हनीट्रैप में एआई तकनीक का खतरनाक इस्तेमाल हुआ उजागर
हनीट्रैप में एआई तकनीक का खतरनाक इस्तेमाल कर बिजनेसमैन से ठगे 90 लाख। आरोपी महिला गिरफ्तार, गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
हनीट्रैप में एआई तकनीक का खतरनाक इस्तेमाल करने का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। राजधानी में एक व्यवसायी को हनीट्रैप के जाल में फंसाकर 90 लाख रुपये की बड़ी रकम ऐंठ ली गई। महेश नगर थाना पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले का खुलासा करते हुए मुख्य आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इस ठगी के पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय है।
आरोपी महिला ने व्यवसायी के एआई प्रोजेक्ट पर कब्जा करने की नीयत से उसे अपना निशाना बनाया। इस मामले में एआई के जरिए आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो बनाकर ब्लैकमेलिंग का खेल खेला गया। पुलिस ने आरोपी महिला दिशा बाबला को जोधपुर से हिरासत में लेने के बाद उसे जयपुर लाकर गिरफ्तार किया है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में कई और बड़े राज सामने आ सकते हैं।[1]
डीपफेक वीडियो से ब्लैकमेल
आरोपी महिला ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स का इस्तेमाल करते हुए पीड़ित की आपत्तिजनक तस्वीरें और डीपफेक वीडियो तैयार किए थे। इन वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर पीड़ित पर मोटी रकम देने का लगातार दबाव बनाया गया। यह मामला स्पष्ट करता है कि हनीट्रैप में एआई तकनीक का खतरनाक इस्तेमाल अब निजी सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन गया है।
पीड़ित ने अपनी रिपोर्ट में पुलिस को बताया कि महिला द्वारा उसे डरा-धमकाकर अब तक 90 लाख रुपये की मोटी रकम वसूली जा चुकी है। इतना ही नहीं, आरोपी और उसके साथियों द्वारा पीड़ित से 50 लाख रुपये और देने की मांग की गई। राशि न देने पर उसे बदनाम करने और दुष्कर्म जैसे गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी दी गई, जिससे पीड़ित अत्यधिक दबाव में था।
गिरोह की व्यापक जांच
महेश नगर थानाधिकारी सुरेश यादव ने बताया कि आरोपी महिला से पूछताछ के आधार पर गिरोह के अन्य सहयोगियों की पहचान की जा रही है। पुलिस को संदेह है कि इस गिरोह ने कई अन्य लोगों को भी अपना शिकार बनाया होगा। इस स्तर की ठगी को देखते हुए पुलिस विभाग अब साइबर विशेषज्ञों की मदद लेकर इस पूरे नेटवर्क को तोड़ने की रणनीति पर काम कर रहा है।
जांच में यह भी सामने आया है कि हनीट्रैप में एआई तकनीक का खतरनाक इस्तेमाल केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है। पुलिस प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या ऑनलाइन मांग के प्रति सतर्क रहें। किसी भी प्रकार की धमकी मिलने पर तुरंत पुलिस से संपर्क करें और अपनी निजी डिजिटल सुरक्षा को प्राथमिकता दें।
डिजिटल सुरक्षा है जरूरी
एआई के बढ़ते प्रयोगों के दौर में अब साइबर अपराधियों के तौर-तरीके भी बदल गए हैं। व्यवसायी के साथ हुई इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि हनीट्रैप में एआई तकनीक का खतरनाक इस्तेमाल किसी की भी प्रतिष्ठा को तार-तार कर सकता है। पुलिस इस मामले में बहुत सावधानी से आगे बढ़ रही है ताकि गिरोह का कोई भी सदस्य कानून की पकड़ से बाहर न रह जाए।
आने वाले दिनों में पुलिस इस गिरोह के वित्तीय लेनदेन और तकनीकी नेटवर्क का पूरा खाका तैयार करेगी। पीड़ित के बयान के आधार पर अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली धमकियों से डरने के बजाय समय पर कानूनी मदद लेना ही इस प्रकार के हनीट्रैप मामलों का एकमात्र समाधान है, जिससे भविष्य में ऐसी ठगी की घटनाओं को रोका जा सके।