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राजस्थान

ईद उल अजहा पर सामाजिक सौहार्द की मिसाल बना फुलिया कला गांव

ईद उल अजहा पर सामाजिक सौहार्द की मिसाल देखने को मिली। फुलिया कला में नमाज के बाद अमन की दुआएं मांगी गईं। अकीदत और धार्मिक उत्साह के साथ संपन्न हुआ त्यौहार।

By अजय त्यागी
1 min read
ईद उल अजहा पर सामाजिक सौहार्द की मिसाल

ईद उल अजहा पर सामाजिक सौहार्द की मिसाल

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ईद उल अजहा पर सामाजिक सौहार्द की मिसाल के साथ क्षेत्र में त्यौहार का आयोजन बड़े ही अकीदत और धार्मिक उत्साह के साथ संपन्न हुआ। फुलिया कला गांव में सुबह से ही मस्जिदों और ईदगाहों में नमाजियों की भारी भीड़ देखी गई, जहां लोगों ने अल्लाह की इबादत कर मुल्क में अमन, खुशहाली और तरक्की के लिए विशेष दुआएं मांगी। यह आयोजन न केवल धार्मिक परंपरा का पालन था, बल्कि सामाजिक एकता का एक जीवंत उदाहरण भी प्रस्तुत करता है।

फुलिया कला में पेश इमाम मौलाना हाफिज मेराज आलम ने ईद की नमाज सुबह 7:30 बजे ईदगाह में अदा कराई। अपनी तकरीर में उन्होंने भाईचारे और इंसानियत का गहरा संदेश दिया, जिससे वहां मौजूद हर व्यक्ति प्रभावित हुआ। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे के गले लगकर ईद की मुबारकबाद दी, जो इस क्षेत्र की साझा संस्कृति और प्रेम को दर्शाता है।

अमन और एकता का पैगाम

नूर मोहम्मद खान ने बताया कि यह त्यौहार हमें मिलजुल कर रहने और कौमी एकता का संदेश देता है। ईद उल अजहा पर सामाजिक सौहार्द की मिसाल उस समय और स्पष्ट हो गई जब सदर अंजुमन कमेटी के कय्यूम कुरैशी, नूर मोहम्मद खान, हकीम मोहम्मद नीलगर, अमजद खान मंसूरी, साहिल मंसूरी, जफर मंसूरी, फिरोज मंसूरी, फारूक कायमखानी, इलियास नीलगर और शहाबुद्दीन उस्ता जैसे गणमान्य लोग एक साथ नजर आए। इन लोगों की सक्रियता से क्षेत्र में आपसी प्रेम का भाव और भी गहरा हुआ है।

हजारों की संख्या में उमड़े नमाजियों के इस हुजूम ने यह साबित कर दिया कि समाज में आज भी मेल-मिलाप और भाईचारे की भावना सर्वोपरि है। युवा पीढ़ी का इस आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत है। यह आयोजन दर्शाता है कि कैसे त्यौहारों का सही उपयोग समाज को और करीब लाने के लिए किया जा सकता है।

प्रशासनिक और जन सहयोग

इस अवसर पर स्थानीय प्रशासनिक अमले ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर एकता का संदेश दिया। तहसीलदार रामदेव धाकड़ तथा थाना अधिकारी राजकुमार नायक ने ईदगाह पहुंचकर मुस्लिम समाज को ईद की मुबारकबाद दी। जनप्रतिनिधियों में पूर्व सरपंच किशन लाल गोदारा और हरि सिंह लामरोड की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। ईद उल अजहा पर सामाजिक सौहार्द की मिसाल कायम करते हुए इन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने भाईचारे को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की यह भागीदारी न केवल शांति व्यवस्था को दर्शाती है, बल्कि क्षेत्र में सुरक्षा और विश्वास के वातावरण को भी मजबूत करती है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज की असली शक्ति हैं। प्रशासन ने त्योहार को शांतिपूर्ण और भाईचारे के साथ मनाने के लिए स्थानीय निवासियों की सराहना की।

भाईचारे का नया अध्याय

अंततः, फुलिया कला में मनाया गया यह त्यौहार अमन-चैन की एक नई कहानी लेकर आया है। ईद उल अजहा पर सामाजिक सौहार्द की मिसाल ने पूरे क्षेत्र में खुशहाली का संचार किया है। सभी धर्मों और समुदायों के लोगों का एक साथ आना यह स्पष्ट करता है कि समाज में इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है। उम्मीद है कि भविष्य में भी इसी प्रकार के आयोजन भाईचारे की मिसाल बनते रहेंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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