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आदिवासी नाबालिग के साथ दरिंदगी और तस्करी: दो बार बिका मासूम का जिस्म

आदिवासी नाबालिग के साथ दरिंदगी और तस्करी का मामला सामने आया है। दो बार बिकी मासूम को दो साल तक झेलनी पड़ी नर्क जैसी प्रताड़ना। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

(ढेंकनाल, ओडिशा)। आदिवासी नाबालिग के साथ दरिंदगी और तस्करी का एक ऐसा रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। ढेंकनाल जिले की एक नाबालिग आदिवासी लड़की ने आरोप लगाया है कि उसे दो बार बेचा गया और उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में दो वर्षों से अधिक समय तक लगातार यौन शोषण का शिकार बनाया गया। यह खौफनाक घटना तब प्रकाश में आई जब लड़की 18 मई को अपहरणकर्ताओं के चंगुल से भागने में सफल रही और 23 मई को अपने घर वापस पहुंचकर कामाख्यानगर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

ढेंकनाल के पुलिस अधीक्षक अभिनव सोनकर ने बताया कि इस गंभीर मामले में आरोपियों की पहचान कर ली गई है। पुलिस की विशेष टीमें झांसी रवाना की गई हैं ताकि वहां छिपे आरोपियों को गिरफ्तार किया जा सके। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष शोभना मोहंती, जो एक विशेष कैंप कोर्ट के सिलसिले में ढेंकनाल में मौजूद थीं, उन्होंने कामाख्यानगर पुलिस थाने का दौरा किया और मामले की विस्तृत जानकारी ली। बाद में उन्होंने पीड़िता के घर जाकर उससे मुलाकात की और उसकी आपबीती सुनी।[1]

शोषण का काला अध्याय

पीड़िता ने बताया कि कम उम्र में ही उसने अपने पिता को खो दिया था। उसके बाद उसकी मां ने दूसरी शादी कर ली, लेकिन सौतेले पिता द्वारा उपेक्षा किए जाने और मां के बीमार पड़ने के बाद घर की आर्थिक स्थिति बदतर हो गई। इलाज के लिए पैसों की जरूरत देख वह कंकडाहाडा ब्लॉक के डांगापाल गांव के बिनोद पात्रा के संपर्क में आई। बिनोद ने उसे भुवनेश्वर में अच्छी नौकरी दिलाने का लालच दिया। लेकिन भुवनेश्वर ले जाने के बजाय उसने उसे झांसी के आशीष यादव के हाथों एक लाख रुपये में बेच दिया। यहीं से शुरू हो गया आदिवासी नाबालिग के साथ दरिंदगी और तस्करी का घिनौना खेल। 

आशीष यादव उसे झांसी के एक गांव में ले गया। पीड़िता ने खुलासा किया कि भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन पर उसे अन्य लड़कियों के साथ भी मिलाया गया था, जिन्हें उसके साथ ही उत्तर प्रदेश ले जाया गया था। झांसी पहुंचने पर आशीष ने उसे बंधक बना लिया और बार-बार यौन शोषण किया। आशीष के पिता कल्याण ने भी तीन महीने तक उसका रेप किया। जब वह गर्भवती हुई, तो इस दरिंदे पिता-पुत्र की जोड़ी ने उसे जबरन गर्भपात (अबॉर्शन) कराने के लिए मजबूर किया।

यातनाओं का अंतहीन सिलसिला

आदिवासी नाबालिग के साथ दरिंदगी और तस्करी का यह मामला यहीं पर नहीं थमा। गर्भपात के बाद, यादव ने उसे चंद्रपाल कुशवाहा नामक व्यक्ति को 50 हजार रुपये में बेच दिया। अगले दो वर्षों तक चंद्रपाल, उसके बड़े भाई और दो चाचाओं ने लड़की को लगातार अपनी हवस का शिकार बनाया। पीड़िता का आरोप है कि उसे पूरे समय कैद में रखा गया, किसी से बात करने की अनुमति नहीं दी गई और शारीरिक प्रताड़ना के साथ-साथ उसे पर्याप्त भोजन भी नहीं दिया जाता था।

इस महीने की शुरुआत में, वह किसी तरह कैद से भागने में सफल रही और झांसी पहुंची, जहां एक वकील की मदद से उसने शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया। पीड़िता का आरोप है कि झांसी पुलिस ने मामला दर्ज करने के बजाय उसे चुपचाप एक ट्रेन टिकट थमाकर ओडिशा वापस भेज दिया। ढेंकनाल लौटने के बाद पुलिस ने उसका मेडिकल परीक्षण कराया और कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं।

न्याय की उम्मीद और भविष्य

पुलिस का मानना है कि यह कोई इकलौता मामला नहीं है। उन्हें आशंका है कि उत्तर प्रदेश में इसी तरह अन्य लड़कियां भी बंधक बनी हो सकती हैं। महिला आयोग की अध्यक्ष मोहंती ने बताया कि पुलिस ने उन्हें आश्वासन दिया है कि तस्करी कर ले जाई गई अन्य लड़कियों को भी जल्द ही वापस लाया जाएगा। मुख्य आरोपी बिनोद पात्रा अभी भी फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस छापेमारी कर रही है।

पीड़िता ने भावुक होकर बताया कि वह इस कदर सदमे में है कि उसे लगता है जैसे वह अब जीवित ही नहीं है। आदिवासी नाबालिग के साथ दरिंदगी और तस्करी का यह मामला सुरक्षा तंत्र और मानव तस्करी के खिलाफ हमारी लड़ाई पर गंभीर सवाल खड़े करता है। समाज के सबसे कमजोर वर्ग की एक बेटी के साथ हुई यह दरिंदगी न्याय व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है। उम्मीद है कि जल्द ही सभी आरोपी सलाखों के पीछे होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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