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ठंडी छाछ वितरण कार्यक्रम का आयोजन: प्यास बुझाने का अनूठा जज्बा

ठंडी छाछ वितरण कार्यक्रम का आयोजन भीषण गर्मी और नौतपा के दौर में आमजन के लिए संजीवनी साबित हुआ है, जिसने सामाजिक सेवा की नई नजीर पेश की है।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। ठंडी छाछ वितरण कार्यक्रम का आयोजन एक ऐसी मानवीय संवेदना का प्रतीक है, जो मशीनी होती जा रही दुनिया में सुकून का अहसास कराती है। शहर की पुरानी धानमंडी स्थित प्राचीन बद्रीनारायण भगवान मंदिर ट्रस्ट द्वारा किया गया यह प्रयास उस समय सामने आया है जब सूरज की तपिश और नौतपा का प्रकोप जनजीवन को बेहाल कर रहा है। जब लोग घरों से बाहर निकलने में भी घबरा रहे हैं, तब इस ट्रस्ट ने राहगीरों के लिए शीतल छाछ की व्यवस्था कर यह साबित किया कि धर्म केवल मंदिरों की चौखट तक सीमित नहीं है, बल्कि वह मानव सेवा में भी निहित है।

भीषण धूप में जब गला सूख रहा हो, तो एक गिलास ठंडी छाछ किसी अमृत से कम नहीं होती। ट्रस्ट की यह पहल इस बात का प्रमाण है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो समाज के लिए कुछ भी कर गुजरना मुमकिन है। आयोजन के दौरान लोगों की भारी भीड़ इस बात की गवाह है कि समाज में आज भी ऐसे प्रयासों को कितना सम्मान दिया जाता है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या केवल धर्मार्थ संस्थाएं ही इस भीषण गर्मी में नागरिकों की सुध लेंगी, या प्रशासन की भी इस दिशा में कोई जवाबदेही बनती है?

धार्मिक आस्था और जनसेवा

ठंडी छाछ वितरण कार्यक्रम का आयोजन बद्रीनाथ भगवान की आराधना और विधिवत पूजा-अर्चना के बाद शुरू हुआ। धार्मिक मान्यताओं को सामाजिक सरोकारों से जोड़कर ट्रस्ट ने एक संतुलित उदाहरण पेश किया है। अशोक भदादा जैसे समाजसेवियों का सक्रिय सहयोग यह दर्शाता है कि जब कोई नेक काम शुरू होता है, तो लोग स्वतः ही उससे जुड़ने लगते हैं। लगभग 500 लोगों का इस आयोजन का लाभ उठाना इस बात को रेखांकित करता है कि संसाधनों की कमी से अधिक आवश्यकता सही दिशा में काम करने की है।

आज के समय में जब दान-धर्म के नाम पर दिखावा अधिक होता है, वहां ठंडी छाछ वितरण कार्यक्रम का आयोजन जैसी सादगी भरी सेवाएं मन को छू लेती हैं। ट्रस्ट के अध्यक्ष ओम प्रकाश भदादा ने जो आभार जताया, वह उनके विनम्र स्वभाव का परिचय है। मगर हमें यह भी सोचना होगा कि गर्मी का यह सितम तो हर साल बढ़ता जा रहा है, क्या हम केवल ऐसे अल्पकालिक आयोजनों के भरोसे ही रहेंगे? प्रशासन और निकायों को भी चाहिए कि वे सार्वजनिक स्थलों पर शीतल जल और छाया की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करें।

सेवा भाव का महत्व

ठंडी छाछ वितरण कार्यक्रम का आयोजन ने एक बार फिर से इस तथ्य को पुष्ट किया है कि समाज सेवा में किसी बड़े पद या राजनीतिक रसूख की आवश्यकता नहीं होती। जरूरत होती है तो सिर्फ एक तड़प की, जो दूसरों की तकलीफ को समझ सके। इस भीषण तपन में बाजार से गुजरने वाले हर व्यक्ति को रोककर आदरपूर्वक छाछ पिलाना किसी भी व्यावसायिक सेवा से कहीं अधिक संतोषजनक है। यह कार्यक्रम उन लोगों के लिए भी एक सबक है जो संपन्न होने के बावजूद समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी से मुंह फेर लेते हैं।

नगर की व्यस्त सड़कों पर ऐसे आयोजन एक सकारात्मक संदेश फैलाते हैं। जब एक धार्मिक ट्रस्ट अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभा सकता है, तो फिर निजी कंपनियां और सक्षम लोग क्यों पीछे हट जाते हैं? ठंडी छाछ वितरण कार्यक्रम का आयोजन यह उम्मीद जगाता है कि अभी मानवता का दीप बुझा नहीं है। हालांकि, यह आयोजन अपनी जगह सराहनीय है, लेकिन निरंतरता और व्यापकता ही ऐसी सेवाओं को एक बड़ी सामाजिक क्रांति में बदल सकती है, जिसकी आज बहुत अधिक आवश्यकता है।

सामाजिक जिम्मेदारी का प्रश्न

ठंडी छाछ वितरण कार्यक्रम का आयोजन की आड़ में अगर हम उन सरकारी तंत्रों पर कटाक्ष न करें जो वातानुकूलित कमरों में बैठकर गर्मी से निपटने की फाइलें घुमाते हैं, तो यह विश्लेषण अधूरा होगा। गर्मी के इन दिनों में आम आदमी की जेब खाली हो जाती है और उसे पीने का ठंडा पानी तक मयस्सर नहीं होता। क्या शहर की संस्थाएं ही हमेशा जिम्मेदारी संभालेंगी? प्रशासन को चाहिए कि वह कम से कम मुख्य चौराहों पर ऐसी शीतल छाछ या जल वितरण की स्थायी व्यवस्था के लिए इन संस्थाओं को सहयोग प्रदान करे।

धार्मिक ट्रस्टों द्वारा इस तरह के लोक-कल्याणकारी कार्य करना उनकी उदारता है, लेकिन इसे एक 'सिस्टम' का हिस्सा बनाना होगा। ठंडी छाछ वितरण कार्यक्रम का आयोजन ने यह तो बता दिया कि भीलवाड़ा का समाज कितना उदार है, अब बारी उन अधिकारियों की है जो अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ने में माहिर हैं। सेवा भाव का यह सिलसिला केवल एक रविवार तक सीमित न रहकर पूरे गर्मी के मौसम तक चलना चाहिए, ताकि किसी भी राहगीर को प्यासा न रहना पड़े।

भविष्य की एक राह

ठंडी छाछ वितरण कार्यक्रम का आयोजन केवल प्यास बुझाने का जरिया नहीं, बल्कि सामाजिक जुड़ाव का एक माध्यम भी है। आने वाले समय में ट्रस्टों को चाहिए कि वे ऐसे और भी जनहितकारी कार्यों को विस्तार दें। शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में भी इस तरह की एकजुटता की सख्त आवश्यकता है। यदि समाज के तमाम प्रभावशाली लोग और संस्थाएं इसी तरह एक सुर में सेवा कार्य करें, तो शायद बहुत सी समस्याएं स्वयं ही हल हो जाएं।

अंततः, ठंडी छाछ वितरण कार्यक्रम का आयोजन के माध्यम से मिला वह सुकून और तृप्ति ही इस कार्यक्रम की असली सफलता है। जिन 500 लोगों ने इस शीतल पेय का लाभ उठाया, उनके मन में ट्रस्ट के प्रति जो सम्मान उत्पन्न हुआ है, वह किसी भी विज्ञापन से बड़ा है। भीलवाड़ा की इस धरती पर सेवा की यह जोत हमेशा जलती रहे, यही कामना है। एक संपादक के नाते मैं उम्मीद करता हूं कि भविष्य में ऐसी और भी पहलें देखने को मिलेंगी जो समाज को जोड़ेंगी और एक बेहतर व्यवस्था का निर्माण करेंगी।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief