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राजस्थान

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो कार्रवाई: पटवारी रंगे हाथों गिरफ्तार

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो कार्रवाई में पाली जिले का पटवारी आठ हजार की रिश्वत लेते ट्रैप हुआ। सीमांकन के नाम पर वसूली का भंडाफोड़।

By अजय त्यागी
1 min read
रिश्वतखोर पटवारी रंगे हाथों गिरफ्तार

रिश्वतखोर पटवारी रंगे हाथों गिरफ्तार

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पाली, राजस्थान (शिंभू सिंह शेखावत)। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सरकारी दफ्तरों में व्याप्त भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं। सोमवार को पाली जिले के ग्राम लाटाड़ा में पटवारी विक्रम धीर को आठ हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोचा गया। यह कार्रवाई केवल एक पटवारी की गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि उस भ्रष्ट व्यवस्था पर एक जोरदार तमाचा है, जहाँ गरीब किसान अपनी जमीन के सीमांकन जैसे छोटे-छोटे कामों के लिए भी बाबूराज के आगे झुकने को मजबूर हैं।

एसीबी पाली प्रथम के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र डूकिया के कुशल निर्देशन में जाल बिछाया गया और शिकायत सही पाए जाने पर पटवारी विक्रम धीर को रिश्वत की राशि के साथ धर दबोचा गया। यह दृश्य उन तमाम भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक चेतावनी है, जो शायद अभी भी यह समझ रहे हैं कि वे सिस्टम की चकाचौंध में अपनी काली कमाई सुरक्षित रख सकते हैं। कार्रवाई के बाद क्षेत्र में मचा हड़कंप यह बताने के लिए काफी है कि जनता अब ऐसे घूसखोरों से किस कदर आजिज आ चुकी है।

सीमांकन की काली कमाई

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो कार्रवाई के दौरान यह बात सामने आई है कि रिश्वत की यह रकम सीमांकन के एवज में मांगी गई थी। सरकारी फाइलों पर अपनी कलम चलाने के लिए घूस मांगना अब एक चलन सा बन गया है। जब एक पटवारी को रंगे हाथों पकड़ा जाता है, तो सवाल यह उठता है कि क्या वह अकेला ही इस भ्रष्टाचार की गंगा में नहा रहा था, या फिर उसके ऊपर बैठे साहबों का भी इसमें कोई मौन समर्थन या हिस्सा रहा होगा?

"परिवादी की शिकायत पर सत्यापन के बाद एसीबी की टीम ने जाल बिछाया और पटवारी विक्रम धीर को आठ हजार रुपये की रिश्वत राशि लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया।" - एसीबी पाली प्रथम टीम।

आरोपी पटवारी अब एसीबी की हिरासत में है और उसके कार्यालय के दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है। कार्यालय के कागजातों में जो कालिख पोती गई है, उसका हिसाब अब एसीबी की टीम करेगी। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में जो सबसे कड़वा सच बाहर आया है, वह यह है कि आज भी एक आम आदमी को अपना हक पाने के लिए सरकारी दफ्तर की चौखट पर अपनी जेब ढीली करनी पड़ती है।

व्यवस्था की विफलता

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो कार्रवाई की यह सफलता प्रशासनिक तंत्र के भीतर पसरी विफलता को भी उजागर करती है। पटवारी जैसे जमीनी स्तर के पदों पर बैठे लोग जब जनता का शोषण करने लगते हैं, तो यह व्यवस्था के प्रति आम आदमी के भरोसे को पूरी तरह खत्म कर देता है। इस कार्रवाई के बाद पटवारी के कार्यालय की तलाशी और संबंधित दस्तावेजों की जांच यह संकेत देती है कि भ्रष्टाचार की यह पटकथा केवल आठ हजार तक सीमित नहीं हो सकती।

क्या यह गिरफ्तारियां केवल गिनती बढ़ाने के लिए हैं, या फिर सिस्टम को भीतर से साफ करने का कोई ठोस प्रयास भी होगा? जनता को अब इन गिरफ्तारियों से ज्यादा व्यवस्था में सुधार की अपेक्षा है। पटवारी विक्रम धीर पर हुई भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो कार्रवाई निश्चित रूप से उन लोगों के लिए एक सबक है, जो सरकारी नौकरी को सेवा का माध्यम नहीं, बल्कि लूट का साधन मानते हैं। उम्मीद है कि जांच की आंच उन सफेदपोशों तक भी पहुंचेगी जो पर्दे के पीछे से इस भ्रष्टाचार को प्रश्रय देते हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief