WA Join our WhatsApp Group
Advertisement Advertisement
View in Newspaper Form

पत्रकारिता पर प्रशासनिक प्रहार: लोकतंत्र का गला घोंटा गया

पत्रकारिता पर प्रशासनिक प्रहार से सहमा समाज, वरिष्ठ पत्रकार के व्यवसाय को मिटाने की साजिश के खिलाफ पत्रकारों ने छेड़ा बड़ा आंदोलन।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg मामले में ज्ञापन सौंपा

मामले में ज्ञापन सौंपा

जैसलमेर, राजस्थान (शिंभु सिंह शेखावत)। पत्रकारिता पर प्रशासनिक प्रहार की यह घटना देश भर में चर्चा का विषय बनी हुई है। इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ) के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र सिंह राठौड़ के मामले में प्रशासन की भूमिका ने लोकतांत्रिक मूल्यों पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। कोटपूतली-बहरोड़ के जिला अध्यक्ष लोकेश भारद्वाज के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव को ज्ञापन सौंपकर इस अन्याय के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यह केवल एक व्यक्ति की लड़ाई नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की आजादी को बचाने का संघर्ष है।

राठौड़ पिछले 22 वर्षों से जैसलमेर में सभी वैध अनुमति प्राप्त कर अपना रेस्टोरेंट संचालित कर रहे थे। पिछले साल नवंबर में पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर एक जनहित सुझाव देने के बाद से ही प्रशासनिक अधिकारियों ने उनके प्रति विद्वेषपूर्ण रवैया अपना लिया। बिना किसी लिखित आदेश के रेस्टोरेंट खाली करने का मौखिक फरमान जारी कर दिया गया, जो पूरी तरह से असंवैधानिक और मनमाना था। जब मामला कोर्ट पहुंचा, तो प्रशासन ने प्रतिशोध की भावना से और भी सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए।

प्रशासनिक निरंकुशता का सच

तत्कालीन जिला कलेक्टर की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए ज्ञापन में स्पष्ट उल्लेख है कि 18 फरवरी को रेस्टोरेंट बंद होने के बावजूद सारा सामान जबरन जब्त कर लिया गया। पत्रकारिता पर प्रशासनिक प्रहार का सबसे शर्मनाक चेहरा 17 मार्च की शाम सामने आया, जब तत्कालीन कलेक्टर ने अपने दफ्तर के संपदा अधिकारी के माध्यम से चोरी-छिपे दो जेसीबी मशीनें मंगवाकर रेस्टोरेंट की इमारत को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया। इसमें पत्रकार को लगभग सवा करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान हुआ।

इस दमनकारी और प्रतिशोधपूर्ण कार्रवाई को लेकर संगठन ने कहा:

"यह पूरा घटनाक्रम स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि यह कार्यवाही एक स्वतंत्र एवं निर्भीक पत्रकार की आवाज को दबाने एवं उन्हें आर्थिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के उद्देश्य से की गई है। यह लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सिद्धांतों के विपरीत है।"

न्याय के लिए लंबा संघर्ष

पत्रकार संगठनों द्वारा जयपुर में 19 दिनों तक चला शहीद स्मारक का धरना और उसके बाद गिरफ्तारी देने का प्रयास इस बात का सबूत है कि पत्रकार अपनी आजीविका और सम्मान के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। सरकार की ओर से मिले बार-बार के आश्वासनों ने केवल समय काटने का काम किया है, जिससे पत्रकारों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। अब केंद्रीय स्तर पर हस्तक्षेप की मांग ने इस मामले को नई दिशा दी है।

संगठन की मांग है कि पत्रकारिता पर प्रशासनिक प्रहार के लिए जिम्मेदार तत्कालीन कलेक्टर को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए। साथ ही, जब तक इस मामले की स्वतंत्र जांच नहीं हो जाती, तब तक सभी संबंधित कार्रवाईयों पर रोक लगे और पीड़ित पत्रकार को उनके आर्थिक नुकसान की भरपाई और आजीविका की पुनर्स्थापना सुनिश्चित की जाए। यह न्याय की एक अनिवार्य लड़ाई है।

लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा

आज राजस्थान के सभी जिलों के पत्रकार एक सुर में प्रशासनिक राजशाही के खिलाफ खड़े हैं। पत्रकारिता पर प्रशासनिक प्रहार जैसी घटनाओं ने यह संदेश दिया है कि सत्ता के गलियारों में बैठे अधिकारी यदि कानून को अपने हाथ में लेने लगें, तो समाज का हर वर्ग असुरक्षित है। यह मामला अब केंद्र सरकार की संवेदनशीलता की परीक्षा भी है कि क्या वे एक पीड़ित पत्रकार को न्याय दिला पाएंगे।

अंत में, प्रशासन को यह समझना होगा कि कलम की ताकत बुलडोजर से बड़ी होती है। यदि समय रहते दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो यह लोकतंत्र के लिए एक काला अध्याय साबित होगा। पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाए रखने के लिए दोषियों को सजा मिलना अत्यंत आवश्यक है, ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी ऐसी निरंकुशता न दोहरा सके।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह रिपोर्ट प्राप्त तथ्यों और ज्ञापनों के आधार पर तैयार की गई है। यह मामला प्रशासनिक जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। लेखक, प्रकाशक एवं संपादक इस रिपोर्ट में निहित दावों के लिए स्वयं जिम्मेदार नहीं हैं।

Rex TV Verification Metrics
Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief