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किसान सभा का प्रदर्शन: गेहूं खरीद की मियाद बढ़ाने की उठी मांग

किसान सभा का प्रदर्शन: गेहूं खरीद की मियाद 30 जून तक करने और ट्रांसफार्मर की मांग को लेकर किसानों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन।

By अजय त्यागी
1 min read
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किसान सभा का प्रदर्शन

इटावा, राजस्थान (शिंभू सिंह शेखावत)। किसान सभा का प्रदर्शन आज पीपल्दा क्षेत्र में उग्र रूप में देखने को मिला, जहाँ अखिल भारतीय किसान सभा की तहसील कमेटी ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। बड़ी संख्या में एकत्रित हुए किसानों ने उपखण्ड अधिकारी हेमंत घनघोर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों का मुख्य जोर लंबित गेहूं खरीद टोकन और किसानों की अन्य समस्याओं के समाधान पर था।

किसानों का कहना है कि सरकारी गेहूं खरीद केंद्रों पर उनके टोकन अभी भी लंबित पड़े हैं, जिसके कारण वे अपनी फसल बेचने से वंचित हो रहे हैं। इस आर्थिक संकट से बचने के लिए किसानों ने मांग की है कि गेहूं खरीद की समयावधि को बढ़ाकर 30 जून तक किया जाए। यदि समय सीमा नहीं बढ़ाई गई, तो मजबूरन किसानों को अपनी फसल औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर होना पड़ेगा।

बिजली और अन्य मांगें

प्रदर्शन के दौरान सिंचाई की समस्या को लेकर भी किसानों का आक्रोश फूटा। किसानों ने मांग की है कि क्षेत्र के कृषि बिजली कनेक्शनों के लिए प्राथमिकता के आधार पर ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि फसलों को पर्याप्त पानी मिल सके। इसके अलावा, बढ़ती महंगाई पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में हुई भारी वृद्धि को तुरंत वापस लेने की पुरजोर अपील की गई।

सभा के दौरान किसान नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा:

"मनरेगा योजना के तहत मजदूरों को रोजगार उपलब्ध नहीं हो रहा है। यदि इन समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो किसान सभा भविष्य में बड़ा आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।"

अधिकारों के लिए लामबंद

क्षेत्रीय किसानों ने इस अवसर पर अपनी एकता का प्रदर्शन किया। सुरजमल मीणा, बाबू लाल बलवानी और मुकुट बिहारी जंगम जैसे वरिष्ठ किसान नेताओं ने सभा को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि वे अपने अधिकारों के लिए किसी भी स्तर तक संघर्ष करने के लिए तैयार हैं। प्रशासन को दी गई चेतावनी के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या सकारात्मक रुख अपनाती है।

मनरेगा में कार्य न मिलने की समस्या ने भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसान सभा का प्रदर्शन केवल गेहूं खरीद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें सामाजिक व आर्थिक मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया। किसान सभा के पदाधिकारियों ने साफ कर दिया है कि वे आने वाले दिनों में स्थानीय स्तर पर सक्रिय होकर अपनी मांगों के पूरा होने तक दबाव बनाए रखेंगे।

समाधान की उम्मीद

उपखण्ड अधिकारी ने ज्ञापन प्राप्त कर उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया है, जिससे किसानों में एक छोटी सी उम्मीद की किरण जगी है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या सरकार गेहूं खरीद की मियाद बढ़ाकर किसानों को राहत प्रदान करेगी या उन्हें और अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। किसान सभा का प्रदर्शन स्पष्ट संदेश देता है कि अपनी जीविका और कृषि व्यवस्था को लेकर किसान अब चुप बैठने वाले नहीं हैं।

क्षेत्र में जारी इस हलचल ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं, विशेषकर गेहूं खरीद केंद्रों की अव्यवस्था को लेकर। यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले समय में पीपल्दा का यह किसान सभा का प्रदर्शन एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले सकता है। किसान एकजुट होकर अपने हितों के लिए लगातार प्रयासरत हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह रिपोर्ट किसान सभा द्वारा सौंपे गए ज्ञापन और प्रदर्शन की जानकारी पर आधारित है। सरकार या प्रशासन की ओर से अभी तक इन मांगों पर कोई आधिकारिक नीतिगत निर्णय नहीं लिया गया है। लेखक, प्रकाशक एवं संपादक इस विषय में किसी भी प्रशासनिक प्रक्रिया या निर्णय के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief