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साइबर ठगी नेटवर्क का हुआ पर्दाफाश, तीन शातिर अपराधी गिरफ्तार

साइबर ठगी नेटवर्क का दिल्ली पुलिस ने पर्दाफाश किया है। चाय विक्रेता से 90 हजार की धोखाधड़ी के बाद हरियाणा और हिमाचल से तीन आरोपी गिरफ्तार।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

साइबर ठगी नेटवर्क के खिलाफ दिल्ली पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। अधिकारियों ने बुधवार को खुलासा किया कि उन्होंने एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो बैंक अकाउंट किट, सिम कार्ड और एटीएम क्रेडेंशियल्स की अवैध आपूर्ति के जरिए ठगी की रकम को इधर-उधर करने का काम कर रहे थे। इस ऑपरेशन में हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से तीन प्रमुख संचालकों को गिरफ्तार किया गया है, जो लंबे समय से सक्रिय थे।

यह कार्रवाई तब शुरू हुई जब दक्षिण पटेल नगर के एक चाय विक्रेता ने शिकायत दर्ज कराई कि उसे डिजिटल पेमेंट एप्लीकेशन का कर्मचारी बनकर आए एक व्यक्ति ने केवाईसी अपडेट करने के बहाने 90,000 रुपये की चपत लगा दी। इस घटना के बाद पुलिस ने गंभीरता से जांच शुरू की और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर इस साइबर ठगी नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने में सफलता प्राप्त की, जो संगठित रूप से काम कर रहा था।[1]

ठगी का तरीका

पुलिस के अनुसार, जालसाज ने बड़े ही शातिर तरीके से चाय की दुकान को अपना निशाना बनाया। आरोपी ने खुद को डिजिटल पेमेंट ऐप का प्रतिनिधि बताया और केवाईसी औपचारिकताएं पूरी करने के नाम पर पीड़ित का विश्वास जीत लिया। इस दौरान उसने पीड़ित के मोबाइल डिवाइस का अनधिकृत एक्सेस हासिल कर लिया और फिर बड़ी आसानी से उसके बैंक खाते से 90,000 रुपये की राशि निकाल ली।

इस गिरोह का काम करने का तरीका बेहद आधुनिक था। वे न केवल व्यक्तिगत ठगी करते थे, बल्कि उन्होंने ठगी की रकम को सुरक्षित रास्तों से निकालने के लिए एक पूरा तंत्र तैयार कर रखा था। पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे बाहरी राज्यों से सिम कार्ड और बैंक किट की व्यवस्था करते थे। एक जांच अधिकारी ने इस साइबर ठगी नेटवर्क की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए कहा:

"यह गिरोह अत्यंत संगठित था। वे न केवल लोगों को फोन पर झांसा देते थे, बल्कि व्यक्तिगत रूप से दुकानदारों के पास जाकर डिजिटल ऐप्स में छेड़छाड़ कर उनके खाते खाली कर देते थे। गिरोह का मुख्य उद्देश्य ठगी गई रकम को तुरंत अन्य खातों में स्थानांतरित करना होता था ताकि वे पुलिस की पकड़ से बच सकें।"

पुलिस की कार्रवाई

पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और मुखबिरों की सूचना के आधार पर हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में छापेमारी की। इस दौरान तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनसे कई संदिग्ध बैंक किट और सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। यह बरामदगी साबित करती है कि यह साइबर ठगी नेटवर्क केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं था, बल्कि यह बड़े पैमाने पर लोगों को आर्थिक नुकसान पहुँचाने की योजना बना रहा था।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों से फिलहाल पूछताछ चल रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक देश भर में कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि इस तरह के अपराधों में शामिल लोग अक्सर फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करके बैंक खाते खुलवाते हैं। पुलिस का मानना है कि इन गिरफ्तारियों से ठगी के इस बड़े तंत्र को तोड़ने में मदद मिलेगी।

सावधानी की अपील

आए दिन सामने आ रही इस तरह की घटनाएं आम जनता के लिए एक बड़ी चेतावनी हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपने मोबाइल का ओटीपी या बैंक विवरण साझा न करें। डिजिटल पेमेंट ऐप की केवाईसी अपडेट करने के नाम पर आने वाले फोन या संदिग्ध व्यक्तियों से हमेशा सतर्क रहें और किसी भी तरह की शंका होने पर तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित करें।

आम जनता को यह समझना होगा कि कोई भी आधिकारिक प्रतिनिधि कभी भी बिना किसी अधिकृत प्रक्रिया के आपसे व्यक्तिगत जानकारी या मोबाइल का एक्सेस नहीं मांगता है। साइबर अपराधियों का मुख्य हथियार ही पीड़ित का भरोसा जीतना है। सतर्कता ही इस तरह के अपराधों से बचने का एकमात्र रास्ता है। पुलिस ने कहा है कि ऐसी गतिविधियों के खिलाफ उनका अभियान आगे भी जारी रहेगा और वे साइबर अपराधियों को बख्शेंगे नहीं।

डिस्क्लेमर:

यह रिपोर्ट पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी और मीडिया रिपोर्ट्स के संकलन पर आधारित है। इसे केवल जनहित एवं सूचनात्मक उद्देश्य के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक द्वारा जारी किया गया है। किसी भी संदर्भ में विभागीय अथवा आधिकारिक अधिसूचना को ही अंतिम माना जाए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी प्रकार के व्यक्तिगत या व्यावसायिक निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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