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आधुनिक भारत के निर्माता पंडित जवाहरलाल नेहरू को नमन

आधुनिक भारत के निर्माता पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि पर देश ने उन्हें नमन किया। राहुल गांधी ने उनके योगदान को सराहा है।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि के अवसर पर बुधवार को पूरे देश ने उन्हें कृतज्ञता के साथ याद किया और उनके महान योगदान को श्रद्धांजलि अर्पित की। भारतीय राजनीति के इतिहास में एक युग का नाम पंडित नेहरू है, जिन्होंने स्वतंत्र भारत की नींव को अत्यंत मजबूती से रखा था। इस अवसर पर नई दिल्ली स्थित शांति वन में आयोजित विशेष कार्यक्रम में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने नेहरू जी की समाधि पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शांति वन पहुंचकर आधुनिक भारत के शिल्पकार को नमन किया। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक भावपूर्ण पोस्ट साझा करते हुए पंडित जवाहरलाल नेहरू के विजन को याद किया। उन्होंने कहा कि नेहरू जी का नेतृत्व और उनके द्वारा दिखाई गई दूरदर्शिता का मार्ग देश को हमेशा प्रेरित करता रहेगा और उनकी सोच ही आज के प्रगतिशील भारत का आधार बनी है।[1]

नेहरू का योगदान

राहुल गांधी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर हिंदी में लिखते हुए उनके महान व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला है। उन्होंने नेहरू जी के समर्पण को याद करते हुए कहा:

"देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। आधुनिक भारत की मजबूत नींव रखते हुए उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन एक समावेशी, सामंजस्यपूर्ण और प्रगतिशील राष्ट्र के निर्माण में समर्पित कर दिया।"

नेहरू जी न केवल एक राजनेता थे, बल्कि वे एक दूरदर्शी विचारक भी थे। उन्होंने न केवल देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं का निर्माण किया, बल्कि शिक्षा, विज्ञान और तकनीकी संस्थानों की स्थापना कर भारत को विश्व पटल पर एक नई पहचान दी। आज देश उनके द्वारा स्थापित किए गए आईआईटी, आईआईएम और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे संस्थानों के दम पर पूरे विश्व में अपनी धाक जमा रहा है।

संक्षिप्त जीवन परिचय

पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को इलाहाबाद में हुआ था। उनके पिता मोतीलाल नेहरू एक प्रतिष्ठित वकील थे। नेहरू जी की शिक्षा इंग्लैंड के हैरो स्कूल और ट्रिनिटी कॉलेज, कैंब्रिज में हुई, जहां से उन्होंने बैरिस्टर की डिग्री प्राप्त की। स्वदेश लौटने के बाद वे महात्मा गांधी के विचारों से अत्यंत प्रभावित हुए और आजादी के संघर्ष में कूद पड़े।

उन्होंने अपना पूरा जीवन भारत की आजादी और बाद में देश के नवनिर्माण के लिए झोंक दिया। वे वर्ष 1947 से 1964 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे। उनके द्वारा अपनाई गई गुटनिरपेक्ष नीति (Non-Aligned Movement) ने शीतयुद्ध के दौर में भारत को एक स्वतंत्र और तटस्थ पहचान दिलाई। नेहरू जी का बच्चों के प्रति विशेष प्रेम था, जिसके कारण उन्हें प्यार से 'चाचा नेहरू' कहकर पुकारा जाता था।

विचार और दर्शन

नेहरू जी का मानना था कि एक राष्ट्र की प्रगति केवल उसकी जीडीपी से नहीं, बल्कि उसके नागरिकों के वैज्ञानिक दृष्टिकोण से मापी जानी चाहिए। उन्होंने कहा था:

"हमें केवल अतीत की विरासत पर गर्व नहीं करना चाहिए, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए वैज्ञानिक सोच को अपनाना चाहिए ताकि राष्ट्र की प्रगति अबाध गति से चलती रहे।"

उनकी यह सोच आज भी भारतीय युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। उन्होंने समाजवाद, लोकतंत्र और पंथनिरपेक्षता को भारतीय संविधान का अभिन्न हिस्सा बनाने में बड़ी भूमिका निभाई। उनके इन्हीं सिद्धांतों के कारण भारत आज विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों के बावजूद एक सूत्र में बंधा हुआ है, जो दुनिया के लिए एक उदाहरण है।

निरंतर प्रेरणा

पंडित जवाहरलाल नेहरू के देहावसान के इतने वर्षों बाद भी उनके विचार प्रासंगिक हैं। आज की युवा पीढ़ी उनके कार्यों से सीख रही है कि कैसे सीमित संसाधनों के बीच भी एक राष्ट्र को वैश्विक महाशक्ति बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाती है। राहुल गांधी द्वारा की गई टिप्पणी यह दर्शाती है कि आने वाली पीढ़ियां भी उनके द्वारा दिखाए गए सत्य, अहिंसा और विकास के मार्ग पर चलना जारी रखेंगी।

अंत में, यह कहना अनुचित नहीं होगा कि देश का हर नागरिक उनकी सेवाओं का ऋणी है। पंडित जवाहरलाल नेहरू का व्यक्तित्व ऐसा था जिसने राजनीति के साथ-साथ साहित्य, इतिहास और कला के क्षेत्र में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी। उनका जीवन वास्तव में एक ऐसे राष्ट्र के निर्माण की कहानी है, जो विविधता में एकता के सिद्धांत को आत्मसात करता है और निरंतर विकास की ओर अग्रसर है।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief