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रक्तदान महादान प्रेरणा: 112वीं बार रक्तदान कर पेश की मिसाल

रक्तदान महादान प्रेरणा बनकर उभरे विक्रम दाधीच ने 112वीं बार रक्तदान किया। समाज सेवा की यह मिसाल युवाओं के लिए एक बड़ा संदेश है।

By अजय त्यागी
1 min read
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112वीं बार रक्तदान कर पेश की मिसाल

भीलवाड़ा, राजस्थान। रक्तदान महादान प्रेरणा के तौर पर जाने जाने वाले समाजसेवी विक्रम दाधीच ने नौतपा की भीषण गर्मी के बीच अपने 112वें रक्तदान के साथ एक अनूठी मिसाल पेश की है। 62 वर्षीय दाधीच पिछले 40 वर्षों से निरंतर मानव सेवा में जुटे हैं, जो उन लोगों के लिए एक करारा तमाचा है जो सोशल मीडिया की चकाचौंध में अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को भूल चुके हैं।

रक्तदान की यह प्रक्रिया केवल एक चिकित्सकीय कार्य नहीं, बल्कि एक जरूरतमंद को नया जीवन देने का संकल्प है। दाधीच का यह जज्बा साबित करता है कि यदि सेवा का भाव हो, तो उम्र केवल एक आंकड़ा मात्र रह जाती है। आज जब लोग छोटी-छोटी समस्याओं के लिए भी शोर मचाते हैं, तब दाधीच का यह मौन सेवा भाव समाज के लिए एक आईना है।

सेवा का जज्बा

रक्तदान महादान प्रेरणा के प्रतीक बन चुके विक्रम दाधीच का कहना है कि उन्हें यह सीख त्यागमूर्ति महर्षि दधीचि से मिली है। उनके लिए रक्तदान करना केवल रक्त देने तक सीमित नहीं, बल्कि यह एक जनजागरण अभियान है। रक्तदान के प्रति युवाओं को जागरूक करने का उनका प्रयास यह स्पष्ट करता है कि समाज सेवा का अर्थ दिखावा नहीं, बल्कि निरंतरता है।

"रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है, क्योंकि इससे किसी जरूरतमंद व्यक्ति को नया जीवन मिलता है। आज के युवाओं को सोशल मीडिया तक सीमित न रहकर सामाजिक सरोकारों से भी जुड़ना चाहिए।" - विक्रम दाधीच, समाजसेवी।

दाधीच का 112वां रक्तदान उन युवाओं के लिए एक बड़ा कटाक्ष है जो रक्तदान करने से डरते हैं या बहाने बनाते हैं। जब 62 वर्ष का व्यक्ति इस उम्र में रक्तदान कर सकता है, तो फिर स्वस्थ युवाओं की हिचकिचाहट क्या दर्शाती है? यह स्पष्ट है कि सेवा करने के लिए सिर्फ एक मजबूत इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है, न कि किसी बड़े पद या संसाधनों की।

एक नई उम्मीद

रक्तदान महादान प्रेरणा अभियान के जरिए दाधीच ने हजारों मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई है। रक्तदान शिविर में उपस्थित विशेषज्ञों और गणमान्यजनों ने उन्हें 'मानवता का सच्चा सिपाही' की उपाधि दी है। उनकी यह निरंतरता दिखाती है कि सेवा का फल सदैव सकारात्मक होता है, बशर्ते उसे स्वार्थ से दूर रखा जाए।

समाज में दाधीच जैसे लोगों की उपस्थिति यह बताती है कि अभी भी मानवता जीवित है, भले ही चारों ओर स्वार्थ का शोर कितना ही अधिक क्यों न हो। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या उनकी यह रक्तदान महादान प्रेरणा अन्य युवाओं को भी प्रेरित कर पाती है, या फिर यह भी केवल एक फोटो अवसर बनकर रह जाएगी।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief