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आसाराम की सजा बरकरार, जमानत रद्द, किया सरेंडर

राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम की सजा बरकरार रखते हुए उसकी जमानत रद्द कर दी जिसके बाद आखिर आसाराम को जोधपुर सेंट्रल जेल में सरेंडर करना पड़ा। 

By अजय त्यागी
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आसाराम की सजा बरकरार किया सरेंडर

(रिपोर्ट- शिंभू सिंह शेखावत) राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा नाबालिग के यौन शोषण के मामले में आसाराम की सजा बरकरार रखने और अंतरिम जमानत रद्द करने के आदेश के बाद, गुरुवार दोपहर बाद दोषी ने जोधपुर सेंट्रल जेल पहुंचकर सरेंडर कर दिया है। इस घटनाक्रम के साथ ही कानूनी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है। फैसले के बाद से ही पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क था ताकि सरेंडर की प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से संपन्न कराया जा सके।

जोधपुर मुख्यपीठ ने बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा यथावत रहेगी। फैसले की जानकारी मिलते ही सुरक्षा एजेंसियों को तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए थे। उस समय दोषी हरिद्वार में मौजूद था, जहां से वह सड़क मार्ग द्वारा दिल्ली और फिर जोधपुर की ओर रवाना हुआ।

जेल जाने से बचने का प्रयास

जोधपुर पहुंचने के बाद दोषी ने पहले पाल गांव स्थित अपने आश्रम में शरण ली। सूत्रों के अनुसार, वहां से वह एम्स अस्पताल जाकर भर्ती होने का प्रयास कर रहा था ताकि मेडिकल आधार पर जेल जाने से बचा जा सके। हालांकि, प्रशासन और पुलिस की सक्रियता के कारण उसके ये सभी प्रयास नाकाम साबित हुए। कानून के लंबे हाथ और अदालत की सख्ती के आगे आखिरकार उसे झुकना ही पड़ा और उसे जेल जाना पड़ा।

इस प्रकरण ने एक बार फिर न्याय प्रक्रिया की निष्पक्षता को सिद्ध किया है। कोर्ट ने न केवल जमानत याचिका को खारिज किया, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि सजा का पालन बिना किसी देरी के हो। पुलिस और जेल प्रशासन ने भी पूरी मुस्तैदी दिखाते हुए सरेंडर की प्रक्रिया को कानूनी औपचारिकताओं के साथ पूरा किया। वर्तमान में दोषी को जोधपुर सेंट्रल जेल में रखा गया है, जहां अब उसे कानूनी प्रावधानों के तहत अपनी सजा काटनी होगी।

कानूनी फैसले का प्रभाव

हाईकोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले को पीड़ितों के लिए न्याय की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। चूंकि आसाराम की सजा बरकरार रही, इसलिए यह फैसला पूरी तरह से न्यायपालिका के सख्त रुख को दर्शाता है। यह इस बात का संकेत है कि अपराध कितना भी पुराना क्यों न हो और अपराधी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, अदालतें साक्ष्यों के आधार पर कठोर निर्णय लेने में संकोच नहीं करतीं। इस मामले ने समाज में कानूनी व्यवस्था के प्रति भरोसा और मजबूती का संचार किया है।

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सभी पहलुओं का बारीकी से विश्लेषण किया और अंतरिम जमानत के आधारों को अपर्याप्त मानते हुए उसे रद्द कर दिया। गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद से ही पुलिस टीम ने संदिग्ध ठिकानों पर नजर बनाए रखी थी ताकि कोई भी प्रक्रिया से बच न सके। जेल में सरेंडर के साथ ही अब कानूनी दांव-पेंच का यह दौर समाप्त हो गया है और सजा का कार्यान्वयन पूरी तरह प्रभावी हो गया है।

न्याय की दिशा में कदम

अंततः, लंबी कानूनी लड़ाई के बाद यह प्रकरण एक महत्वपूर्ण मुकाम पर पहुंच गया है। अब यह स्पष्ट है कि कानून का पालन ही सर्वोपरि है। आने वाले समय में भी इस मामले से जुड़ी सभी कानूनी प्रक्रियाएं अदालत के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही आगे बढ़ेंगी। समाज में इस फैसले की व्यापक चर्चा है और कानून के शासन को बनाए रखने में न्यायपालिका की भूमिका की सराहना की जा रही है, क्योंकि अंततः आसाराम की सजा बरकरार रखी गई है।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief