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अमेरिका ईरान सैन्य तनाव: फिर भड़की जंग की आग, सेना ने लिया एक्शन

अमेरिका ईरान सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी सेना ने मालवाहक जहाज पर दागी मिसाइल, नाकेबंदी तोड़ने के चलते इंजन रूम को बनाया निशाना।

By अजय त्यागी
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advertisement13Aug2026%20copy.jpg ओमान की खाड़ी

ओमान की खाड़ी

(वाशिंगटन, अमेरिका)। अमेरिका ईरान सैन्य तनाव का एक नया और विस्फोटक अध्याय ओमान की खाड़ी में तब लिखा गया जब अमेरिकी सेना ने एक मालवाहक जहाज पर हेलफायर मिसाइल से हमला कर दिया। गांबिया के झंडे वाला यह जहाज 'लियान स्टार' कथित तौर पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को चुनौती देते हुए ईरानी बंदरगाह की ओर बढ़ रहा था। इस कार्रवाई ने पहले से ही नाजुक दौर से गुजर रहे संघर्षविराम की धज्जियां उड़ा दी हैं और वैश्विक शक्तियों के बीच एक बार फिर युद्ध की आहट सुनाई देने लगी है।

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की ताजा चेतावनी से साफ है कि कूटनीति का मुखौटा धीरे-धीरे उतर रहा है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि यदि बातचीत का दौर विफल रहा, तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प ही अंतिम सत्य होगा। यह सैन्य कार्रवाई केवल एक जहाज को रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ईरान को एक कड़ा और सीधा संदेश है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अमेरिकी प्रभुत्व को चुनौती देना उसे भारी पड़ सकता है।[1]

मिसाइल से ठप हुआ इंजन

सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, इस जहाज को रात भर में 20 से अधिक बार चेतावनी दी गई, लेकिन जहाज ने कान पर जूं तक नहीं रेंगी। अंततः अमेरिकी बलों ने हेलफायर मिसाइल का उपयोग कर जहाज के इंजन रूम को मलबे में बदल दिया, जिससे उसकी गति पूरी तरह रुक गई। यह तकनीक का वह क्रूर प्रदर्शन है जो बताता है कि जब महाशक्तियां अपना धैर्य खोती हैं, तो कूटनीति के पन्ने जलने में वक्त नहीं लगता।

जहाज फिलहाल ओमान की खाड़ी में असहाय स्थिति में है। अमेरिकी सेना ने उस पर चढ़ने का साहस नहीं दिखाया, जो यह दर्शाता है कि यह हमला सिर्फ उसे रोकने के लिए था, न कि किसी बड़े कब्जे के लिए। हालांकि, यह घटना साबित करती है कि होर्मुज जलडमरूमध्य का क्षेत्र अब एक बार फिर बारूद के ढेर पर खड़ा है, जहाँ एक छोटी सी चूक बड़ी तबाही का कारण बन सकती है।

नाकेबंदी का खेल

यह छठा जहाज है जिसे अप्रैल में शुरू हुई अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के तहत निशाना बनाया गया है। अब तक 116 से अधिक जहाजों को अपना रास्ता बदलने पर मजबूर किया जा चुका है। अमेरिका का यह दावा कि वह समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है, दुनिया के अन्य देशों के लिए एक परोक्ष कटाक्ष की तरह है—कि जो रास्ता अमेरिका तय करेगा, उसी से व्यापार करना होगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में हुई उच्चस्तरीय बैठक ने इस तनाव को और भी अधिक गहरा बना दिया है। क्या संघर्षविराम को 60 दिनों का विस्तार मिलेगा, या ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर वार्ता की मेज पर फिर से युद्ध की तलवार लटकेगी? ईरान का अब तक का रुख किसी भी अंतिम समझौते पर मौन है, जो इस अनिश्चितता को और अधिक खतरनाक बनाता है।

कूटनीति की विफलता

अमेरिका ईरान सैन्य तनाव की यह ताजा मिसाल इस बात का प्रमाण है कि संघर्षविराम महज एक कागजी समझौता बनकर रह गया है। 28 फरवरी के हमलों के बाद से जिस तरह से समुद्री यातायात को बाधित किया गया है, उसने वैश्विक व्यापार की रीढ़ को हिला दिया है। जब कूटनीति का स्थान हेलफायर मिसाइलें ले लें, तो यह समझ लेना चाहिए कि बातचीत के दरवाजे बंद होने की कगार पर हैं।

सैन्य कार्रवाई और कूटनीति के बीच झूलती इस स्थिति में किसका पलड़ा भारी रहेगा, यह कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना तय है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका की यह दादागिरी ईरान के लिए एक परीक्षा की घड़ी है। अमेरिका ईरान सैन्य तनाव अब उस स्तर पर है जहां से युद्ध और शांति के बीच का अंतर केवल एक मिसाइल की दूरी पर सिमट गया है।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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