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वाणिज्यिक गैस सिलेंडर मूल्य वृद्धि: आम आदमी के बजट पर बढ़ेगा दबाव

वाणिज्यिक गैस सिलेंडर मूल्य वृद्धि ने होटल और रेस्टोरेंट का खर्च बढ़ा दिया है। 19 किलो वाले सिलेंडर की नई कीमतें आम ग्राहकों की जेब पर असर डालेंगी।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

वाणिज्यिक गैस सिलेंडर मूल्य वृद्धि के ताजा फरमान ने एक बार फिर व्यापारिक जगत की कमर तोड़ने का काम किया है। कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में 42 रुपये की अप्रत्याशित बढ़त ने उन छोटे और बड़े उद्यमियों को गहरे संकट में डाल दिया है, जो पहले ही महंगाई की मार झेल रहे थे। यह वृद्धि सीधे तौर पर आम आदमी की थाली तक पहुँचने वाली है, क्योंकि होटल और रेस्टोरेंट संचालकों के पास कीमतों में बढ़ोतरी के अलावा अब कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।[1]

सरकारी आंकड़ों और तेल कंपनियों की इस 'अचानक' आई दरियादिली का शिकार अंततः आम नागरिक ही होता है। हालांकि, राहत की बात यह बताई जा रही है कि घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के दाम अभी स्थिर हैं, लेकिन यह स्थिरता कब तक बनी रहेगी, यह बड़ा सवाल है। बाजार की इस उठापटक ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि महंगाई का चक्र कभी भी किसी भी स्तर पर चोट कर सकता है।

कीमतों में अचानक भारी उछाल

19 किलो वाले वाणिज्यिक गैस सिलेंडर की कीमत में 42 रुपये का इजाफा होने से दिल्ली जैसे महानगरों में अब इसकी नई दर 3,113.50 रुपये प्रति सिलेंडर हो गई है। पहले यह कीमत 3,071.50 रुपये थी। यह कोई मामूली बढ़ोतरी नहीं है, बल्कि उन छोटे व्यवसायियों के लिए एक तगड़ा झटका है जो पिछले लंबे समय से आर्थिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहे हैं।

इस वाणिज्यिक गैस सिलेंडर मूल्य वृद्धि का असर केवल गैस की बोतल तक सीमित नहीं रहेगा। जब भी गैस की कीमतें बढ़ती हैं, तो बाहर के खाने का स्वाद महंगा होना तय है। सरकारी तंत्र की इस नीति के पीछे क्या तर्क है, यह आम जनता के समझ से परे है, क्योंकि हर बार आमदनी बढ़ने के दावों के बीच खर्चों की लिस्ट लंबी होती जा रही है।

घरेलू गैस की ठहरी हुई चाल

दूसरी ओर, 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत अभी भी 913 रुपये पर स्थिर बनी हुई है। जानकारों का मानना है कि वाणिज्यिक गैस सिलेंडर मूल्य वृद्धि को अंजाम देकर एक तरफ तो राजस्व जुटाने का काम किया गया, और दूसरी तरफ घरेलू रसोई गैस के दाम न बढ़ाकर जनता को 'राहत' का आभास कराने की कोशिश की गई है।

"कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ाने के पीछे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाएं मुख्य कारण रही हैं, जिसका बोझ अब सीधे उपभोक्ताओं पर स्थानांतरित किया जा रहा है।"

भले ही सरकार इसे बाजार के नियमों का हिस्सा बताए, लेकिन वास्तविकता यह है कि आर्थिक नीतियां अक्सर कागजों पर तो संतुलित दिखती हैं, मगर जमीन पर इनका असर हमेशा एक वर्ग विशेष की जेब खाली करने वाला ही होता है। यह परोक्ष रूप से जनता पर बढ़ाया गया वह बोझ है, जिसे सीधे शब्दों में कह पाना शायद सत्ता के गलियारों के लिए सुविधाजनक नहीं है।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief