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मुंबई कफ परेड आग: रिहायशी इमारत में भड़की भीषण लपटें मचा हड़कंप

मुंबई कफ परेड आग की घटना ने पॉश इलाके की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए, एसी की वायरिंग से भड़की लपटों ने मचाया हड़कंप, दमकल ने पाया काबू।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg मुंबई कफ परेड आग की घटना

मुंबई कफ परेड आग की घटना

(मुंबई, महाराष्ट्र)। मुंबई कफ परेड आग की घटना ने पॉश इलाके में रहने वाले लोगों की नींद उड़ा दी है। कुंवर मेंशन की पहली मंजिल पर अचानक भड़की आग ने वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मचा दी। गनीमत रही कि दमकल विभाग की मुस्तैदी से यह घटना एक बड़ी त्रासदी में तब्दील होने से बच गई। इस घटना ने एक बार फिर महानगर की ऊंची इमारतों में सुरक्षा मानकों की पोल खोल कर रख दी है।

जब आलीशान इमारतों में रहने वाले लोग खुद को सुरक्षित मानते हैं, तब ऐसी घटनाएं आईना दिखाती हैं कि तकनीक और लापरवाही के बीच की दूरी कितनी कम है। कफ परेड जैसे वीआईपी इलाके में आग लगना इस बात का संकेत है कि चाहे आप कितने भी प्रीमियम पते पर क्यों न रह रहे हों, अनदेखी किसी भी वक्त मौत का बुलावा बन सकती है।[1]

एसी की वायरिंग का खेल

प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि आग का कारण पहली मंजिल पर लगे एयर कंडीशनर की शॉर्ट सर्किट वाली वायरिंग थी। एक छोटे से तकनीकी दोष ने पूरे मेंशन को धुएं के गुबार में बदल दिया। लोग अपनी जान बचाने के लिए बाहर की ओर भागे, जिससे वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। क्या मुंबई की ऊंची इमारतों में एसी की नियमित जांच का कोई तंत्र नहीं है?

"दमकल विभाग ने तुरंत मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पा लिया, जिससे यह आग अन्य मंजिलों तक नहीं फैल सकी और कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।"

यह सरकारी बयान राहत तो देता है, लेकिन यह सवाल अनुत्तरित है कि आखिर कब तक हम 'बड़ी दुर्घटना टलने' का इंतजार करते रहेंगे। जब तक आग लगती है, तब तक प्रशासन सक्रिय होता है; लेकिन रोकथाम के नाम पर अक्सर चुप्पी ही हाथ लगती है।

सुरक्षा मानकों पर सवाल

मुंबई कफ परेड आग के बाद स्थानीय प्रशासन और मेंशन के प्रबंधन पर भी सवाल उठना लाजिमी है। क्या फायर ऑडिट केवल फाइलों तक सीमित है? जिस तरह से बिजली के तारों से चिंगारी उठी, वह दर्शाता है कि पुरानी हो चुकी वायरिंग या रखरखाव में कोताही महानगर की इमारतों के लिए एक धीमा जहर बनी हुई है। आलीशान फ्लैट्स में रहने के लिए भारी भरकम मेंटेनेंस देने वाले लोग क्या इसी 'दमघोंटू' सुरक्षा के लिए भुगतान करते हैं?

दमकल विभाग की टीम ने तेजी दिखाई, यह सराहनीय है। लेकिन यह 'तेजी' केवल आपदा प्रबंधन तक क्यों सीमित है? आपदा आने से पहले रोकने की जवाबदेही किसकी है? मुंबई कफ परेड आग की यह घटना केवल एक शॉर्ट सर्किट का मामला नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर चेतावनी है। यदि समय रहते इमारतों की वायरिंग और फायर फाइटिंग सिस्टम का ऑडिट नहीं हुआ, तो आने वाला समय इससे भी भयावह हो सकता है।

व्यवस्था की लापरवाही

मुंबई कफ परेड आग ने एक बार फिर दिखाया कि मुंबई की चमक-धमक के नीचे सुरक्षा का ढांचा कितना कच्चा है। कुंवर मेंशन में रहने वाले परिवारों के लिए यह अनुभव बेहद डरावना रहा। यदि आग रात के सन्नाटे में लगी होती, तो परिणाम क्या होता? केवल किस्मत के भरोसे चल रही सुरक्षा व्यवस्था पर निर्भर रहना कब बंद होगा, यह बड़ा प्रश्न है।

प्रशासन अब इस मामले में लीपा-पोती में जुट जाएगा, लेकिन कफ परेड के निवासियों का डर अभी खत्म नहीं हुआ है। मुंबई कफ परेड आग ने दिखा दिया है कि महानगर की गगनचुंबी इमारतों की नींव सुरक्षा के दावों पर नहीं, बल्कि केवल भाग्य पर टिकी है। क्या इस बार कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे या अगली 'शॉर्ट सर्किट' का इंतजार किया जाएगा?

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief