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कांगो में इबोला वायरस का कहर: बढ़ते मामलों से चिंता बढ़ी

कांगो में इबोला वायरस का कहर बढ़ रहा है। 900 से ज्यादा मामले मिलने से स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हैं। भारत सरकार ने भी यात्रा एडवाइजरी दी है।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

अफ्रीकी देश कांगो में इबोला वायरस का कहर तेजी से अपने पैर पसार रहा है, जिसने वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। देश के पूर्वी हिस्सों, विशेष रूप से इतुरी प्रांत में इस संक्रामक बीमारी ने अब गंभीर रूप ले लिया है। कांगो सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, संदिग्ध मामलों की संख्या 900 के पार पहुंच चुकी है। लगातार बढ़ती मौतों और संक्रमण के मामलों ने स्वास्थ्य प्रशासन की चिंता को कई गुना बढ़ा दिया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस प्रकोप को कांगो के लिए एक बहुत बड़ा खतरा करार दिया है। हालाँकि, वर्तमान में वैश्विक स्तर पर इसके फैलने का जोखिम कम आंका गया है, लेकिन वायरस की आक्रामक प्रकृति को देखते हुए सतर्कता बरतना अनिवार्य है। इस बीच, भारत सरकार ने भी स्थिति की गंभीरता को समझते हुए अपने नागरिकों के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी की है, जिसमें यात्रा को लेकर विशेष सावधानी बरतने का सुझाव दिया गया है।

गंभीर प्रकोप स्थिति

कांगो के संचार मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, देश में अब तक 904 संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जबकि 119 लोगों की संदिग्ध मौतें दर्ज की गई हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, "मौजूदा प्रकोप के लिए बंडिबुग्यो स्ट्रेन जिम्मेदार माना जा रहा है।" यह इबोला का एक अत्यंत घातक स्वरूप है और दुर्भाग्यवश इसके लिए अभी तक कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशिष्ट दवा उपलब्ध नहीं है, जिससे हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।

संक्रमण का सबसे ज्यादा असर इतुरी प्रांत में देखा जा रहा है, जहाँ स्वास्थ्य ढांचे पर भारी दबाव है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस संक्रमण की श्रृंखला को समय रहते नहीं तोड़ा गया, तो यह आसपास के देशों जैसे युगांडा और दक्षिण सूडान में भी फैल सकता है। विश्व स्तर पर कई देशों ने अब अफ्रीकी देशों की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए स्क्रीनिंग प्रक्रिया को काफी सख्त कर दिया है।

वैश्विक स्वास्थ्य चिंता

कांगो में इबोला वायरस का कहर दुनिया के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि कैसे संक्रामक बीमारियां तेजी से वैश्विक खतरा बन सकती हैं। इबोला का नाम कांगो की उसी नदी के नाम पर पड़ा था, जहाँ 1976 में इस बीमारी की पहली बार पहचान हुई थी। यह एक ज़ूनोटिक बीमारी है, जो संक्रमित जानवरों से इंसानों में फैलती है और फिर व्यक्ति-से-व्यक्ति के संपर्क के माध्यम से अत्यधिक संक्रामक हो जाती है।

लक्षणों में तेज बुखार, अत्यधिक उल्टी, कमजोरी, शरीर में असहनीय दर्द और आंतरिक रक्तस्राव शामिल हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जोर देते हुए कहा कि "संक्रमण रोकने के लिए सख्त साफ-सफाई, संक्रमित व्यक्तियों से दूरी और मेडिकल सुरक्षा उपायों का पालन करना एकमात्र बचाव है।" स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार इस बात की मॉनिटरिंग कर रही हैं कि कहीं वायरस का उत्परिवर्तन (mutation) इसे और अधिक खतरनाक न बना दे।[1]

भारत में यात्रा एडवाइजरी

भारत सरकार ने स्थिति को देखते हुए कांगो, युगांडा और पड़ोसी देशों की यात्रा पर जाने वाले नागरिकों के लिए सतर्कता एडवाइजरी जारी की है। एडवाइजरी में कहा गया है, "भारतीय नागरिक इन प्रभावित देशों की अनावश्यक यात्रा को फिलहाल टाल दें।" जिससे इबोला वायरस का कहर भारत में प्रवेश ना कर सके। जो भारतीय इन क्षेत्रों में रह रहे हैं, उन्हें स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के सभी निर्देशों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है।

सरकार ने भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहने और व्यक्तिगत स्वच्छता के प्रति अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की है। पिछले अनुभवों को देखते हुए भारत सरकार ने एयरपोर्ट्स पर भी निगरानी बढ़ा दी है। भारतीय स्वास्थ्य तंत्र किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है, ताकि बाहरी संक्रमण को देश की सीमाओं के भीतर आने से रोका जा सके।

भारत की स्थिति

भारत में इबोला का इतिहास देखें तो साल 2014 में पश्चिम अफ्रीका में फैले प्रकोप के दौरान केवल एक मामला सामने आया था। लाइबेरिया से लौटे एक 26 वर्षीय भारतीय नागरिक में इसकी पुष्टि हुई थी, जिसे एयरपोर्ट स्क्रीनिंग के दौरान ही पहचान लिया गया था। बाद में उसे आइसोलेट कर इलाज किया गया और संक्रमण को फैलने से सफलतापूर्वक रोक लिया गया।

कांगो में इबोला वायरस का कहर के बावजूद फिलहाल भारत में कोई भी सक्रिय मामला दर्ज नहीं है। स्वास्थ्य मंत्रालय पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। देश की चिकित्सा प्रणालियां अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल के अनुसार पूरी तरह सतर्क हैं। आमजन को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी प्रकार की भ्रामक खबरों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक स्वास्थ्य बुलेटिनों की जानकारी को ही विश्वसनीय मानें।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस रिपोर्ट में प्रस्तुत जानकारी अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य रिपोर्टों और सरकारी एडवाइजरी पर आधारित है। इबोला जैसे संक्रामक रोगों के संबंध में आधिकारिक स्वास्थ्य अपडेट्स का पालन करें। इस रिपोर्ट में दी गई जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय या चिकित्सा राय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

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