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शोपियां में एनआईए छापेमारी: सिराज उल उलूम स्कूल निशाने पर

शोपियां में एनआईए छापेमारी के तहत सिराज उल उलूम और श्रीनगर के जमीयत उल बनात पर कार्रवाई हुई है। संस्थान पर टेरर फंडिंग के गंभीर आरोप हैं।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ जारी जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत आज शोपियां में एनआईए छापेमारी का एक बड़ा सिलसिला देखा गया। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की टीम ने शोपियां के इमाम साहिब स्थित 'सिराज उल उलूम' नामक संस्थान को मुख्य केंद्र बनाकर अपनी कार्रवाई तेज की है। हाल ही में कश्मीर प्रशासन ने इस स्कूल को गैर-कानूनी संस्था घोषित किया था और इसके ऊपर यूएपीए (UAPA) के तहत कड़े प्रतिबंध लगाए थे।

इस संस्थान पर लंबे समय से प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के साथ मिलीभगत और टेरर फंडिंग के गंभीर आरोप लगे थे। एनआईए के अधिकारियों का मानना है कि इस स्कूल का उपयोग युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए धन मुहैया कराने के लिए किया जा रहा था। जांच एजेंसी अब उन सभी संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की बारीकी से जांच कर रही है, जो सीधे तौर पर इन संदिग्ध गतिविधियों से जुड़ी हैं।[1]

छापेमारी का विस्तार

शोपियां के साथ-साथ एनआईए ने अपनी जांच का दायरा श्रीनगर तक भी बढ़ा दिया है। श्रीनगर के लाल बाजार इलाके में स्थित 'जमीयत-उल-बनात' संस्थान पर भी एनआईए की छापेमारी जारी है। इस दौरान शोपियां में एक अन्य संदिग्ध घर पर भी सुरक्षा बलों की मौजूदगी में तलाशी अभियान चल रहा है। एनआईए की यह कार्रवाई टेरर फंडिंग नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने की एक बड़ी योजना का हिस्सा मानी जा रही है।

"संस्थान पर टेरर फंडिंग और यहाँ के कुछ लोगों के प्रतिबंधित संगठनों से सीधे संबंध होने के ठोस सबूत मिले हैं।" इस जानकारी के बाद से ही एजेंसियां सक्रिय हो गई थीं। छापेमारी के दौरान सुरक्षा बलों ने इलाके को पूरी तरह घेर लिया है ताकि किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। पिछले कुछ महीनों में कश्मीर घाटी में आतंकी संगठनों के वित्तीय स्रोतों पर यह अब तक की सबसे कड़ी कार्रवाई बताई जा रही है।

कानूनी शिकंजा कसा

हाल ही में कश्मीर प्रशासन द्वारा दारुल उलूम जामिया सिराज उल उलूम स्कूल को गैर-कानूनी घोषित करना इस मामले में एक बड़ा कानूनी कदम था। प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि किसी भी संस्थान को शिक्षा की आड़ में देश विरोधी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। यूएपीए के तहत की गई इस कार्रवाई के बाद से ही संस्थान के पदाधिकारी एजेंसियों के रडार पर थे।

एनआईए की जांच अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन संस्थानों को देश के बाहर से कितना पैसा मिल रहा था।" शोपियां में एनआईए छापेमारी में यह भी स्पष्ट हुआ है कि इन संस्थानों का इस्तेमाल युवाओं को बरगलाने के लिए किया जाता रहा है।" एजेंसियों के पास इन संस्थानों के बैंक खातों और संदिग्ध लोगों के साथ हुए संवादों के पुख्ता रिकॉर्ड मौजूद हैं, जिनकी पुष्टि अब छापेमारी के दौरान बरामद दस्तावेजों से की जा रही है।

सुरक्षा और सतर्कता

कश्मीर घाटी में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए एनआईए और स्थानीय पुलिस मिलकर काम कर रही हैं। शोपियां और श्रीनगर के इन इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद है। स्थानीय लोगों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सुरक्षा बलों ने अतिरिक्त सावधानी बरती है। एनआईए की इस कार्रवाई का उद्देश्य केवल छापेमारी करना नहीं, बल्कि पूरे टेरर नेटवर्क के मास्टरमाइंड्स तक पहुंचना है।

विशेषज्ञों का कहना है कि घाटी में इस प्रकार की कार्यवाहियों से आतंकियों के हौसले पस्त हुए हैं। जब से टेरर फंडिंग के खिलाफ शिकंजा कसा गया है, तब से कश्मीर की आंतरिक सुरक्षा में काफी सुधार देखने को मिला है। शोपियां में एनआईए छापेमारी यह संदेश देती है कि कानून के हाथ बहुत लंबे हैं और देश की एकता को नुकसान पहुंचाने वाली संस्थाओं को बख्शा नहीं जाएगा।

भविष्य की दिशा

एनआईए के अधिकारी जल्द ही इन छापेमारी के नतीजों को सार्वजनिक कर सकते हैं। बरामद दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों से कई और बड़े नाम सामने आने की संभावना है। आने वाले समय में टेरर फंडिंग से जुड़े अन्य संस्थानों पर भी कार्रवाई हो सकती है। सरकार यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि घाटी की शिक्षण संस्थाएं केवल ज्ञान का केंद्र बनें, न कि आतंक का कारखाना।

अंत में, इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित किया है कि भारत की खुफिया एजेंसियां हर समय सतर्क हैं। शोपियां में एनआईए छापेमारी के माध्यम से न केवल आतंकवाद की कमर तोड़ी जा रही है, बल्कि युवाओं के भविष्य को भी गलत हाथों में जाने से बचाने का प्रयास किया जा रहा है। आने वाले दिन घाटी की शांति और सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होंगे।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस रिपोर्ट में प्रस्तुत जानकारी जांच एजेंसी और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। यह केवल जनहित में सूचना साझा करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी संस्थान के विरुद्ध न्यायिक प्रक्रिया कानून द्वारा निर्धारित मानदंडों के अधीन है। इस रिपोर्ट में दी गई जानकारी हेतु लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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