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साठ साल बाद शहीद की पत्नी को सहायता मिली: लौटी नई उम्मीद

साठ साल के लंबे संघर्ष के बाद शहीद की पत्नी को सहायता मिली है। सरकार के विशेष अभियान से सैन्य परिवार को बड़ी राहत मिली है।

By अजय त्यागी
1 min read
शहीद की पत्नी को सहायता मिली

शहीद की पत्नी को सहायता मिली

भारतीय सेना और सैनिक कल्याण विभाग के सराहनीय प्रयासों से 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में शहीद हुए एक जवान की पत्नी को छह दशकों के लंबे इंतजार के बाद बड़ी आर्थिक राहत मिली है। यह मामला प्रशासनिक संवेदनशीलता का एक अनूठा उदाहरण बनकर सामने आया है। शहीद की पत्नी को सहायता के रूप में पहली किश्त प्राप्त होने से परिवार में एक नई उम्मीद का संचार हुआ है, जो इतने वर्षों से लंबित था।

बागेश्वर जिले की निवासी देबुली देवी को 28.45 लाख रुपये की राशि उनके बैंक खाते में प्राप्त हुई है। उनके पति मदन सिंह ने 7 सितंबर 1965 को युद्ध के दौरान देश की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। इतने वर्षों तक वे केवल उदारवादी पारिवारिक पेंशन पर निर्भर थीं, लेकिन अब शहीद की पत्नी को सहायता मिलने से उनके जीवन में एक सकारात्मक बदलाव की शुरुआत हुई है।[1]

लंबी कानूनी प्रक्रिया

यह सफलता केंद्र सरकार द्वारा चलाए गए उस विशेष अभियान का परिणाम है, जिसका उद्देश्य युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के लंबित मामलों की समीक्षा करना और उनका त्वरित समाधान निकालना है। भारतीय सेना, जिला सैनिक कल्याण कार्यालय, और प्रयागराज स्थित पीसीडीए कार्यालय के समन्वय से यह जटिल प्रक्रिया संपन्न हो सकी। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल वेद प्रकाश जोशी की टीम ने इस मामले में अहम भूमिका निभाई।

देबुली देवी ने बताया कि उनके पति की शहादत के बाद से वे संघर्ष कर रही थीं, लेकिन अधिकारियों की तत्परता ने दशकों पुरानी फाइलों को फिर से जीवित कर दिया। उन्होंने कहा:

"मेरे पति ने युद्ध के दौरान देश के लिए अपनी जान दी थी। इतने वर्षों तक केवल पेंशन ही सहारा थी। अब सरकार के इस विशेष प्रयास से शहीद की पत्नी को सहायता मिलना मेरे लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है, जिसने मेरे बुढ़ापे को एक नया संबल दिया है।"

अन्य किश्त बाकी

अधिकारियों के अनुसार, अभी भी लगभग इतनी ही राशि की दूसरी किश्त मिलना शेष है। इसके लिए एनपीएसी और देय प्रमाण पत्रों से संबंधित आवश्यक दस्तावेजों को कोषागार कार्यालय और जिला सैनिक कल्याण कार्यालय के माध्यम से प्रयागराज भेजने की प्रक्रिया जारी है। जैसे ही यह औपचारिकता पूरी हो जाएगी, शेष राशि भी सीधे देबुली देवी के खाते में स्थानांतरित कर दी जाएगी।

दूरस्थ पहाड़ी गांवों में रहने वाले पूर्व सैनिकों के परिवार अक्सर सरकारी प्रक्रियाओं और कागजी औपचारिकताओं में फंस जाते हैं, जिससे उन्हें उनका हक समय पर नहीं मिल पाता। ऐसे मामलों में सक्रियता दिखाते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने न केवल संवेदनशीलता का परिचय दिया है, बल्कि सेना की उस परंपरा को भी कायम रखा है जिसमें वे शहीद परिवारों के साथ हमेशा मजबूती से खड़े रहते हैं।

भविष्य की उम्मीद

देबुली देवी ने जिला सैनिक कल्याण अधिकारी और भारतीय सेना के पूरे स्टाफ का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य के लिए भी आशा जताई है। उन्होंने कहा कि यह प्रयास हजारों उन सैन्य परिवारों के लिए उम्मीद की एक किरण है जिनके मामले अभी भी विभिन्न कार्यालयों में धूल फांक रहे हैं। प्रशासन की यह पहल निश्चित रूप से शहीदों के परिवारों के प्रति सम्मान और उनके मान-सम्मान को और अधिक मजबूत करती है।

इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यदि सरकारी तंत्र और सेना का समन्वय सही हो, तो जटिल से जटिल मामले भी सुलझाए जा सकते हैं। देबुली देवी का जीवन इस बात का प्रमाण है कि भले ही न्याय में साठ साल लग गए हों, लेकिन राष्ट्र का सम्मान सर्वोपरि है। शहीद की पत्नी को सहायता मिलने से न केवल उनके परिवार को राहत मिली है, बल्कि समूचे क्षेत्र में शासन की इस पहल की सराहना हो रही है।

डिस्क्लेमर:

यह रिपोर्ट आधिकारिक प्रशासनिक जानकारी और मीडिया रिपोर्ट्स के संकलन पर आधारित है। इसे केवल जनहित एवं सूचनात्मक उद्देश्य के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक द्वारा जारी किया गया है। किसी भी संदर्भ में विभागीय अथवा आधिकारिक अधिसूचना को ही अंतिम माना जाए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी प्रकार के व्यक्तिगत या व्यावसायिक निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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