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पत्रकार की आजीविका पर बुलडोजर कार्रवाई: लोकतंत्र पर बड़ा हमला

पत्रकार की आजीविका पर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर केंद्रीय मंत्री को ज्ञापन, प्रशासन की द्वेषपूर्ण कार्यशैली पर जताई कड़ी चिंता।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को सौंपा ज्ञापन

केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को सौंपा ज्ञापन

जोधपुर, राजस्थान (शिंभु सिंह शेखावत)। पत्रकार की आजीविका पर बुलडोजर कार्रवाई का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ) की जोधपुर जिला इकाई ने इस घटना के विरोध में केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को एक ज्ञापन सौंपा है। जिला अध्यक्ष प्रदीप जोशी के नेतृत्व में सौंपे गए इस ज्ञापन में प्रशासन द्वारा एक वरिष्ठ पत्रकार की आजीविका के साधन को ध्वस्त करने को लोकतंत्र पर सीधा प्रहार और अत्यंत चिंताजनक बताया गया है।

ज्ञापन में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र सिंह राठौड़ की आजीविका पर तत्कालीन जिला कलेक्टर द्वारा कागजी कार्रवाई की आड़ में छलपूर्वक बुलडोजर चलाया गया। इस दमनात्मक कार्रवाई से पत्रकार को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ है। पत्रकार संगठनों का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया द्वेषपूर्ण और एकपक्षीय थी, जिसके खिलाफ पूरे देश के पत्रकारों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

निष्पक्ष जांच की मांग

पत्रकार संगठनों ने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया है कि वे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस मामले में निष्पक्ष जांच की सिफारिश करें। मांग की गई है कि वरिष्ठ पत्रकार की आजीविका की पुनर्स्थापना सुनिश्चित की जाए ताकि तत्कालीन प्रशासन की इस दमनकारी कार्यशैली का सच सबके सामने आ सके। यह मामला अब केवल एक व्यक्ति का न रहकर पत्रकारिता की स्वतंत्रता की लड़ाई बन चुका है।

जिलाध्यक्ष प्रदीप जोशी ने ज्ञापन सौंपने के दौरान कहा:

"पत्रकार की आजीविका पर बुलडोजर कार्रवाई लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर एक हमला है। जयपुर के शहीद स्मारक पर 19 दिनों तक चले धरना-प्रदर्शन को केवल आश्वासन के आधार पर स्थगित किया गया था, लेकिन यदि अब भी सुनवाई नहीं हुई तो यह संघर्ष प्रदेशव्यापी जन आंदोलन का रूप ले लेगा।"

आंदोलन की चेतावनी

संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन द्वारा जल्द ही संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई, तो आगामी दिनों में राजस्थान भर में पत्रकार सड़कों पर उतरेंगे। पूर्व में दिए गए आश्वासनों पर खरा न उतरने से पत्रकारों का विश्वास डगमगाया है। जोधपुर इकाई के पदाधिकारियों ने जोर देकर कहा कि आजीविका पर चोट करना किसी भी लोकतांत्रिक सरकार में स्वीकार्य नहीं हो सकता।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर जिला अध्यक्ष प्रदीप जोशी के साथ वरिष्ठ पत्रकार एवं कार्यसमिति सदस्य रंजन दवे, उपाध्यक्ष लक्ष्मण मोतिवाल, समीर खान और लक्षित दवे सहित कई गणमान्य पत्रकार उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में मांग की कि पत्रकार की आजीविका पर बुलडोजर कार्रवाई करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय और विधिक कार्यवाही अमल में लाई जानी चाहिए।

लोकतंत्र के लिए संकट

स्वतंत्र पत्रकारिता पर इस तरह के हमलों को लेकर पूरे प्रदेश में बहस छिड़ी हुई है। जब एक वरिष्ठ पत्रकार को प्रशासनिक द्वेष का शिकार बनाकर उनकी आजीविका उजाड़ी जाती है, तो यह आम नागरिक के लिए एक भयावह संकेत है। पत्रकार की आजीविका पर बुलडोजर कार्रवाई ने उन सभी लोगों को एकजुट कर दिया है जो संविधान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में विश्वास रखते हैं।

अंत में, यह स्पष्ट है कि प्रशासन की ओर से की गई यह एकतरफा कार्रवाई अब भारी पड़ने वाली है। यदि समय रहते पीड़ित पत्रकार को न्याय नहीं मिला और उनकी आजीविका बहाल नहीं की गई, तो यह मामला आने वाले दिनों में बड़ी राजनीतिक और सामाजिक हलचल का कारण बनेगा। पत्रकार संगठन अब किसी भी हाल में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह रिपोर्ट पत्रकार संगठनों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन और उनके दावों पर आधारित है। विषय कानूनी प्रक्रिया और प्रशासनिक जांच का है, अतः लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी व्यक्तिगत या सरकारी कार्यवाही के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief