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प्रादेशिक

शतायु मतदाताओं का लोकतंत्र में उत्साह देख अधिकारी भी हुए नतमस्तक

शतायु मतदाताओं का लोकतंत्र में उत्साह देख हर कोई दंग रह गया। 100 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों ने मतदान कर युवाओं को नई सीख दी है।

By अजय त्यागी
1 min read
शतायु मतदाताओं का लोकतंत्र में उत्साह

शतायु मतदाताओं का लोकतंत्र में उत्साह

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शतायु मतदाताओं का लोकतंत्र में उत्साह ने हाल ही में संपन्न हुए पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव को एक नई ऊंचाई प्रदान की है। हिमाचल प्रदेश में लोकतंत्र की जड़ें उस समय और अधिक मजबूत दिखाई दीं, जब 100 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए मतदान केंद्रों तक पहुंचे। इन वरिष्ठ नागरिकों ने न केवल अपनी जिम्मेदारी निभाई, बल्कि यह भी साबित किया कि लोकतंत्र के महापर्व में उम्र कभी बाधा नहीं बनती। हमीरपुर जिले में 116 वर्षीय खड़कू राम ने मतदान कर युवाओं को जागरूक होने का संदेश दिया।

खड़कू राम का मतदान करना केवल एक वोट नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा है। भोरंज के एसडीएम शशिपाल शर्मा ने स्वयं मतदान केंद्र पहुंचकर उनके हौसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि खड़कू राम जैसे वरिष्ठ नागरिकों का जज्बा समाज के लिए एक अनूठी मिसाल है। खड़कू राम के साथ-साथ राज्य के अन्य हिस्सों से भी ऐसी कई तस्वीरें सामने आईं, जहां शतायु बुजुर्गों ने लंबी उम्र और शारीरिक चुनौतियों के बावजूद अपने कर्तव्य का पालन किया।[1]

यहाँ भी रही भागीदारी 

शतायु मतदाताओं का लोकतंत्र में उत्साह केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। बिलासपुर और झंडूता जैसी पंचायतों में 105 से 108 वर्ष के बुजुर्गों ने बूथ तक पहुंचकर लोकतंत्र के प्रति अपनी निष्ठा दिखाई। इनमें मनसा देवी, रूपा देवी और संतराम जैसे वरिष्ठ नाम शामिल हैं, जिन्होंने इस बात को सिद्ध किया कि मतदान करना हर नागरिक का परम धर्म है। इनके उत्साह को देखकर वहां तैनात अधिकारी और अन्य मतदाता भी काफी प्रभावित हुए और मतदान प्रक्रिया को और अधिक ऊर्जा मिली।

अक्सर देखा जाता है कि युवा वर्ग मतदान के प्रति उदासीन रहता है, लेकिन इन बुजुर्गों ने अपनी सक्रिय भागीदारी से यह स्पष्ट कर दिया कि देश का भविष्य चुनने में हर एक वोट की कीमत होती है। उनकी मतदान करने की जागरूकता ने मतदान केंद्र के पूरे माहौल को सकारात्मकता से भर दिया। यह नजारा न केवल भावुक करने वाला था, बल्कि यह लोकतंत्र की सफलता की एक बड़ी कहानी भी बयां कर रहा था।

कर्तव्यनिष्ठा की अनूठी मिसाल

चुनाव के दौरान न केवल शतायु मतदाता, बल्कि अस्वस्थ बुजुर्गों ने भी अद्भुत जज्बा दिखाया। जुखाला क्षेत्र में एक वरिष्ठ नागरिक बीमारी के बावजूद ऑक्सीजन सिलिंडर के साथ मतदान केंद्र पहुंचे, जिसे देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति का मन भर आया। शतायु मतदाताओं का लोकतंत्र में उत्साह के साथ-साथ दिव्यांग मतदाताओं का जोश भी चर्चा का विषय रहा। बिझड़ी और ताल पंचायत में दिव्यांगों ने अपनी शारीरिक सीमाओं को दरकिनार करते हुए वोट डाले और मतदान को सफल बनाया।

इस पूरे चुनाव प्रक्रिया को देखते हुए जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) एवं उपायुक्त राहुल कुमार ने इन सभी मतदाताओं की सराहना की है। उन्होंने कहा कि ऐसे नागरिकों की भागीदारी ही लोकतंत्र को सशक्त बनाती है। वहीं, आगामी कार्यक्रमों के तहत केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा भी 30 मई को विजयपुर में अपने परिवार सहित मतदान करेंगे, जो स्थानीय स्तर पर चुनावी माहौल को और अधिक महत्व दे रहा है।

लोकतंत्र की बढ़ती मजबूती

चुनाव के इन चरणों में देखने को मिला कि किस तरह समाज के हर वर्ग ने अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। शतायु मतदाताओं का लोकतंत्र में उत्साह यह दर्शाता है कि हिमाचल प्रदेश की जनता अपने अधिकारों के प्रति कितनी जागरूक है। मतदान केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी है जिसे पूरा करने के लिए हर व्यक्ति को आगे आना चाहिए।

अंतिम रूप से, इन बुजुर्गों की कर्तव्यनिष्ठा ने एक स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो कोई भी मुश्किल मतदान करने से नहीं रोक सकती। प्रशासन और राजनीतिक दलों को भी इन वरिष्ठ नागरिकों से सीख लेनी चाहिए कि लोकतंत्र की नींव को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है। आने वाले समय में भी शतायु मतदाताओं का लोकतंत्र में उत्साह इतिहास के पन्नों में लोकतंत्र की ताकत के रूप में दर्ज रहेगा।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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