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नीट पेपर लीक मामला: भविष्य से खिलवाड़ करने वाले सलाखों के पीछे

नीट पेपर लीक मामला में सीबीआई ने तीन और आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा। परीक्षा की सुचिता पर फिर से खड़े हुए बड़े सवाल।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

नई दिल्ली। नीट पेपर लीक मामला ने एक बार फिर देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता को कटघरे में खड़ा कर दिया है। दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को इस मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों—एक फिजिक्स लेक्चरर, एक बाल रोग विशेषज्ञ और एक फिजिक्स ट्यूटर—को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। यह गिरफ्तारी केवल कुछ व्यक्तियों की नहीं, बल्कि उस दीमक की है जो मेधावी छात्रों के सपनों को चुन-चुन कर खा रही है।[1]

सीबीआई की विशेष अदालत ने मनीषा संजय हवलदार, डॉ. मनोज शिरूरे और तेजस हर्षदकुमार शाह को जेल भेजकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि कानून का शिकंजा अब कसने लगा है। हालांकि, सवाल यह है कि जब परीक्षा की व्यवस्था इतनी संवेदनशील होती है, तब इन 'भक्षक' शिक्षकों और विशेषज्ञों को सिस्टम में घुसने का मौका कैसे मिल जाता है? क्या हमारी सुरक्षा व्यवस्था इतनी कमजोर है कि जो भविष्य संवारने वाले हैं, वही भविष्य को बेचने का धंधा कर रहे हैं?

साजिशों का तंत्र

नीट पेपर लीक मामला की परतें खोलने पर जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। एजेंसी का आरोप है कि हवलदार ने पेपर सेटिंग के दौरान अनधिकृत रूप से नीट यूजी का प्रश्नपत्र हासिल किया और पैसों की एवज में उसे आगे वितरित किया। वहीं, डॉ. मनोज शिरूरे ने लतूर के कोचिंग संचालक शिवराज रघुनाथ मोटगांवकर के साथ मिलकर छात्रों को सीधे प्रश्नपत्र तक पहुंच मुहैया कराई। यह घटनाक्रम बताता है कि कैसे शिक्षा का मंदिर अब गिरोहों का अड्डा बनता जा रहा है।

"सीबीआई ने आरोप लगाया है कि हवलदार ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर साजिश रची और बिना किसी आधिकारिक अनुमति के नीट यूजी प्रश्नपत्र अपने पास रखा और उसे पैसे लेकर वितरित किया।" - नीट पेपर लीक मामला, अदालत में सीबीआई का पक्ष।

यह महज संयोग नहीं है कि पी.वी. कुलकर्णी जैसे लोग, जो खुद पेपर सेट करने की जिम्मेदारी रखते हैं, इस पूरे गंदे खेल के 'किंगपिन' बने बैठे थे। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो छात्रों का भरोसा किस पर टिकेगा? यह उन सरकारी संस्थाओं की नाकामी को दर्शाता है जो सुरक्षा के कड़े दावे तो करती हैं, लेकिन अंदर से खोखली साबित होती हैं।

भविष्य पर प्रश्न

नीट पेपर लीक मामला के कारण 3 मई को आयोजित हुई नीट यूजी परीक्षा को रद्द करना पड़ा और अब 21 जून को फिर से परीक्षा होनी है। एक बार फिर छात्रों को उन्हीं तनावपूर्ण स्थितियों से गुजरना पड़ेगा। क्या इस बार की परीक्षा पूरी तरह पारदर्शी होगी? या यह भी किसी और माफिया के निशाने पर है? जब तक इन सफेदपोश अपराधियों के पीछे की बड़ी राजनीतिक या प्रशासनिक मिलीभगत का खुलासा नहीं होगा, तब तक छात्र इसी तरह पिसते रहेंगे।

सीबीआई अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन क्या यह कार्रवाई जड़ तक पहुँचेगी? जिस तरह से कोचिंग सेंटरों के तार सीधे पेपर सेटर्स से जुड़े मिले हैं, वह इस पूरे तंत्र की जड़ें हिलाने के लिए पर्याप्त है। शिक्षा क्षेत्र में बढ़ता यह कैंसर अब लाइलाज हो रहा है, जहाँ मेधा को पैसों से तौला जा रहा है और ईमानदारी को नीलाम किया जा रहा है। 21 जून को होने वाली परीक्षा छात्रों के लिए एक अग्निपरीक्षा होगी, जो यह तय करेगी कि सिस्टम सुधरा है या केवल रंगरोगन किया गया है।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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