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टेक्नोलॉजी

ब्लू ओरिजिन रॉकेट धमाका: लांचपैड पर परमाणु बम की तरह फटा रॉकेट

ब्लू ओरिजिन रॉकेट धमाका: लांचपैड पर परमाणु बम की तरह फटा रॉकेट, जेफ बेजोस की कंपनी के शक्तिशाली 'न्यू ग्लेन' रॉकेट का टेस्ट हुआ विफल।

By अजय त्यागी
1 min read
लांचपैड पर परमाणु बम की तरह फटा रॉकेट

लांचपैड पर परमाणु बम की तरह फटा रॉकेट

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(केप कैनावेरल, अमेरिका)। ब्लू ओरिजिन रॉकेट धमाका की घटना ने अंतरिक्ष जगत को झकझोर कर रख दिया है। अरबपति जेफ बेजोस की कंपनी का शक्तिशाली रॉकेट ‘न्यू ग्लेन’ टेस्ट के दौरान किसी परमाणु बम की तरह फट गया। फ्लोरिडा के केप कैनावेरल लॉन्च साइट पर हुए इस हादसे के वीडियो अब सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहे हैं। इन दृश्यों में साफ देखा जा सकता है कि रॉकेट के निचले हिस्से से पहले धुआं निकला और फिर एक विशाल आग के गोले ने पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया।[1]

यह घटना साबित करती है कि अंतरिक्ष के रोमांच के पीछे छिपे जोखिम कितने भयावह हो सकते हैं। जब अरबों डॉलर की तकनीक पल भर में राख हो जाए, तो सवाल खड़े होने लाजिमी हैं। क्या निजी कंपनियां जल्दबाजी में सुरक्षा मानकों के साथ समझौता कर रही हैं? यह हादसा न केवल ब्लू ओरिजिन के लिए एक बड़ा तकनीकी झटका है, बल्कि यह उस पूरे 'स्पेस रेस' के गुब्बारे की हवा निकालने के लिए काफी है, जो केवल अमीरों के शौक पर टिकी है।

टेस्ट का भयानक अंत

कंपनी के आधिकारिक बयान के अनुसार, यह घटना रॉकेट के ‘हॉटफायर टेस्ट’ के दौरान हुई, जिसका मकसद लॉन्च से पहले इंजन की क्षमता जांचना था। तकनीकी भाषा में इसे 'एनोमली' (असंगति) कहा जा रहा है, लेकिन हकीकत में यह एक पूर्ण विफलता थी। गनीमत रही कि इस दौरान कोई कर्मचारी हताहत नहीं हुआ, वरना यह हादसा केवल वित्तीय नुकसान तक सीमित नहीं रहता।

जेफ बेजोस ने अपने अधिकारिक एक्स (ट्विटर) हैंडल पर कहा: 

"यह एक कठिन दिन है, लेकिन टीम इस समस्या की जड़ तक पहुंचने के लिए काम कर रही है। हम हार मानने वाले नहीं हैं और जो नुकसान हुआ है, उसे दोबारा खड़ा करके फिर से उड़ान भरी जाएगी।"

जेफ बेजोस का यह बयान एक कॉर्पोरेट औपचारिकता जैसा लग रहा है। जब तकनीक फेल होती है, तो कंपनी के फाउंडर का यह 'हौसला' क्या जमीनी स्तर पर हुई सुरक्षा चूक को ढंक पाएगा?

प्रतिद्वंद्विता और सम्मान

दिलचस्प बात यह है कि स्पेसएक्स के फाउंडर एलन मस्क ने भी इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी। मस्क ने इसे "बहुत दुर्भाग्यपूर्ण" करार दिया। प्रतिस्पर्धी होने के बावजूद, मस्क की यह टिप्पणी दिखाती है कि अंतरिक्ष की दुनिया में हर धमाका कहीं न कहीं एक-दूसरे को सतर्क करने का काम भी करता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या मस्क का यह 'सम्मान' अगले ही क्षण उनकी कंपनी के लिए एक अवसर में बदल जाएगा।

नासा भी अब इस ब्लू ओरिजिन रॉकेट धमाका के बाद अलर्ट मोड में आ गई है। अधिकारियों का मानना है कि मिशन चाहे कितना भी जटिल क्यों न हो, छोटी सी तकनीकी चूक की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। जांच के बाद यह तय किया जाएगा कि आगे की उड़ानों पर इसका कितना असर पड़ेगा और क्या यह कंपनी दोबारा भरोसे के लायक है।

सोशल मीडिया पर तंज

वायरल होते ही लोगों ने सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकालनी शुरू कर दी। एक यूजर ने इसे "स्पेस टेक्नोलॉजी का फायरवर्क शो" बताया, तो वहीं किसी ने बेजोस की कंपनी पर निशाना साधते हुए कहा कि "पैसों से तकनीक नहीं खरीदी जा सकती।" यह ब्लू ओरिजिन रॉकेट धमाका जनमानस में अंतरिक्ष परियोजनाओं को लेकर एक अविश्वास पैदा कर रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या यह सब मानवता की सेवा के लिए है या केवल अरबपतियों के अहंकार की तुष्टि?

ब्लू ओरिजिन रॉकेट धमाका की जांच तो होगी, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि अंतरिक्ष का सफर अब तक केवल प्रयोगों और धमाकों तक ही सीमित होकर रह गया है। क्या ये कंपनियां कभी वास्तव में भरोसेमंद साबित होंगी, या हम बस इसी तरह धमाकों को देखने और 'फेलियर ही सक्सेस की पहली सीढ़ी है' जैसे नारों के साथ आगे बढ़ते रहेंगे? इस बार का धमाका केवल रॉकेट का नहीं, बल्कि कंपनी के उन दावों का भी था जो वे लंबे समय से कर रहे थे।

अस्वीकरण

यह रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। अंतरिक्ष मिशन अत्यधिक जोखिम वाले होते हैं और इसमें वित्तीय हानि की पूर्ण संभावना रहती है। लेखक, प्रकाशक एवं संपादक इस विषय में किसी भी प्रकार के व्यावसायिक निवेश या तकनीकी दावों की पुष्टि नहीं करते हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief