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सीबीएसई पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में त्रुटियों से छात्रों में आक्रोश

सीबीएसई पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान छात्रों ने आंसर शीट मिसमैच के आरोप लगाए हैं। बोर्ड ने आईआईटी विशेषज्ञों से जांच शुरू करवाई।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

सीबीएसई पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया वर्तमान में गंभीर विवादों का केंद्र बन गई है, क्योंकि छात्रों ने उत्तर पुस्तिकाओं में भारी विसंगतियों के आरोप लगाए हैं। दिल्ली के एक छात्र वेदांत का सोशल मीडिया पोस्ट वायरल होने के बाद, कई अन्य छात्रों ने भी दावा किया है कि बोर्ड द्वारा अपलोड की गई स्कैन की गई कॉपी में उनकी अपनी लिखावट मौजूद नहीं है। यह घटना अब एक बड़ा प्रशासनिक मुद्दा बन गई है।

छात्रों का कहना है कि डिजिटल ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम में संभावित तकनीकी खराबी के कारण उनकी उत्तर पुस्तिकाएं आपस में बदल गई हैं। सीबीएसई पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान सामने आए इस दावे ने शिक्षा जगत में हड़कंप मचा दिया है। छात्रों ने अपनी मेहनत के परिणामों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए बोर्ड से तत्काल ऑडिट और भौतिक सत्यापन की मांग की है।[1]

बोर्ड का आश्वासन

इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए बोर्ड के एक वरिष्ठ सूत्र ने स्पष्ट किया कि शिकायतों को "टॉप प्रायोरिटी" पर रखा गया है। बोर्ड का दावा है कि, "सीबीएसई पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया से संबंधित प्रत्येक शिकायत का समाधान पूरी जिम्मेदारी के साथ किया जा रहा है।" अधिकारी लगातार छात्रों और अभिभावकों के साथ संपर्क बनाए हुए हैं ताकि उनकी चिंताओं को वैज्ञानिक तरीके से दूर किया जा सके।

छात्रों की शिकायतों के समाधान हेतु बोर्ड ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों का उपयोग किया है। खबरों के अनुसार, कुछ मामलों में बोर्ड ने छात्रों को उनकी सही उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराकर परिणामों को भी अपडेट किया है। सीबीएसई पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के प्रति बोर्ड की यह सक्रियता छात्रों के घटते विश्वास को दोबारा बहाल करने का एक अनिवार्य प्रयास मानी जा रही है।

तकनीकी जांच का मोर्चा

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सीबीएसई पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में व्याप्त तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए आईआईटी-मद्रास और आईआईटी-कानपुर के विशेषज्ञों को नियुक्त किया है। ये तकनीकी विशेषज्ञ पूरे ओएसएम सिस्टम और स्कैनिंग प्रक्रिया की गहन जांच करेंगे। उद्देश्य यह है कि भविष्य में किसी भी प्रकार की मानवीय या तकनीकी भूल से बचा जा सके और प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी बनाया जा सके।

विशेषज्ञों की यह टीम उन सभी मामलों का विश्लेषण करेगी जहां छात्रों ने आंसर शीट मिसमैच की शिकायत की है। सीबीएसई पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया को त्रुटिहीन बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। इससे न केवल सिस्टम की खामियां सामने आएंगी, बल्कि बोर्ड को भविष्य के लिए एक मजबूत डिजिटल सुरक्षा ढांचा तैयार करने में भी काफी मदद मिलेगी।

भविष्य की राह

निष्कर्षतः, सीबीएसई पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के वर्तमान विवाद ने मूल्यांकन प्रणाली में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित किया है। छात्रों की शिकायतों का निवारण न केवल उनके भविष्य के लिए जरूरी है, बल्कि बोर्ड की विश्वसनीयता के लिए भी अनिवार्य है। पारदर्शिता और तकनीक का सही सामंजस्य ही इस प्रक्रिया को विश्वसनीय बना सकता है, जिसके लिए आईआईटी विशेषज्ञों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।

डिस्क्लेमर:

प्रस्तुत रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी प्रकार के नीतिगत निर्णय या परीक्षा परिणाम घटनाक्रम के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक सीबीएसई पोर्टल से तथ्यों की पुष्टि करें। किसी भी प्रकार के विवाद के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी तरह के दावे का उत्तरदायित्व स्वीकार नहीं करते हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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