WA Join our WhatsApp Group
Advertisement Advertisement
प्रादेशिक

सदर अस्पताल में जलभराव: मरीजों की बढ़ी मुश्किलें, बदहाल व्यवस्था

सदर अस्पताल में जलभराव होने से मरीजों और परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश से स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुल गई है।

By अजय त्यागी
1 min read
सदर अस्पताल में जलभराव

सदर अस्पताल में जलभराव

Thanks to all the readers for their 3+ Years of dedication and trust

(नवादा, बिहार)। सदर अस्पताल में जलभराव ने स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलकर रख दी है। हाल ही में हुई भारी बारिश और तेज हवाओं के कारण अस्पताल परिसर पूरी तरह से पानी में डूब गया है। आलम यह है कि दवा वितरण केंद्र से लेकर अस्पताल के मुख्य वार्डों तक पानी घुस गया है, जिससे इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

अस्पताल के भीतर पानी भर जाने से न केवल स्वच्छता प्रभावित हुई है, बल्कि मरीजों के लिए आवाजाही भी जोखिम भरी हो गई है। कीचड़ और जलभराव के कारण संक्रमण फैलने का खतरा भी मंडरा रहा है। अस्पताल प्रशासन की ओर से जल निकासी के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण यह समस्या और भी गंभीर हो गई है, जिससे मरीजों को भारी असुविधा हो रही है।[1]

अव्यवस्था से बढ़ी परेशानी

सदर अस्पताल में जलभराव के कारण दवा वितरण केंद्र तक पहुंचना भी एक चुनौती बन गया है। मरीज जो पहले से ही बीमारी से जूझ रहे हैं, उन्हें अब अस्पताल के भीतर भरे गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। अस्पताल में आने वाले लोगों का कहना है कि जरा सी बारिश में ही पूरा परिसर तालाब बन जाता है, जिससे मरीजों के लिए अस्पताल पहुंचना किसी जंग जीतने से कम नहीं है।

अस्पताल की स्थिति पर प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है:

"अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर जलभराव होना प्रशासन की घोर लापरवाही को दर्शाता है। मरीजों को दवा लेने के लिए भी पानी में खड़े होने को मजबूर होना पड़ रहा है।"

प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल

अस्पताल परिसर में फैली इस अव्यवस्था पर स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। सदर अस्पताल में जलभराव को रोकने के लिए अब तक कोई ठोस ड्रेनेज सिस्टम नहीं बनाया गया है, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। पानी के साथ ही कीचड़ और गंदगी का जमावड़ा होने से स्वास्थ्य केंद्र की सूरत पूरी तरह से बदहाल हो चुकी है।

बारिश के दौरान बिजली और पानी की निकासी जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव अस्पताल की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। मरीजों के साथ आए परिजनों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन को जल निकासी के लिए तुरंत कदम उठाने चाहिए थे, ताकि आपातकालीन स्थिति में मरीजों को परेशानी न हो। लेकिन, सुस्त रवैये के कारण अस्पताल की हालत हर बार बारिश के बाद यही रहती है।

सुधार की तत्काल आवश्यकता

भविष्य में इस तरह की समस्या से निपटने के लिए जिला प्रशासन को गंभीरता दिखानी होगी। सदर अस्पताल में जलभराव जैसी स्थिति को दोबारा उत्पन्न होने से रोकने के लिए अस्पताल परिसर में ड्रेनेज पाइपलाइन को दुरुस्त करना अनिवार्य है। स्वास्थ्य विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी स्थिति में अस्पताल की सेवाएं बाधित न हों और मरीजों को सुरक्षित वातावरण मिल सके।

अंततः, सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की ऐसी दयनीय स्थिति का सुधारीकरण ही एकमात्र समाधान है। अस्पताल को न केवल आधुनिक उपकरणों से लैस होना चाहिए, बल्कि उसकी बुनियादी संरचना भी मजबूत होनी चाहिए ताकि आपदा के समय वह मरीजों का सहारा बन सके। उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी इस मामले में त्वरित संज्ञान लेंगे ताकि फिर कभी सदर अस्पताल में जलभराव की ऐसी तस्वीरें सामने न आएं।

Thanks to all the readers for their 3+ Years of dedication and trust
Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief