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सांवरिया सेठ मंदिर महोत्सव: भव्य झांकी और भक्ति का अनोखा संगम

सांवरिया सेठ मंदिर महोत्सव में ठाकुर जी की जलक्रीड़ा ने भक्तों को मंत्रमुग्ध किया। दिव्य झांकी और महाआरती के साथ अलौकिक आयोजन संपन्न हुआ।

By अजय त्यागी
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advertisement13Aug2026%20copy.jpg सांवरिया सेठ मंदिर महोत्सव

सांवरिया सेठ मंदिर महोत्सव

भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। सांवरिया सेठ मंदिर महोत्सव के दौरान नौगांवा स्थित मंदिर परिसर भक्ति के ऐसे ज्वार में डूबा कि वहां मौजूद हर भक्त खुद को धन्य महसूस करने लगा। 'हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की' के नारों से गूंजते मंदिर प्रांगण में जब ठाकुर जी नौका विहार के लिए बाहर आए, तो ऐसा लगा मानो साक्षात प्रभु ने भक्तों के बीच आकर आशीर्वाद दिया हो। यह धार्मिक आयोजन केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था का वह महासागर था जहाँ हर कोई अपनी समस्याओं को भूलकर केवल प्रभु भक्ति में लीन दिखा।

जब ठाकुर जी को गर्भगृह से बाहर लाकर जलकुंड में नौका विहार कराया गया, तो उस विहंगम दृश्य को देखने के लिए भक्तों की लंबी कतारें उमड़ पड़ीं। आलम यह था कि श्रद्धालु उस पल को अपनी आंखों में बसाने के लिए लालायित दिखे। आज के दौर में जब लोग डिजिटल दुनिया में उलझे हुए हैं, सांवरिया सेठ मंदिर महोत्सव की यह अलौकिक छटा इस बात का प्रमाण है कि सनातन धर्म की जड़ें अभी भी कितनी गहरी और जीवंत हैं।

भक्ति का अद्भुत नजारा

सांवरिया सेठ मंदिर महोत्सव में सुमधुर भजनों की तान ऐसी छिड़ी कि पांडाल में उपस्थित महिला-पुरुष श्रद्धालु झूमने पर मजबूर हो गए। जाने-माने भजन गायकों ने सांवरिया जी की महिमा का बखान करते हुए पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। ऐसा लग रहा था मानो साक्षात प्रभु अपनी लीलाओं से भक्तों के दुख हर रहे हों। यह नजारा उन लोगों के लिए भी एक सीख है जो ईश्वर को सिर्फ पत्थर की मूर्ति तक सीमित मानते हैं।

राजनीति और प्रशासन के गलियारों में अक्सर व्यस्त रहने वाले चेहरे भी इस आयोजन में भक्ति में डूबे नजर आए। देवस्थान विभाग के अधिकारियों से लेकर शहर के दिग्गज उद्योगपतियों तक, सबने एक कतार में खड़े होकर प्रभु की विशेष आरती उतारी। यह दर्शाता है कि सत्ता और पद का अहंकार भी प्रभु की शरण में जाकर पिघल जाता है।

आयोजन की भव्य सफलता

सांवरिया सेठ मंदिर महोत्सव की सफलता का श्रेय मंदिर ट्रस्ट के उन पदाधिकारियों को जाता है जिन्होंने इसे भव्यता प्रदान की। डीपी अग्रवाल, गोविंद प्रसाद सोडाणी और कैलाश डाड सहित पूरी टीम ने व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद रखा। देर शाम छप्पन भोग और 700 किलो आमरस के प्रसाद वितरण के साथ जब इस महोत्सव का समापन हुआ, तो भक्तों के चेहरे पर एक अलग ही संतोष और सुकून दिखाई दे रहा था।

ट्रस्ट ने भीलवाड़ा वासियों के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि लोगों की अगाध श्रद्धा ही इस आयोजन की असली ताकत है। सांवरिया सेठ मंदिर महोत्सव न केवल एक धार्मिक कार्यक्रम बनकर रह गया, बल्कि इसने समाज को एकता और भाईचारे का संदेश भी दिया। राजनीति और सत्ता से दूर, यह आयोजन शुद्ध भक्ति का एक ऐसा उदाहरण है जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief