गेम जोन अग्निकांड: न्याय के इंतजार में पीड़ित, आरोपी हुए रिहा
गेम जोन अग्निकांड में अभी तक न्याय की राह ताक रहे हैं पीड़ित परिवार। सभी आरोपी जमानत पर बाहर, सुनवाई की धीमी रफ्तार ने खड़े किए कई गंभीर सवाल।
राजकोट गेम जोन अग्निकांड - File Photo
गेम जोन अग्निकांड में न्याय की प्रतीक्षा में दो साल बीत चुके हैं, लेकिन पीड़ित परिवारों का दर्द कम होने का नाम नहीं ले रहा है। 25 मई 2024 को हुई उस भयावह घटना में 27 लोग जिंदा जल गए थे, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। राजकोट शहर के नाना मवा रोड स्थित गेम जोन में लगी आग इतनी भीषण थी कि कई शवों की पहचान करना भी संभव नहीं था और डीएनए टेस्ट के बाद ही उन्हें परिजनों को सौंपा जा सका।
दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि आज भी गेम जोन अग्निकांड न्याय की राह में भटक रहा है। घटना के तुरंत बाद सरकारी मशीनरी ने जो तत्परता दिखाई थी, वह अब अदालत की फाइलों में कहीं खो गई है। सभी 15 जीवित आरोपी जमानत पर बाहर घूम रहे हैं, जबकि पीड़ित परिवार आज भी अपने अपनों को खोने के गम और इंसाफ के इंतजार में दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। सुनवाई की धीमी गति ने कई सवाल खड़े किए हैं।[1]
धीमी न्यायिक प्रक्रिया
घटना के बाद सरकार ने त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया था और तेजी से चार्जशीट भी दाखिल कर दी गई थी। लेकिन अब अदालती कार्यवाही की सुस्त रफ्तार पर सवाल उठ रहे हैं। कानूनी जानकारों का मानना है कि न्यायाधीशों के बार-बार तबादले और आरोपियों की ओर से ली जाने वाली तारीखों के कारण केस आगे नहीं बढ़ पा रहा है। गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया भी अत्यंत धीमी गति से चल रही है।
पीड़ित परिवार के वकील नरेंद्रसिंह जडेजा ने चिंता जताते हुए कहा कि गवाहों पर दबाव या प्रभाव डालने की आशंका बनी हुई है। उन्होंने बताया:
"निजी गवाहों के बयान सबसे पहले दर्ज किए जाने चाहिए ताकि उन्हें डराया-धमकाया न जा सके। सरकार ने हाई कोर्ट में त्वरित सुनवाई की मांग की थी, लेकिन धरातल पर अब भी नियमित सुनवाई का अभाव है। गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिए।"
आरोपियों की फेहरिस्त
पुलिस ने इस मामले में 16 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था, जिसमें गेम जोन के मालिक से लेकर नगर निगम के आला अधिकारी और फायर स्टेशन ऑफिसर तक शामिल थे। हालांकि, इनमें से एक आरोपी प्रकाशचंद हिरन की मृत्यु घटनास्थल पर ही हो गई थी। शेष 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन वर्तमान में सभी जमानत पर जेल से बाहर हैं। यह स्थिति पीड़ितों के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है।
पीड़ित तुषार, जिन्होंने इस हादसे में अपना भाई खोया, ने आरोप लगाया कि सरकार ने 14 मांगें स्वीकार करने का वादा किया था, लेकिन एक भी पूरी नहीं हुई। उन्होंने कहा:
"हमारा घर खाली हो गया है। मैंने पहले अपने पिता को खोया और अब मेरा भाई भी इस हादसे की भेंट चढ़ गया। सभी आरोपी खुलेआम बाहर घूम रहे हैं, जबकि गवाहों को डराने का सिलसिला जारी है। हम बस इंसाफ चाहते हैं।"
सुनवाई की चुनौतियां
कानूनी सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान में पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। एक डॉक्टर द्वारा वीडियो कॉल के जरिए पेश होने और कार्यवाही में अनुपस्थिति के कारण जज ने नाराजगी भी जताई थी। 15 अलग-अलग आरोपियों के वकील बार-बार स्थगन मांगते हैं, जिससे केस की कार्यवाही और अधिक जटिल और लंबी हो गई है। बार बार का यह स्थगन गेम जोन अग्निकांड में न्याय मिलने की प्रक्रिया को और कठिन बनाता है।
वहीं, दूसरे वकील सुरेश फल्दू का मानना है कि अन्य बड़ी दुर्घटनाओं की तुलना में इस मामले में फिर भी कुछ कार्रवाई हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि शेष गवाहों के बयान दर्ज होते ही मामला गति पकड़ेगा। उनका तर्क है कि यह पूरा मामला सबूतों पर आधारित है, इसलिए एक बार जब साक्ष्यों का मिलान हो जाएगा, तो दोषी बच नहीं पाएंगे। फिर भी, न्याय में हो रही देरी जनता के बीच एक बड़ा प्रश्नचिन्ह है।
पीड़ितों का बलिदान
इस दुखद घटना में जान गंवाने वालों में 12 साल के धर्मराजसिंह से लेकर 45 साल के जयंत घोरेचा तक शामिल थे। 27 जिंदगियों का असमय अंत केवल एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक चूक का नतीजा था। आज भी पीड़ित परिवार सरकारी फाइलों के बीच न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गेम जोन अग्निकांड में न्याय का इंतजार कर रहे ये परिवार चाहते हैं कि दोषियों को जल्द से जल्द कड़ी सजा मिले।
अंत में, यह अनिवार्य है कि सरकार और न्यायपालिका मिलकर इस मामले में त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करें। गवाहों की सुरक्षा, जजों की स्थिरता और नियमित सुनवाई ही एकमात्र रास्ता है जिससे पीड़ितों को राहत मिल सकती है। गेम जोन अग्निकांड न्याय के बिना अधूरा रहेगा। समाज को उम्मीद है कि कानून अपनी निष्पक्षता साबित करेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कठोर नजीर पेश करेगा।
डिस्क्लेमर:
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