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विश्व रक्त कैंसर दिवस: लक्षणों और उपचार की जानकारी

विश्व रक्त कैंसर दिवस पर जानें ब्लड कैंसर के लक्षण और आधुनिक उपचार। कार-टी सेल थेरेपी और बीएमटी से मिल रही है मरीजों को नई उम्मीद।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

विश्व रक्त कैंसर दिवस के अवसर पर इस गंभीर बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाना अत्यंत आवश्यक है। 28 मई को मनाए जाने वाले इस दिवस का उद्देश्य समाज को ब्लड कैंसर के बढ़ते खतरों और उनसे लड़ने के आधुनिक तरीकों से परिचित कराना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की कैंसर एजेंसी के अनुसार, ब्लड कैंसर कुल कैंसर मामलों का लगभग 2.4 प्रतिशत है। वैश्विक स्तर पर प्रतिवर्ष 4.8 लाख से अधिक नए मरीज सामने आते हैं, जबकि भारत में भी इसके मामलों में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों में होने वाले कैंसर में ब्लड कैंसर का अनुपात सबसे अधिक पाया जाता है। हालांकि, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में आई नई तकनीकों ने ब्लड कैंसर के उपचार को लेकर उम्मीदें काफी बढ़ा दी हैं। आज कार-टी सेल थेरेपी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी अत्याधुनिक चिकित्सा पद्धतियां मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही हैं। इन तकनीकों ने गंभीर रक्त रोगों से जूझ रहे लोगों के लिए एक प्रभावी विकल्प तैयार किया है।[1]

अत्याधुनिक उपचार की तकनीक

वरिष्ठ रक्त कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रकाश सिंह शेखावत के अनुसार, विश्व रक्त कैंसर दिवस के संदर्भ में आधुनिक चिकित्सा की नई तकनीकें नई उम्मीद बनकर उभरी हैं। उन्होंने बताया, "कार-टी सेल थेरेपी में मरीज की प्रतिरक्षा कोशिकाओं को विशेष तकनीक से कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर नष्ट करने के लिए तैयार किया जाता है।" वहीं, बोन मैरो ट्रांसप्लांट के माध्यम से रोगग्रस्त बोन मैरो को स्वस्थ स्टेम सेल्स से प्रतिस्थापित किया जाता है, जो जटिल स्थितियों में अत्यंत कारगर है।

यह उपचार ल्यूकीमिया, लिम्फोमा, मल्टीपल मायलोमा, थैलेसीमिया और एप्लास्टिक एनीमिया जैसे गंभीर रोगों में भी बेहद उपयोगी साबित हो रहा है। चिकित्सकों का स्पष्ट मानना है कि यदि सही समय पर इन तकनीकों का उपयोग किया जाए, तो मरीज के ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। आधुनिक उपचार पद्धतियों के निरंतर शोध ने इस बीमारी को लाइलाज की श्रेणी से बाहर निकालने में बड़ी भूमिका निभाई है।

कैंसर के मुख्य प्रकार

चिकित्सकों के अनुसार ब्लड कैंसर को मुख्य रूप से तीन प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है। पहला ल्यूकेमिया, जो सीधे रक्त और बोन मैरो को प्रभावित करता है। दूसरा लिम्फोमा है, जो लसीका तंत्र को अपना निशाना बनाता है। तीसरा मायलोमा होता है, जो शरीर की प्लाज्मा कोशिकाओं में पनपने वाला कैंसर है। इन तीनों प्रकारों की प्रकृति और उपचार की प्रक्रिया भिन्न होती है।

इन प्रकारों को समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि इनका शुरुआती निदान ही उपचार की दिशा तय करता है। जब कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं, तो शरीर के विभिन्न अंग प्रभावित होने लगते हैं। मेडिकल साइंस ने इन तीनों श्रेणियों के लिए अलग-अलग प्रोटोकॉल विकसित किए हैं, जिससे मरीजों को लक्षित उपचार मिल सके और स्वस्थ कोशिकाओं को कम से कम नुकसान हो।

पहचानें शुरुआती संकेत

बाल रक्त एवं कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. शिवानी माथुर का कहना है कि बच्चों में होने वाले कैंसर का शुरुआती स्तर पर उपचार करना उन्हें पूर्ण रूप से स्वस्थ बना सकता है। उन्होंने बताया, "बार-बार बुखार का आना, शरीर में कमजोरी आना, खून की कमी होना, हाथ-पांव में कमजोरी महसूस होना, यह सभी लक्षण सामान्य नजर आते हैं।" लेकिन अगर उपचार के बाद भी यह लक्षण ठीक न हों, तो यह रक्त में कैंसर सेल की शुरुआत का संकेत हो सकते हैं।

अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे इन संकेतों को नजरअंदाज न करें और समय पर रक्त परीक्षण करवाएं। समय पर पहचान ही इस बीमारी से जंग जीतने का सबसे बड़ा हथियार है। जागरूकता और सही चिकित्सा सलाह से विश्व रक्त कैंसर दिवस के इस संदेश को अपनाकर हम न केवल जीवन बचा सकते हैं, बल्कि एक कैंसर मुक्त समाज की ओर कदम भी बढ़ा सकते हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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