कर्मचारियों की लंबित मांगें पूरी ना होने पर किया अनूठा प्रदर्शन
भीलवाड़ा में कर्मचारियों की लंबित मांगें पूरी न होने पर महासंघ ने अनोखे तरीके से विरोध दर्ज करते हुए मरीजों को फल वितरित किए।
अनूठा विरोध प्रदर्शन, मरीजों को बांटे फल
अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ एकीकृत के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौर के आह्वान पर आज भीलवाड़ा में एक अनूठा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। जिला अध्यक्ष लक्की ब्यावट के नेतृत्व में महात्मा गांधी अस्पताल के कर्मचारियों ने अपनी आपातकालीन सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए कार्य बहिष्कार नहीं किया, बल्कि इसके बजाय उन्होंने वार्डों में जाकर मरीजों और उनके परिजनों को फल वितरित कर सरकार के उदासीन रवैये के खिलाफ अपना आक्रोश प्रकट किया।
महासंघ के कार्यकारी जिलाध्यक्ष अमित व्यास ने बताया कि विभिन्न कर्मचारी संगठनों की संयुक्त बैठक में सरकार के संवेदनहीन रवैये पर भारी रोष व्यक्त किया गया है। "कर्मचारियों की लंबित मांगें पूरी नहीं होने के कारण पूरे प्रदेश में भारी असंतोष व्याप्त है," उन्होंने स्पष्ट किया कि लंबे समय से उपेक्षा के कारण अब कर्मचारियों ने प्रदेशव्यापी आंदोलन का निर्णय लिया है, जो 25 मई से सात दिनों तक जारी रहेगा।
मुख्य मांगे और रोष
आंदोलन का मुख्य कारण सरकार द्वारा कर्मचारियों की वाजिब मांगों पर ध्यान न देना है। पिछले डेढ़ माह से वेतन कटौती के बावजूद निजी अस्पतालों में आरजीएचएस सुविधा ठप पड़ी है, जिससे गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कर्मचारी और पेंशनर दर-दर भटकने को मजबूर हैं। इसके अलावा, वित्तीय वर्ष बीत जाने के बावजूद समर्पित अवकाश का नगद भुगतान न होना और वोकेशनल प्रशिक्षकों की लंबित मांगें सरकार की विफलता को दर्शाती हैं।
इसके साथ ही, महात्मा गांधी अस्पताल में कार्यरत कंप्यूटर कर्मियों को सीएसआर नियमों में शामिल करने जैसी प्रमुख 25 सूत्रीय मांगें लंबे समय से अनसुलझी हैं। महासंघ ने पूर्व में 20 मई को अतिरिक्त जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी थी कि मांगे नहीं मानी गईं तो सांकेतिक प्रदर्शन किया जाएगा। "इसके बावजूद सरकार द्वारा कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, जिससे कर्मचारियों में काफी आक्रोश है," व्यास ने कहा।
आगामी आंदोलन की दिशा
जिला प्रवक्ता गिरिराज लड्ढा ने बताया कि महासंघ ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अगले सात दिनों तक चलने वाले इस विरोध प्रदर्शन के बाद भी सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो प्रदेश स्तर पर उग्र आंदोलन किया जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि वे अपनी ड्यूटी के प्रति समर्पित हैं, लेकिन सरकार की संवेदनहीनता उन्हें इस तरह के प्रदर्शन के लिए मजबूर कर रही है।
अब यह देखना होगा कि सरकार इन कर्मचारियों की लंबित मांगें को लेकर कितनी जल्दी संज्ञान लेती है। आंदोलनरत कर्मचारियों का कहना है कि वे तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक उनकी वाजिब मांगों का समाधान नहीं हो जाता। उनका यह शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ विरोध प्रदर्शन सरकारी कार्यालयों में चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी व्यापक रूप ले सकता है।
सेवा और अधिकार
यह पहली बार नहीं है जब सरकारी कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ अपनी आवाज उठाई है, लेकिन अस्पताल में फल वितरित करके विरोध जताना उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है। वे चाहते हैं कि आरजीएचएस सुविधा को बहाल किया जाए और उनके हक का भुगतान उन्हें मिले। सरकार के लिए आवश्यक है कि वह वार्ता के माध्यम से कर्मचारियों की लंबित मांगें का जल्द निपटारा करे ताकि आम जनता को स्वास्थ्य सेवाओं में कोई असुविधा न हो।
भीलवाड़ा में महासंघ के इस प्रदर्शन ने साफ कर दिया है कि कर्मचारी अब किसी भी हाल में अपनी उपेक्षा बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं। यदि प्रदेश सरकार ने समय रहते उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया तो इसका असर आगामी समय में सरकारी कामकाज पर पड़ सकता है। अंत में, सरकार से यही अपेक्षा है कि वह अपने कर्मचारियों की कर्मचारियों की लंबित मांगें को गंभीरता से ले और सहानुभूतिपूर्वक विचार करे।
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
इस रिपोर्ट में दी गई जानकारी कर्मचारी महासंघ द्वारा जारी बयानों और स्थानीय समाचार स्रोतों पर आधारित है। सरकारी आदेश और नीतियां समय के साथ परिवर्तन के अधीन हैं। अतः किसी भी प्रकार का अंतिम निर्णय लेने से पूर्व संबंधित विभाग से आधिकारिक जानकारी अवश्य प्राप्त करें। इस रिपोर्ट में दी गई सामग्री के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं होंगे।