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ऑपरेशन शेरूवाली तेज: सुरक्षा बलों ने घेरा, सातवें दिन भी जंग जारी

ऑपरेशन शेरूवाली तेज हो गया है। सातवें दिन भी सुरक्षा बलों का जंगलों में सघन तलाशी अभियान जारी, आतंकियों की घेराबंदी मजबूत हुई।

By अजय त्यागी
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ऑपरेशन शेरूवाली तेज

(राजौरी, जम्मू और कश्मीर)। ऑपरेशन शेरूवाली तेज कर दिया गया है, जो अब सातवें दिन में प्रवेश कर चुका है। डोरी माल के घने जंगलों में छिपे आतंकवादियों को बाहर निकालने के लिए भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीमें पूरी ताकत के साथ डटी हुई हैं। सुरक्षा बलों ने इलाके को चारों ओर से घेर रखा है और संदिग्ध ठिकानों पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी आतंकी गतिविधि को विफल किया जा सके।[1]

जंगलों की दुर्गम भौगोलिक स्थिति और खराब मौसम के बावजूद जवानों का हौसला बुलंद है। सुरक्षा एजेंसियां 'ऑपरेशन शेरूवाली' के तहत एक विशेष रणनीति पर काम कर रही हैं, जिसमें अत्याधुनिक निगरानी उपकरणों और ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि वे किसी भी हाल में आतंकवादियों को भागने का मौका नहीं देना चाहते और पूरे क्षेत्र में कड़ी नाकेबंदी बनाए हुए हैं।

सुरक्षा का अभेद्य घेरा

सुरक्षा बलों की यह साझा कार्रवाई आतंकवाद के खात्मे के लिए एक बड़ी मिसाल पेश कर रही है। सघन तलाशी अभियान के तहत हर एक गुफा और झाड़ियों की बारीकी से जांच की जा रही है। ऑपरेशन शेरूवाली तेज होने से आतंकियों पर दबाव बढ़ गया है। क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा टुकड़ियां भी तैनात की गई हैं, जो इस बात को सुनिश्चित कर रही हैं कि बाहर से किसी भी तरह की मदद आतंकियों तक न पहुंच सके।

इस अभियान की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने भी सहयोग मांगा है। सुरक्षा बलों के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्थिति पर स्पष्ट करते हुए कहा:

"हमारा संयुक्त तलाशी अभियान पूरी तरह से लक्षित है। सातवें दिन भी हम डटे हुए हैं और इलाके को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ऑपरेशन शेरूवाली अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है।"

रणनीति और निगरानी

सैनिकों की यह रणनीति केवल आतंकियों की घेराबंदी ही नहीं, बल्कि उनकी हर चाल को भांपने की है। दुर्गम रास्तों और पहाड़ी इलाकों में जवानों ने अपने अस्थायी बेस कैंप बनाए हैं, जहां से वे चौबीसों घंटे निगरानी कर रहे हैं। ऑपरेशन शेरूवाली तेज होने के कारण आतंकियों की रसद और छिपने के रास्ते लगभग पूरी तरह बंद हो चुके हैं। इस पूरे क्षेत्र को अब पूरी तरह से निगरानी के दायरे में लिया गया है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे भी सुरक्षा बलों की इस कार्रवाई का पूरा समर्थन कर रहे हैं ताकि इलाके में शांति बहाल हो सके। सुरक्षा एजेंसियां लगातार इस बात पर जोर दे रही हैं कि आम लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है। घने जंगलों के बीच चल रहे इस भीषण अभियान ने आतंकियों की कमर तोड़ दी है और उनके पास अब बहुत कम विकल्प बचे हैं।

संकल्प और जीत

यह अभियान इस बात का प्रतीक है कि सुरक्षा बल देश की अखंडता और शांति के लिए किसी भी सीमा तक जाने को तैयार हैं। ऑपरेशन शेरूवाली तेज होने के बाद जिस तरह से घेराबंदी की गई है, वह आतंकियों के खात्मे का संदेश है। सुरक्षा एजेंसियां पूरी धैर्य के साथ इस मिशन को अंजाम दे रही हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

अंततः, सात दिनों के इस कठिन संघर्ष के बाद सुरक्षा बलों को जल्द ही बड़ी कामयाबी मिलने की उम्मीद है। आतंकवाद के खिलाफ छेड़ी गई यह जंग तब तक जारी रहेगी जब तक अंतिम आतंकी का खात्मा न हो जाए। पूरी टीम का मनोबल ऊंचा है और ऑपरेशन शेरूवाली तेज करके सुरक्षा बल अपनी जीत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। (एजेंसी इनपुट के साथ)

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह रिपोर्ट सुरक्षा बलों द्वारा साझा किए गए तथ्यों और आधिकारिक बयानों पर आधारित है। इसे केवल सूचनात्मक दृष्टि से प्रकाशित किया गया है। लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी प्रकार के सुरक्षा संबंधी दावों या सैन्य अभियानों के निर्णयों के लिए आधिकारिक सरकारी सूचनाओं को ही प्रमाणिक मानते हैं। यह रिपोर्ट केवल सार्वजनिक जागरूकता के उद्देश्य से तैयार की गई है।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief