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गिर के शेरों की मौत: महामारी का खतरा या प्रशासनिक लापरवाही

गिर के शेरों की मौत के बढ़ते मामलों ने सबको चौंका दिया है। मई महीने में 11 शेरों की जान जा चुकी है, वन विभाग ने शुरू की जांच।

By अजय त्यागी
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advertisement13Aug2026%20copy.jpg स्वास्थ्य जांच करते चिकित्सक

स्वास्थ्य जांच करते चिकित्सक

(अमरेली, गुजरात)। गिर के शेरों की मौत के बढ़ते मामलों ने वन्यजीव प्रेमियों और स्थानीय निवासियों के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है। अमरेली जिले के गिर पूर्व और गिर पश्चिम वन प्रभागों में शेरों की असमय मृत्यु का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। आज जसाधर एनिमल केयर सेंटर में उपचार के दौरान दो और शावकों ने दम तोड़ दिया, जिसके बाद मई 2026 में मरने वाले शेरों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है।

इन मौतों के पीछे शुरुआती संदेह 'बेबेसिया' संक्रमण पर था, जो चिंचड़ियों (ticks) के माध्यम से फैलता है। हालांकि, अब विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे 'कैनाइन डिस्टेंपर वायरस' (CDV) का भी हाथ हो सकता है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) भवानी पाटी ने इन मौतों की पुष्टि की है, जिसके बाद से पूरे वन विभाग में हड़कंप की स्थिति है।[1]

सरकार का युद्धस्तर अभियान

गुजरात के वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कहा कि इस महामारी को फैलने से रोकने के लिए वन विभाग 'युद्धस्तर' पर काम कर रहा है। पूरे क्षेत्र में टीकाकरण अभियान, स्वास्थ्य जांच और विशेष उपचार प्रक्रियाएं तेज कर दी गई हैं। विशेषज्ञों की देखरेख में अब तक 350 से अधिक शेरों को संक्रमण मुक्त (de-ticked) किया जा चुका है।

इस गंभीर विषय पर वन मंत्री ने कहा:

"विशेषज्ञों की निगरानी में 350 से अधिक शेरों को सफलतापूर्वक संक्रमण मुक्त किया गया है। जिन शेरों में संदिग्ध लक्षण दिख रहे हैं, उन्हें आइसोलेट कर निरंतर स्वास्थ्य निगरानी में रखा जा रहा है। राज्य सरकार और वन विभाग एशियाई शेरों के संरक्षण और सुरक्षा के प्रति पूरी तरह समर्पित है।"

हाई अलर्ट पर विभाग

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अध्यक्षता में हुई उच्च-स्तरीय बैठक के बाद गांधीनगर से वन विभाग की एक विशेष टीम गिर पहुंच चुकी है। गिर पूर्व और गिर पश्चिम के सीमावर्ती इलाकों में जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। विभाग को 'हाई अलर्ट' पर रखा गया है और PCCF भवानी पाटी स्वयं स्थिति का जायजा लेने के लिए विभिन्न केयर सेंटरों का दौरा कर रहे हैं।

मृत शेरों के नमूने गांधीनगर स्थित प्रयोगशाला में भेजे गए हैं, जिनकी रिपोर्ट आने के बाद ही मौतों का वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल, गिर के विभिन्न क्षेत्रों में शेरों पर करीबी नजर रखने के लिए एक विशेष निगरानी अभियान शुरू किया गया है, ताकि किसी भी बीमार जानवर को समय पर उपचार मिल सके। गिर के शेरों की मौत के इस संकट को देखते हुए वन विभाग कोई भी जोखिम नहीं उठाना चाहता।

सतर्कता और वन्यजीव सुरक्षा

वन्यजीवों के इस प्रमुख आश्रय स्थल पर मौजूदा तनाव को कम करने के लिए अधिकारी लगातार सक्रिय हैं। गिर के शेरों की मौत की इन घटनाओं ने पूरे देश के पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा पर प्रश्न खड़ा कर दिया है। सरकार और वन विभाग का पूरा जोर अब इस संक्रामक बीमारी के प्रसार को थामने और शेरों की आबादी को सुरक्षित रखने पर है।

निष्कर्ष यह है कि जब तक प्रयोगशाला रिपोर्ट नहीं आ जाती, विभाग की नजर हर संदिग्ध गतिविधि पर बनी रहेगी। शेरों के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए विशेष सर्विलांस दल भी तैनात किए गए हैं, जो चौबीसों घंटे निगरानी कर रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि समय पर टीकाकरण और उपचार से गिर के शेरों की मौत का यह सिलसिला जल्द ही थमेगा और एशियाई शेरों का यह गौरव सुरक्षित रहेगा।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह रिपोर्ट वन विभाग की आधिकारिक जानकारी और विश्वसनीय समाचार सूत्रों पर आधारित है। लेखक, प्रकाशक एवं संपादक इस विषय में केवल उपलब्ध तथ्यों को प्रस्तुत कर रहे हैं। वन्यजीवों के स्वास्थ्य संबंधी किसी भी आधिकारिक अपडेट के लिए वन एवं पर्यावरण विभाग द्वारा जारी सूचनाओं को ही प्रमाणिक मानें।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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