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भारत की पहली जिंक मार्क सर्टिफाइड खदान बनी रामपुरा आगुचा माइन

हिंदुस्तान जिंक की रामपुरा आगुचा माइन को जिंक मार्क सर्टिफिकेशन मिला है। यह भारत की पहली जिंक मार्क सर्टिफाइड खदान बन गई है।

By अजय त्यागी
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advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने खनन क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इसकी रामपुरा आगुचा माइन अब जिंक मार्क सर्टिफाइड खदान बन गई है। यह खदान न केवल दुनिया की सबसे बड़ी भूमिगत जिंक-सीसा खदान है, बल्कि अब यह भारत की पहली ऐसी खदान बन गई है जिसे इस वैश्विक फ्रेमवर्क के तहत प्रमाणित किया गया है। यह उपलब्धि कंपनी के जिम्मेदार उत्पादन और पारदर्शिता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को पूरी दुनिया के सामने सिद्ध करती है।

जिंक मार्क एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त एश्योरेंस फ्रेमवर्क है, जो ईएसजी मानकों और जिम्मेदार सोर्सिंग प्रथाओं को प्रमाणित करता है। हिंदुस्तान जिंक ने हाल ही में अपने चंदेरिया स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स के लिए भी जिंक मार्क सर्टिफाइड की मान्यता प्राप्त की थी। अब रामपुरा आगुचा माइन भी जिंक मार्क सर्टिफाइड होने के बाद कंपनी भारत की एकमात्र ऐसी इकाई बन गई है, जो अपनी पूरी मूल्य श्रृंखला में जिम्मेदार उत्पादन सुनिश्चित कर रही है।

अंतरराष्ट्रीय मानक

जिंक मार्क सर्टिफाइड- यह सर्टिफिकेशन एक स्वतंत्र तृतीय-पक्ष मूल्यांकन के बाद प्रदान किया जाता है, जो खदान के पर्यावरणीय, सामाजिक और शासन मापदंडों की जांच करता है। रामपुरा आगुचा माइन ने इन सभी वैश्विक पैमानों पर उत्कृष्टता दिखाई है। कंपनी का उद्देश्य माइनिंग से लेकर स्मेल्टिंग तक एक ऐसी पारदर्शी सप्लाई चेन बनाना है, जो अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों की बदलती प्राथमिकताओं के अनुरूप हो। आज के वैश्विक बाजार में धातुओं के उत्पादन में पारदर्शिता का विशेष महत्व है।

जैसे-जैसे दुनिया भर के उद्योग स्थायी खरीद और जिम्मेदारी की ओर बढ़ रहे हैं, यह जिंक मार्क सर्टिफिकेशन ग्राहकों के लिए हिंदुस्तान जिंक की साख को और मजबूत करता है। जो ग्राहक पारदर्शी और ईएसजी अनुरूप कच्चे माल की तलाश में हैं, उनके लिए कंपनी अब एक भरोसेमंद विकल्प बन गई है। यह उपलब्धि न केवल खदान के परिचालन को सुदृढ़ करती है, बल्कि पूरी भारतीय खनन इंडस्ट्री के लिए एक नया वैश्विक मानक भी स्थापित करती है।

सीईओ का बयान

इस उपलब्धि पर कंपनी के सीईओ अरुण मिश्रा ने कहा कि, "रामपुरा आगुचा माइन को जिंक मार्क सर्टिफिकेशन मिलना, हिंदुस्तान जिंक के अपनी पूरी वैल्यू चेन में जिम्मेदार उत्पादन और ईएसजी उत्कृष्टता के प्रति एकीकृत दृष्टिकोण को दर्शाता है।" उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार में ग्राहक अब ऐसी धातुओं की मांग कर रहे हैं, जो उनकी स्थिरता प्राथमिकताओं के साथ-साथ कड़े पर्यावरणीय नियमों का भी पालन करती हों। यह पहचान कंपनी के ग्राहकों के विश्वास को और भी अधिक प्रगाढ़ करती है।

हिंदुस्तान जिंक आज इस्पात गैल्वनीकरण, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को अपनी सेवाएं प्रदान कर रहा है। इन क्षेत्रों में कम कार्बन उत्सर्जन वाले पदार्थों की मांग निरंतर बढ़ रही है। कंपनी की यह नई पहचान उसे ऐसे ग्राहकों को सहायता देने में सक्षम बनाती है, जो भविष्य के लिए तैयार सस्टेनेबल सप्लाई चेन की ओर बढ़ रहे हैं। कंपनी अपनी इसी प्रतिबद्धता के साथ उद्योग में नवाचार को बढ़ावा दे रही है।

सस्टेनेबिलिटी पर जोर

रामपुरा आगुचा माइन अपनी टेक्नोलॉजी-आधारित खनन और परिचालन उत्कृष्टता के माध्यम से उद्योग के लिए नए मानक स्थापित कर रही है। यह खदान डीकार्बोनाइजेशन, सर्कुलर अर्थव्यवस्था प्रथाओं और जैव विविधता संरक्षण पर विशेष ध्यान दे रही है। कंपनी का यह एकीकृत दृष्टिकोण उसे एसएण्डपी ग्लोबल कॉर्पोरेट सस्टेनेबिलिटी एसेसमेंट 2025 में लगातार तीन बार विश्व की सबसे सस्टेनेबल मेटल और माइनिंग कंपनी के रूप में स्थापित करने में सफल रहा है।

कंपनी 2050 तक नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए भी पूरी तरह संकल्पबद्ध है। अपनी जिम्मेदारी से उत्पादित धातुओं की आपूर्ति के माध्यम से, हिंदुस्तान जिंक न केवल औद्योगिक विकास में योगदान दे रहा है, बल्कि बुनियादी ढांचे के निर्माण में भी एक सस्टेनेबल भागीदार के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। यह पूरी यात्रा कंपनी की दीर्घकालिक दूरदर्शिता और पर्यावरण के प्रति उसके जिम्मेदार रवैये को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस रिपोर्ट में दी गई जानकारी कंपनी की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित है। सर्टिफिकेशन और ईएसजी मानक समय के साथ परिवर्तन के अधीन हो सकते हैं। अतः किसी भी निवेश या आधिकारिक निर्णय लेने से पूर्व संबंधित संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट से विस्तृत जानकारी प्राप्त करें। इस रिपोर्ट में दी गई सामग्री के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief