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चंद्रयान-4 और 5 मिशन: इसरो की अगली बड़ी तैयारी शुरू

चंद्रयान-4 और 5 मिशन की तैयारी में जुटा इसरो। चांद से मिट्टी और चट्टान के नमूने लाने के साथ पानी की खोज होगी और भी सटीक।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

(भोपाल, मध्य प्रदेश)। चंद्रयान-4 और 5 मिशन के साथ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अब चंद्रमा की खोज में एक नई छलांग लगाने को तैयार है। चंद्रयान-2 और चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता के बाद, इसरो के वैज्ञानिक अब इन आगामी मिशनों की रूपरेखा तैयार करने में जुटे हैं। इन अभियानों का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा से मिट्टी और चट्टानों के नमूने पृथ्वी पर वापस लाना और वहां जल की उपस्थिति की संभावनाओं का गहराई से अध्ययन करना है।

इसरो के राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) के निदेशक प्रकाश चौहान ने भोपाल में इस आगामी बड़ी योजना की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि चंद्रयान-4 मिशन के लिए वर्ष 2028 का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और वैज्ञानिक इसके लिए युद्धस्तर पर कार्य कर रहे हैं। यह मिशन न केवल तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होगा, बल्कि भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान भी दिलाएगा।[1]

सैंपल रिटर्न मिशन

चंद्रयान-4 एक 'सैंपल रिटर्न मिशन' होगा। इसमें एक रोबोटिक प्रणाली चंद्रमा की सतह पर उतरेगी और रोबोटिक आर्म्स की मदद से वहां की मिट्टी और चट्टानों के नमूने एकत्र करेगी। इन नमूनों को सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाया जाएगा, ताकि प्रयोगशालाओं में इनका विस्तृत विश्लेषण किया जा सके। इस प्रक्रिया से चांद की संरचना और वहां के संसाधनों के बारे में जानकारी प्राप्त करना कहीं अधिक आसान हो जाएगा।

आगामी मिशनों की तैयारी पर इसरो के निदेशक ने कहा:

"चंद्रयान-4 एक नमूना वापसी मिशन है। एक रोबोटिक प्रणाली चंद्रमा पर उतरेगी, रोबोटिक हथियारों का उपयोग करके चंद्र मिट्टी और चट्टानों के नमूने एकत्र करेगी और उन्हें पृथ्वी पर वापस लाएगी।"

चंद्रयान-5 की रूपरेखा

इसरो अब चंद्रयान-4 और 5 मिशन की श्रृंखला में अगले कदम के रूप में चंद्रयान-5 की भी तैयारी कर रहा है, जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास पानी, बर्फ और अन्य संसाधनों के अन्वेषण पर केंद्रित होगा। यह मिशन इसरो और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) के बीच एक संयुक्त साझेदारी होगी। यह एक लैंडर-रोवर मिशन होगा, जिसमें लैंडर इसरो द्वारा विकसित किया जाएगा, जबकि रोवर जापान द्वारा बनाया जा रहा है।

अधिकारियों के अनुसार, चंद्रयान-5 में उपयोग किया जाने वाला रोवर पिछले मिशनों की तुलना में काफी अधिक वजनी और उन्नत होगा। डॉ. चौहान ने बताया कि यह मिशन चंद्रमा के उन रहस्यमयी क्षेत्रों को उजागर करेगा जहां अब तक किसी की पहुंच नहीं हो सकी है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ की मौजूदगी और वहां के खनिजों का पता लगाना इस मिशन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है।

चंद्र यात्रा का सफर

भारत की चंद्र यात्रा 1999 में शुरू हुई थी, जिसके परिणामस्वरूप 2008 में चंद्रयान-1 का सफल प्रक्षेपण हुआ और इसने चंद्रमा पर पानी के अणुओं की पुष्टि की। चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर आज भी चंद्रमा की कक्षा में सक्रिय है और वैज्ञानिक डेटा भेज रहा है, जिसने ध्रुवीय क्षेत्रों में दबी हुई बर्फ के संकेत खोजे हैं। वहीं, 23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 की सफल सॉफ्ट लैंडिंग ने भारत को दक्षिणी ध्रुव के करीब उतरने वाला दुनिया का पहला देश बना दिया।

अब भारत चंद्रयान-4 और 5 मिशन के साथ चंद्रमा पर अपना स्थायी प्रभाव छोड़ने के लिए तैयार है। यह केवल एक मिशन नहीं है, बल्कि भारत का वह स्वप्न है जो मानव जाति को भविष्य में चंद्रमा पर रहने और वहां के संसाधनों का उपयोग करने में मदद करेगा। इसरो की यह निरंतर कोशिश देश को अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में एक अग्रणी महाशक्ति के रूप में स्थापित कर रही है।

अगली बड़ी छलांग

चंद्रयान-4 और 5 के विकास के साथ ही भारत अपनी अगली बड़ी छलांग के लिए तैयार है। ये मिशन न केवल चंद्रमा के रहस्यों को सुलझाएंगे बल्कि भविष्य के गहरे अंतरिक्ष अन्वेषणों की नींव भी रखेंगे। अंततः, चंद्रयान-4 और 5 मिशन के जरिए भारत चांद से सामग्री वापस लाकर वैज्ञानिक इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय लिखने की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ा रहा है।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह रिपोर्ट इसरो के आधिकारिक बयानों और अंतरिक्ष अनुसंधान से जुड़े तथ्यों पर आधारित है। इसे केवल सूचनात्मक उद्देश्य से तैयार किया गया है। अंतरिक्ष मिशनों की तकनीकी जानकारी एवं भविष्य की योजनाओं के लिए इसरो द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियां ही अंतिम और प्रमाणिक मानी जाएं। लेखक, प्रकाशक एवं संपादक इस रिपोर्ट के आधार पर किसी भी प्रकार के व्यावसायिक या अन्य निष्कर्षों के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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