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सीमा पार से आए अवैध घुसपैठियों की स्वदेश वापसी का दौर शुरू

सीमा पार से आए अवैध घुसपैठियों की स्वदेश वापसी शुरू। हकीमपुर चेकपोस्ट पर सैकड़ों लोगों ने बीएसएफ के समक्ष आत्मसमर्पण किया है।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg हकीमपुर सीमा पर एकत्रित घुसपैठिये

हकीमपुर सीमा पर एकत्रित घुसपैठिये

सीमा पार से आए अवैध घुसपैठियों की स्वदेश वापसी को लेकर राज्य की सीमाओं पर हलचल तेज हो गई है। राज्य में राजनीतिक परिवर्तन और नई सरकार के गठन के बाद से ही सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए अभूतपूर्व कदम उठाए जा रहे हैं। प्रशासन ने राज्य में रह रहे उन लोगों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो अवैध रूप से सीमा पार कर भारत आए थे।

उत्तर 24 परगना के स्वरूपनगर थाना अंतर्गत हकीमपुर चेकपोस्ट के पास पिछले कुछ दिनों में एक असाधारण स्थिति देखने को मिल रही है। कानूनी जटिलताओं और सख्त प्रशासनिक कार्रवाई के डर से, पिछले कुछ दिनों में सैकड़ों अवैध घुसपैठियों ने भारतीय सीमा सुरक्षा बल (BSF) के सामने आत्मसमर्पण करना शुरू कर दिया है।[1]

आत्मसमर्पण और कार्रवाई

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सोमवार, 25 मई से ही हकीमपुर सीमा पर भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है। 27 मई की तड़के 3 बजे तक बीएसएफ ने लगभग 250 घुसपैठियों को हिरासत में लिया है और उन्हें तीन अस्थायी होल्डिंग सेंटरों में स्थानांतरित कर दिया है। इसके बावजूद, अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वाले नागरिकों का जत्था अभी भी सीमा पर एकत्रित हो रहा है।

आत्मसमर्पण करने वाले व्यक्तियों ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि सीमा पार घुसपैठ के पीछे दलालों का एक व्यापक नेटवर्क सक्रिय है। इन लोगों ने बताया कि बिना किसी वैध दस्तावेजों के अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने के लिए उन्हें दलालों को भारी रकम चुकानी पड़ी। किसी ने 5,000 तो किसी ने 10,000 रुपये तक का भुगतान किया है, जो दोनों ओर सक्रिय दलालों की मिलीभगत को दर्शाता है।

जीवन और संघर्ष

भारत में प्रवेश के बाद ये लोग कोलकाता सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में फैल गए थे, जहां उन्होंने राजमिस्त्री या दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम किया। इनमें से कुछ ने फर्जी तरीके से आधार और मतदाता पहचान पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज भी प्राप्त कर लिए थे। कई लोगों ने यह भी दावा किया कि उन्हें राज्य सरकार की 'लख्मिर भंडार' योजना का लाभ भी मिला है।

कुछ लोग जो 30-35 वर्षों से यहां रह रहे थे, वे भी अब वापस जाने का निर्णय ले चुके हैं। उनका कहना है कि कानूनी कार्रवाई के डर से घर के मालिक अब उन्हें किराए पर मकान नहीं दे रहे हैं और रातों-रात घर खाली करने के आदेश के बाद वे बेघर हो गए हैं। बीएसएफ और स्थानीय पुलिस फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए है और उच्च अधिकारियों के बीच इन लोगों को व्यवस्थित तरीके से वापस भेजने की चर्चा जारी है। सीमा पार से आए अवैध घुसपैठियों की स्वदेश वापसी का कोई स्थाई समाधान होने की भी उम्मीद है।  

मानवीय और प्रशासनिक पक्ष

मोंजिरुल शेख, रिंपा बीबी और बच्चू मुंशी जैसे कई लोग, जो वर्षों से यहां रह रहे थे, अब अपनी जड़ों की ओर लौटने को मजबूर हैं। रिंपा बीबी कहती हैं कि उन्हें बेहतर जीवन की उम्मीद में दलाल के माध्यम से आना पड़ा, लेकिन अब सरकार के कड़े रुख के बाद उनके पास लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। मोंजिरुल शेख ने बताया कि कैसे उन्होंने लंबे संघर्ष के बाद दस्तावेज जुटाए थे, लेकिन अब सब कुछ निरस्त होने की प्रक्रिया में है।

अख्तरुल मंडल और मोहम्मद लाल मियाँ जैसे लोग, जो कुछ साल पहले ही आए थे, ने भी स्वीकार किया कि वे यहां के नागरिक नहीं हैं। वे सरकार के निर्णय को स्वीकार कर बिना किसी सवाल के स्वदेश लौटने को तैयार हैं। यह स्पष्ट है कि सीमा पार से आए अवैध घुसपैठियों की स्वदेश वापसी अब एक ऐसी वास्तविकता बन चुकी है, जिसे प्रशासन प्राथमिकता के साथ पूरा कर रहा है।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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