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बैंकिंग धोखाधड़ी: RBI की रिपोर्ट में हुआ 48 हजार करोड़ का खुलासा

बैंकिंग धोखाधड़ी के मामले बढ़ रहे हैं। आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा, करोड़ों की चपत से बैंकिंग सिस्टम हुआ सावधान।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

(मुंबई, महाराष्ट्र)। बैंकिंग धोखाधड़ी के मामले वित्त वर्ष 2025-26 में एक गंभीर चिंता का विषय बनकर उभरे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ताजा वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय संस्थानों और बैंकों ने इस दौरान 10,114 धोखाधड़ी के मामले दर्ज किए हैं, जिनमें कुल 48,021 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि दांव पर लगी है। दिलचस्प बात यह है कि पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में यह संख्या 23,722 मामले थी, लेकिन कुल राशि 32,803 करोड़ रुपये थी, जो धोखाधड़ी के बढ़ते बड़े वित्तीय आकार को दर्शाती है।

आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों में मामलों की संख्या में तो कमी आई है, लेकिन उनसे जुड़ी धोखाधड़ी की राशि में तेजी से वृद्धि हुई है। पिछले तीन वर्षों के विश्लेषण से पता चलता है कि अब अपराधी छोटे-मोटे डिजिटल फ्रॉड के बजाय बड़ी ऋण संबंधी (advances) धोखाधड़ी पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जो पूरी बैंकिंग प्रणाली की स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती है।[1]

ऋण श्रेणी में बढ़त

आंकड़ों के अनुसार, बैंकिंग धोखाधड़ी के मामलों में सबसे बड़ा हिस्सा 'एडवांस' या ऋण श्रेणी से संबंधित है। जहाँ 2023-24 और 2024-25 में डिजिटल और कार्ड भुगतान संबंधी फ्रॉड की संख्या अधिक थी, वहीं 2025-26 में ऋण संबंधी गड़बड़ियां शीर्ष पर रहीं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) में मामलों की संख्या पिछले साल की तुलना में कम हुई, लेकिन इनमें फंसी राशि बढ़कर 35,709 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

इस बढ़ते आर्थिक खतरे पर आरबीआई ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है:

"बैंकिंग क्षेत्र में धोखाधड़ी के तौर-तरीके बदल रहे हैं। भले ही संख्या में कमी आई है, लेकिन एडवांसेज श्रेणी में होने वाली धोखाधड़ी की राशि बैंकिंग सिस्टम पर एक बड़ा बोझ डाल रही है। हमने साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नई पहल शुरू की है।"

निजी बैंकों की स्थिति

निजी क्षेत्र के बैंकों ने भी धोखाधड़ी के मामलों में गिरावट दर्ज की है। पिछले वर्ष के 14,024 मामलों की तुलना में 2025-26 में यह संख्या घटकर 3,956 रह गई है। हालांकि, इन बैंकों में भी धोखाधड़ी की राशि 8,927 करोड़ रुपये से बढ़कर 11,399 करोड़ रुपये हो गई है। विदेशी बैंकों, स्मॉल फाइनेंस बैंकों और पेमेंट्स बैंकों के आंकड़े भी इसी ओर इशारा कर रहे हैं कि वित्तीय संस्थानों को अब अपनी सुरक्षा नीतियों को और अधिक सख्त करने की आवश्यकता है।

आरबीआई की रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि 2025-26 के आंकड़ों में 314 मामले ऐसे हैं जो पिछले वर्षों से संबंधित हैं, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट के मार्च 2023 के निर्णय के बाद फिर से वर्गीकृत किया गया है। बैंकिंग धोखाधड़ी के मामले न केवल ग्राहकों का भरोसा कम करते हैं, बल्कि वित्तीय संस्थानों के परिचालन पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। ऐसे में डिजिटल सुरक्षा के नए मानकों को अपनाना अब अपरिहार्य हो गया है।

साइबर सुरक्षा पर जोर

इन उभरते खतरों का सामना करने के लिए रिजर्व बैंक ने 'साइबर रेंज' पहल को सक्रिय कर दिया है। आईडीबीआरआईटी (IDBRT) में एक अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म तैनात किया गया है, जो बैंकों को साइबर हमलों के खिलाफ ड्रिल और सिमुलेशन अभ्यास करने की सुविधा देता है। यह पहल बैंकों की रिस्पांस क्षमता और सेक्टर की तैयारी को मजबूत करने के लिए डिजाइन की गई है, ताकि भविष्य में होने वाली चुनौतियों से निपटा जा सके।

आरबीआई आने वाले वित्त वर्ष में साइबर जोखिमों के लिए सूक्ष्म-डेटा एनालिटिक्स प्रोजेक्ट शुरू करने की योजना बना रही है। साथ ही, केवाईसी (KYC) और एएमएल (AML) पर्यवेक्षण के लिए रिस्क-आधारित दृष्टिकोण की समीक्षा की जाएगी। कुल मिलाकर, बैंकिंग धोखाधड़ी के मामले रोकने के लिए रिजर्व बैंक और बैंक अब तकनीक के साथ-साथ कड़े निगरानी तंत्र का सहारा ले रहे हैं, जिससे इस बढ़ते वित्तीय अपराध को समय रहते काबू किया जा सके। (एजेंसी इनपुट के साथ)

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह रिपोर्ट आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट और वित्तीय आंकड़ों पर आधारित है। इसे केवल सूचनात्मक उद्देश्य से तैयार किया गया है। निवेश, बचत और बैंकिंग संबंधी निर्णय लेने से पहले संबंधित बैंकों की आधिकारिक जानकारी और वित्तीय सलाहकारों से परामर्श लें। इस रिपोर्ट के आधार पर किसी भी प्रकार के वित्तीय नुकसान या निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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