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डीजीसीए का ईबोला संक्रमण को लेकर विमानन कंपनियों को निर्देश

डीजीसीए ने ईबोला संक्रमण के खतरे को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस के लिए स्वास्थ्य प्रोटोकॉल और अनिवार्य स्व-घोषणा पत्र नियम जारी किए हैं।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

ईबोला संक्रमण के खतरे को देखते हुए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने सभी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस के लिए एक कड़ा प्रोटोकॉल लागू किया है। यह निर्णय स्वास्थ्य सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लिया गया है। प्रभावित देशों से आने वाली उड़ानों में यात्रियों की कड़ी निगरानी की जाएगी। डीजीसीए के अनुसार, यात्रियों को अब हवाई अड्डे पर उतरने से पूर्व अनिवार्य रूप से स्व-घोषणा पत्र जमा करना होगा।

विमानन नियामक ने स्पष्ट किया है कि ईबोला संक्रमण के खतरे को देखते हुए एयर इंडिया, इंडिगो और अकासा एयर सहित 13 प्रमुख एयरलाइंस को कांगो से आने वाले यात्रियों के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी। इसके साथ ही, युगांडा से आने वाली 17 एयरलाइंस को भी इन दिशानिर्देशों का अक्षरशः पालन करना अनिवार्य है। स्वास्थ्य सुरक्षा की दृष्टि से किसी भी यात्री को बिना फॉर्म भरे बाहर आने की अनुमति नहीं होगी।[1]

सुरक्षा प्रोटोकॉल

उड़ान के दौरान, सभी यात्रियों को बीमारी के लक्षणों जैसे तेज बुखार, मांसपेशियों में दर्द और अत्यधिक कमजोरी के प्रति जागरूक किया जाएगा। चालक दल को निर्देश दिए गए हैं कि यदि कोई यात्री इन लक्षणों के साथ मिलता है, तो उन्हें तुरंत मेडिकल यूनिट को सूचना देनी होगी। "ईबोला संक्रमण के खतरे को देखते हुए सभी यात्री, राष्ट्रीयता की परवाह किए बिना, इस स्व-घोषणा प्रक्रिया के अधीन हैं," आधिकारिक परामर्श में कहा गया है।

विमान के भीतर किसी भी संदिग्ध मामले के पाए जाने पर, चालक दल को विमान को एक अलग बे (Bay) में पार्क करने का निर्देश दिया गया है। संक्रमित माने जाने वाले यात्री को विमान के पिछले हिस्से में बैठाया जाएगा और उसके आसपास की तीन पंक्तियों को पूरी तरह खाली रखा जाएगा। यह कदम संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए ईबोला संक्रमण के खतरे को देखते हुए एक रणनीतिक सुरक्षा कवच है।

संसाधनों की तैयारी

विमानन कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने विमानों में पर्याप्त मात्रा में ट्रिपल-लेयर मास्क, डिस्पोजेबल दस्ताने, पीपीई किट और बायो-हजार्ड डिस्पोजल बैग का स्टॉक रखें। इन सुरक्षा उपकरणों का उपयोग संदिग्ध लक्षणों वाले यात्रियों और उनके संपर्क में आने वाले लोगों के लिए किया जाएगा। एयरलाइंस को ग्राउंड स्टाफ के साथ समन्वय बनाकर तुरंत चिकित्सा टीम को सूचित करने के लिए कहा गया है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने विमानन कंपनियों की इस तैयारी पर नजर रखी है। यद्यपि भारत में वर्तमान में ईबोला का कोई भी मामला सामने नहीं आया है, फिर भी डीजीसीए ने सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। ईबोला संक्रमण के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग हवाई अड्डों पर चौबीसों घंटे निगरानी कर रहा है ताकि संक्रमण की रोकथाम के लिए सभी आवश्यक कदम समय पर उठाए जा सकें।

भविष्य की सतर्कता

निष्कर्षतः, ईबोला संक्रमण के खतरे को देखते हुए सरकार और विमानन क्षेत्र द्वारा उठाए गए ये कदम स्वास्थ्य संप्रभुता को मजबूत करते हैं। यह प्रोटोकॉल न केवल अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन है, बल्कि भारत के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक ठोस प्रयास भी है। निरंतर निगरानी और सावधानी के माध्यम से ही इस प्रकार के वैश्विक स्वास्थ्य खतरों को देश की सीमा से बाहर रखना संभव है।

डिस्क्लेमर:

प्रस्तुत रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों/स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा प्रोटोकॉल और ईबोला से जुड़े नीतिगत निर्णयों के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं हैं। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी स्वास्थ्य संबंधी तथ्यों की पुष्टि आधिकारिक स्वास्थ्य मंत्रालय के पोर्टल्स से करें। किसी भी कानूनी विवाद के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी तरह के दावे का उत्तरदायित्व स्वीकार नहीं करते हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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