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सरकारी आवास पर रार: पटना की सियासत में बंगले को लेकर छिड़ी जंग

सरकारी आवास पर रार ने बिहार की सियासत गर्मा दी है। राबड़ी देवी ने बंगला खाली करने से इनकार कर दिया है, जिससे सरकार के साथ तनाव बढ़ गया है।

By अजय त्यागी
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सरकारी आवास पर रार

(पटना, बिहार)। सरकारी आवास पर रार ने बिहार की राजनीतिक फिजाओं में भारी तनाव पैदा कर दिया है। प्रशासनिक अमले की हलचल और सचिवालय एसडीपीओ की उपस्थिति ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के बंगले पर स्थिति को बेहद गंभीर बना दिया है। भवन निर्माण विभाग द्वारा जारी कानूनी नोटिसों को पूरी तरह दरकिनार करते हुए राबड़ी देवी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वे इस सरकारी आवास को छोड़ने की किसी भी जल्दबाजी में नहीं हैं। यह घटनाक्रम केवल एक बंगले का सवाल नहीं, बल्कि सत्ता और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव का नया केंद्र बन चुका है।

प्रशासनिक टीम ने जब आवास के भीतर जाकर राबड़ी देवी को नोटिसों की गंभीरता से अवगत कराना चाहा, तो प्रतिक्रिया अत्यंत सख्त रही। विभागीय सूत्रों के अनुसार, दो बार के आधिकारिक नोटिसों के बाद अब प्रशासन के पास कानूनी प्रक्रिया के तहत बेदखली की कार्रवाई करने का विकल्प शेष है। जिस तरह से यह मामला एक सियासी अखाड़े में तब्दील हो चुका है, उससे स्पष्ट है कि बिहार सरकार और लालू परिवार के बीच की यह तल्खी आने वाले दिनों में और भी विकराल रूप ले सकती है।[1]

सरकार को खुली चुनौती

अपने पोते के जन्मदिन का उत्सव मनाकर लौटीं राबड़ी देवी के तेवर पूरी तरह बागी थे। उन्होंने स्पष्ट रूप से राज्य सरकार और उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को सीधी चुनौती दी है।

"सम्राट चौधरी जितना भी फोर्स बुलाकर मकान खाली करवाना चाहें, मैं मकान नहीं खाली करूंगी। हम किसी भी कीमत पर अपना आवास खाली नहीं करेंगे।"

उनके इस बयान ने सत्तारूढ़ गठबंधन की बेचैनी बढ़ा दी है। जिस बंगले को लेकर सरकारी आवास पर रार छिड़ी है, उसे बीजेपी कोटे के मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित किया जा चुका है, लेकिन लालू परिवार की जिद ने इस प्रशासनिक निर्णय को एक बड़ी सियासी जंग का रूप दे दिया है।

कानून बनाम जिद

बीजेपी और जेडीयू के नेताओं के तीखे हमलों ने इस विवाद को एक अलग ही धार दे दी है। बीजेपी प्रवक्ता नीरज कुमार ने व्यंग्य करते हुए कहा कि आखिर इस बंगले में कौन सा खजाना छिपा है जिसे छोड़ने के लिए परिवार कतई तैयार नहीं है।

"राबड़ी देवी जी, यह कोई जंगलराज नहीं है, यहां कानून का पालन करना ही होगा। इलाज के लिए सिंगापुर और बर्थडे के लिए दिल्ली जाने वाले परिवार को बिहार में कानून का सम्मान करना ही होगा। अगर कोई खजाना छिपा भी होगा, तो बिहार की पुलिस उसे खोज निकालेगी।"

वहीं, डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी ने इसे महज नियम-कानून का विषय बताया है। हालांकि, सत्ता गलियारों में चर्चा यह है कि क्या सरकार वास्तव में पुलिस बल का प्रयोग कर सरकारी आवास पर रार को खत्म करने का साहस दिखाएगी या यह मामला लंबी कानूनी प्रक्रिया में फंस जाएगा।

सियासी भविष्य की आहट

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब राबड़ी देवी को पहले ही '39 हार्डिंग रोड' पर सुसज्जित सरकारी आवास आवंटित किया जा चुका है। इसके बावजूद '10 सर्कुलर रोड' के प्रति यह मोह राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। कानून के जानकारों का मानना है कि सत्ता के गलियारे में इस तरह का टकराव पूर्व मुख्यमंत्री के कद के हिसाब से उचित नहीं है, लेकिन राजनीति में जब मर्यादाएं दांव पर हों, तो कानून की किताब केवल एक कागज़ का टुकड़ा बनकर रह जाती है।

सरकारी आवास पर रार अब उस मोड़ पर है जहां से सरकार की साख और विपक्ष के वर्चस्व की लड़ाई शुरू होती है। क्या प्रशासन अपने ही आवंटन को लागू करवा पाएगा या लालू परिवार का बागी रुख भारी पड़ेगा, यह आने वाले कुछ दिन स्पष्ट कर देंगे। फिलहाल बिहार की जनता इस हाई-प्रोफाइल ड्रामे को बड़ी उत्सुकता के साथ देख रही है कि बंगले की चाबियां अंततः किसके हाथ में रहती हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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