प्रोफेसर अमीनुद्दीन काजी की श्रद्धांजलि सभा में उमड़ा शहर
प्रख्यात शिक्षक प्रोफेसर अमीनुद्दीन काजी की श्रद्धांजलि सभा में नम आंखों से शहर ने उन्हें याद किया और शिक्षा जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया।
प्रोफेसर अमीनुद्दीन काजी की श्रद्धांजलि सभा
प्रोफेसर अमीनुद्दीन काजी की श्रद्धांजलि सभा में आज पूरे शहर का शिक्षा जगत और नागरिक समाज एक साथ उमड़ पड़ा। राजकीय डूंगर महाविद्यालय के प्रताप सभागार में आयोजित इस भावपूर्ण कार्यक्रम में हर किसी की आंखें नम थीं। प्रोफेसर अमीनुद्दीन काजी केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि तीन पीढ़ियों के वैचारिक मार्गदर्शक थे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन शिक्षा और मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पित कर दिया था।
सभा में सादगी से सजी उनकी तस्वीर के समक्ष उपस्थित लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित कर मौन धारण किया। इस दौरान वातावरण में एक अजीब सी आत्मीयता और गम्भीरता थी। शिक्षकों, शोधार्थियों, राजनीतिक प्रतिनिधियों और शहर के गणमान्य नागरिकों की बड़ी संख्या में उपस्थिति यह दर्शा रही थी कि उनके व्यक्तित्व का प्रभाव कितना व्यापक और गहरा था।
वैचारिक संस्कार केंद्र
कॉलेज के प्राचार्य प्रो. राजेंद्र पुरोहित ने प्रोफेसर काजी को याद करते हुए कहा, “प्रोफेसर अमीनुद्दीन काजी हमारे संस्थान की वह जीवित परंपरा थे जिन्होंने इस महाविद्यालय को केवल शिक्षण संस्था नहीं, बल्कि वैचारिक संस्कार केंद्र बनाने में बड़ी भूमिका निभाई।” उनके जाने से एक ऐसा अध्याय समाप्त हुआ है जिसकी छाया आने वाली पीढ़ियों तक बनी रहेगी।
वहीं, पूर्व मंत्री प्रो. बी.डी. कल्ला ने शिक्षा और सामाजिक न्याय के प्रति उनके समर्पण को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “वे उन शिक्षकों में थे जिन्होंने इतिहास को केवल राजाओं और युद्धों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि साधारण जन के संघर्षों को कक्षा के केंद्र में लाया।” प्रोफेसर काजी के लिए शिक्षा ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत थी।
साधना और नैतिकता
प्रो. प्रभा भार्गव ने शोध की नैतिकता पर बात करते हुए उन्हें एक जीवंत उदाहरण बताया। उन्होंने कहा, “आज विश्वविद्यालयों में शोध की चर्चा बहुत होती है, लेकिन शोध की नैतिकता का जीवंत उदाहरण यदि किसी में देखा तो वह प्रो. अमीनुद्दीन काजी थे।” उन्होंने विद्यार्थियों को केवल उद्धरण नहीं, बल्कि बौद्धिक ईमानदारी का पाठ पढ़ाया।
वरिष्ठ साहित्यकार राजेंद्र जोशी ने उनके व्यक्तित्व को दुर्लभ पुस्तकालय जैसा बताया। उन्होंने कहा, “वे इतिहास पढ़ाते थे, लेकिन उनकी भाषा में साहित्य की करुणा और मनुष्यता की गंध थी।” उनकी याद में प्रतिवर्ष इतिहास विषय में एक छात्र को सम्मान देने की घोषणा भी की गई।
मानवीय प्रतिबद्धता की मिसाल
प्रोफेसर अमीनुद्दीन काजी की श्रद्धांजलि सभा में पूर्व मंत्री गोविंद मेघवाल ने उनके सामाजिक योगदान को याद किया और बताया कि उन्होंने कभी छात्र की पृष्ठभूमि नहीं देखी। वहीं, पश्चिम विधायक जेठानंद व्यास ने उन्हें भारतीय परंपरा और सांस्कृतिक चेतना का सच्चा अध्येता बताया। शिक्षाविद् प्रो. कांतिलाल माथुर ने विशेष रूप से छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करने के उनके प्रयासों को एक बड़े आंदोलन के समान माना।
कार्यक्रम के समापन पर शहर के शिक्षण संस्थानों द्वारा "प्रो. अमीनुद्दीन काजी स्मृति छात्रवृत्ति" शुरू करने की घोषणा की गई। श्रद्धांजलि सभा का समापन उनके ही प्रिय वाक्य “ज्ञान का अर्थ केवल जानना नहीं, मनुष्य होना है” के सामूहिक उच्चारण से हुआ। सच तो यह है कि प्रोफेसर अमीनुद्दीन काजी की श्रद्धांजलि केवल एक औपचारिक सभा नहीं, बल्कि मानवीय प्रतिबद्धता का एक उत्सव बन गई।
अस्वीकरण
यह लेख एक श्रद्धांजलि रिपोर्ट है जो स्थानीय स्तर पर आयोजित कार्यक्रम के संस्मरणों पर आधारित है। इसमें किसी प्रकार का वित्तीय, चिकित्सीय या कानूनी जोखिम निहित नहीं है। लेखक, प्रकाशक एवं संपादक साझा किए गए विचारों की सत्यनिष्ठा के प्रति सजग हैं।