में देरी बढ़ जाती है।

डॉ. गोयल ने मनोचिकित्सा के तकनीकी पहलू 'Duration of Untreated Psychosis' (DUP) का उल्लेख करते हुए बताया कि जितनी जल्दी उपचार शुरू हो, उतनी बेहतर रिकवरी संभव है। साथ ही उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक संवाद के लिए टेली मानस टोल फ्री नंबर 14416 की जानकारी भी साझा की। यह सुविधा किसी भी व्यक्ति को सही सलाह और मार्गदर्शन प्राप्त करने में मदद कर सकती है।

आधुनिक चिकित्सा पद्धति

सीनियर रेजिडेंट चिकित्सक डॉ. अदिति महाजन ने दवाओं को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर किया। उन्होंने कहा कि "नई पीढ़ी की आधुनिक एंटीसाइकोटिक दवाएँ पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हैं और इनके दुष्प्रभाव भी काफी कम हैं।" अब लॉन्ग-एक्टिंग इंजेक्शन, मनोवैज्ञानिक परामर्श, परिवार-आधारित हस्तक्षेप और पुनर्वास सेवाएँ उपलब्ध हैं। ये विकल्प मरीज को आत्मनिर्भर और एक सम्मानजनक जीवन जीने की ओर वापस ले जाने में मदद कर रहे हैं।

कार्यक्रम में मरीज, उनके परिजन, रेजिडेंट चिकित्सक डॉ. पवन जोशी, डॉ. अनामिका, डॉ. श्रेया, डॉ. अक्षय कुमार तथा नर्सिंग ऑफिसर्स ने भाग लिया। जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम से विनोद कुमार पंचारिया व राजीराम ने भी भागीदारी निभाई। कार्यक्रम के दौरान जागरूकता बढ़ाने के लिए पेंफलेट्स और पुस्तकें वितरित की गईं। विश्व स्किज़ोफ्रेनिया जागरूकता दिवस 2026 का समापन सभी के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

जागरूकता का संदेश

स्किज़ोफ्रेनिया के प्रति समाज का नजरिया बदलना अब अनिवार्य है। यदि परिवार शुरुआती संकेतों को समझें और उन्हें अंधविश्वास के बजाय मनोचिकित्सक के पास ले जाएं, तो मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं। सामुदायिक समर्थन और परिवार का साथ एक रोगी के लिए संजीवनी का कार्य करता है। पीबीएम अस्पताल का यह प्रयास समाज में वैज्ञानिक चेतना जागृत करने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।

अंत में, यह समझना आवश्यक है कि मानसिक स्वास्थ्य ही शारीरिक स्वास्थ्य की नींव है। हमें विश्व स्किज़ोफ्रेनिया जागरूकता दिवस 2026 के माध्यम से यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी रोगी उचित उपचार से वंचित न रहे। सही समय पर वैज्ञानिक मदद लेकर हम न केवल एक व्यक्ति, बल्कि पूरे परिवार को एक अंधकारमय भविष्य से बचा सकते हैं। आइए, मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता अपनाएं।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस रिपोर्ट में प्रस्तुत जानकारी पीबीएम अस्पताल के विशेषज्ञों द्वारा कार्यशाला में साझा किए गए तथ्यों पर आधारित है। यह जनहित में सूचना साझा करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। स्किज़ोफ्रेनिया के लक्षणों या किसी भी मानसिक समस्या के लिए तुरंत योग्य मनोचिकित्सक से संपर्क करें। इस रिपोर्ट में दी गई जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय हेतु लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief