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अंतरराष्ट्रीय

चीन की कंपैनियन इकोनॉमी: भाड़े के दोस्तों से भरी दुनिया का सच

चीन की कंपैनियन इकोनॉमी विवादास्पद बाजार बनकर उभर रही है। भाड़े के साथियों की बढ़ती मांग और भावनाओं के व्यवसायीकरण का चौंकाने वाला सच।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

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बीजिंग, चीन। चीन की कंपैनियन इकोनॉमी एक ऐसा नया और विवादास्पद बाजार बनकर उभर रही है, जहाँ अब इंसानी रिश्ते और भावनात्मक जुड़ाव को भी पैसों में तौला जा रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ताई पर्वत जैसी दुर्गम चोटियों पर चढ़ने के लिए अब हाइकर्स 'क्लाइम्बिंग बडीज' यानी चढ़ाई करने वाले साथियों को बुक कर रहे हैं, जो न केवल उनका सामान ढोते हैं बल्कि फोटो खींचने और बातचीत करने जैसी 'इमोशनल वैल्यू' भी प्रदान करते हैं। क्या यह आधुनिक युग की जरूरत है या फिर मानवीय संवेदनाओं के पतन की पराकाष्ठा?

चीन के शहरी जीवन में आए बदलावों और युवाओं के बढ़ते अकेलेपन ने इस 50 बिलियन युआन (लगभग 7.4 बिलियन डॉलर) के बाजार को जन्म दिया है। जब युवाओं के पास पारंपरिक सामाजिक संबंध बनाने के लिए न समय है और न ही भावनात्मक ऊर्जा, तब 'भुगतान वाली दोस्ती' एक आसान विकल्प बन गई है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में लगभग 20 करोड़ 'लचीले श्रमिक' (flexible workers) हैं, जो इस गिग इकोनॉमी के माध्यम से अपना गुजारा कर रहे हैं। [1]

रिश्तों का बाजार भाव

चीन की कंपैनियन इकोनॉमी की जड़ें उस बढ़ती असुरक्षा में हैं जहाँ युवा पारंपरिक सामाजिक मेल-जोल को जोखिम भरा मानते हैं। मनोवैज्ञानिक सामी वोंग का तर्क है कि सशुल्क साथियों का आकर्षण इसलिए है क्योंकि यहाँ परिणाम निश्चित होता है। यहाँ आपको 'अस्वीकृति' का सामना नहीं करना पड़ता, क्योंकि जब आप भुगतान करते हैं, तो सामने वाला हमेशा 'हां' कहता है। यह नियंत्रण की भावना आधुनिक चीन के तनावपूर्ण शहरी जीवन में एक छद्म राहत की तरह है।

"जब आप इस सेवा के लिए भुगतान करते हैं, तो आपको हमेशा एक 'हां' मिलता है।" - सामी वोंग, प्रबंध निदेशक, 3ड्रिप्स साइकोलॉजी।

चेन वेनक्सिन जैसे उद्यमियों ने इस स्थिति का भरपूर फायदा उठाया है। माउंट ताई पर चढ़ने के लिए 800 युआन का शुल्क वसूलने वाली उनकी कंपनी का विस्तार 10 कर्मचारियों से बढ़कर 370 तक पहुंच चुका है। यह विकास दर्शाता है कि कैसे मानवीय एकाकीपन को एक बड़े व्यापारिक अवसर में बदला जा रहा है। क्या यह वास्तव में 'इमोशनल वैल्यू' है, या केवल एक कड़वा व्यावसायिक समझौता?

बेरोजगारी और भावनात्मक व्यापार

चीन की कंपैनियन इकोनॉमी में युवाओं की बड़ी भागीदारी का सीधा संबंध चीन की दीर्घकालिक युवा बेरोजगारी से भी जुड़ा है। 24 वर्षीय तांग जुन्क्सिंग जैसे छात्र, जो प्रति माह 3,000 से 5,000 युआन कमा रहे हैं, इस बात का प्रमाण हैं कि जब बाजार में स्थिर नौकरियां नहीं होतीं, तो युवा अपनी भावनाओं और समय को किराए पर बेचने को मजबूर हो जाते हैं। तांग के अनुसार, उनकी अधिकांश क्लाइंट महिलाएं हैं जिन्हें 'इमोशनल वैल्यू' की तलाश है।

"मुझे अहसास हुआ कि आप लोगों के साथ यात्रा करके और उनके लिए गाड़ी चलाकर वास्तव में पैसे कमा सकते हैं।" - तांग जुन्क्सिंग, ट्रैवल कंपैनियन।

क्या चीन का समाज अब उस दिशा में बढ़ चला है जहाँ हम एक 'प्रीमियम' दोस्ती के लिए भुगतान करने को तैयार हैं? यह प्रवृत्ति न केवल चीन की बदलती जीवनशैली को दर्शाती है, बल्कि उन खोखले सामाजिक ढांचों पर भी कटाक्ष करती है जहाँ इंसान को इंसान की कंपनी से ज्यादा एक 'सेवा' की आवश्यकता महसूस होने लगी है। चीन की कंपैनियन इकोनॉमी न केवल एक नया व्यापार है, बल्कि उस गहरे खालीपन का प्रतिबिंब है जिसे पैसा भरने की नाकाम कोशिश कर रहा है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी सामान्य सूचना के लिए है और इसे किसी भी मनोवैज्ञानिक या सामाजिक परामर्श के रूप में न देखा जाए। इसके आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं। 

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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