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लेबनान इजरायल संघर्ष विराम: कूटनीति के दांव या शांति का नया ढकोसला

लेबनान इजरायल संघर्ष विराम की घोषणा के बाद भी तनाव बरकरार। ईरान और अमेरिका के बीच खींचतान से फिर भड़क सकती है युद्ध की ज्वाला।

By अजय त्यागी
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युद्ध की विभीषिका का एक मंजर - File Photo

लेबनान इजरायल संघर्ष विराम की आड़ में क्या मध्य-पूर्व का यह महासंग्राम वास्तव में थमने की ओर है या यह केवल एक और रणनीतिक विराम है? लेबनान और इजरायल के बीच हुई इस आंशिक संधि ने दुनिया भर को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हजारों मौतों और चार वर्षों के कड़वे संघर्ष के बाद अब शांति के लिए कोई जगह बची है। वाशिंगटन की मध्यस्थता में बेरुत और उसके उपनगरों में इजरायली हमलों पर रोक और हिज्बुल्लाह की ओर से जवाबी हमलों को रोकने का दावा किया गया है, लेकिन हकीकत की जमीन पर अब भी बारूद की गंध बरकरार है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा इस समझौते की घोषणा ने कूटनीतिक गलियारों में हलचल तो मचाई है, लेकिन जमीन पर स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि दक्षिणी लेबनान में उनका सैन्य अभियान जारी रहेगा, जहाँ इजरायली सेना पिछले 25 वर्षों में अपनी सबसे गहरी घुसपैठ करते हुए जाहरानी नदी की ओर बढ़ रही है। यह विरोधाभास साफ दर्शाता है कि कागज पर लिखे समझौते और मैदान-ए-जंग की हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर है।[1]

कूटनीति की खामोश जंग

लेबनान इजरायल संघर्ष विराम के प्रयास केवल एक छलावा प्रतीत होते हैं क्योंकि ईरान का रवैया किसी भी शांति प्रक्रिया के लिए एक बड़ा रोड़ा बना हुआ है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची का स्पष्ट मानना है कि अमेरिका-ईरान के बीच का संघर्ष सभी मोर्चों पर व्याप्त है, और लेबनान में शांति तब तक संभव नहीं जब तक पूरे क्षेत्र में इजरायली हमलों पर पूरी तरह रोक न लग जाए। यह कूटनीतिक गतिरोध स्पष्ट करता है कि शांति की बातें करने वाले असली खिलाड़ी पर्दे के पीछे कुछ और ही खेल रहे हैं।

"इजरायल लेबनान में सैन्य अभियान जारी रखेगा, जहां जमीनी बल पिछले 25 वर्षों में सबसे गहरी घुसपैठ करते हुए जाहरानी नदी की ओर बढ़ रहे हैं।" - बेंजामिन नेतन्याहू, प्रधानमंत्री, इजरायल।

इधर, ट्रम्प ने इन शांति वार्ताओं को "बोरिंग" करार देकर जो बयान दिया है, वह उनकी अस्थिर नीति और अंतरराष्ट्रीय गंभीर विषयों के प्रति उनके दृष्टिकोण पर तीखे कटाक्ष के समान है। यह कहना कि उन्हें अब इन वार्ताओं की कोई परवाह नहीं, उस वैश्विक नेतृत्व की विफलता को उजागर करता है जो एक समय शांति का दूत बनने का दम भरता था।

अस्थिरता और भविष्य

लेबनान इजरायल संघर्ष विराम के बावजूद हॉर्मुज जलडमरूमध्य और बाब अल-मंडेब तक नाकाबंदी बढ़ाने की ईरान की धमकी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक चेतावनी है। दुनिया का एक-पांचवां तेल और गैस का प्रवाह पहले ही बाधित है, और यदि यह संघर्ष बढ़ा, तो आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला बोझ और बढ़ जाएगा। तेल की कीमतों में 4% का उछाल यह साबित करने के लिए काफी है कि बाजारों को ट्रम्प के बयानों से ज्यादा युद्ध की वास्तविकताओं पर भरोसा है।

हिज्बुल्लाह का यह कहना कि वे पूर्ण संघर्ष विराम के पक्ष में हैं, लेकिन इजरायली सैनिकों की वापसी की शर्त के साथ, इस पूरे मामले को एक दुष्चक्र में धकेल रहा है। लेबनान इजरायल संघर्ष विराम की यह कोशिशें फिलहाल महज एक औपचारिक दिखावा हैं, जो केवल तब तक टिकेंगी जब तक दोनों पक्ष अपनी सैन्य स्थिति को और मजबूत नहीं कर लेते। यदि यह शांति वार्ता विफल होती है, तो यह मध्य-पूर्व को उस अंधेरे की ओर ले जाएगी जहाँ से वापसी का रास्ता शायद ही कभी मिल पाए।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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