WA Join our WhatsApp Group
Advertisement Advertisement
अंतरराष्ट्रीय

अमेरिका में अवैध भारतीय ट्रक ड्राइवर: डिपोर्टेशन की कगार पर सैकड़ों लोग

अमेरिका में अवैध भारतीय ट्रक ड्राइवर गिरफ्तार। ऑपरेशन चेक-मेट के तहत 30 भारतीयों पर डिपोर्टेशन की तलवार, फर्जी दस्तावेजों का खुलासा।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

Thanks to all the readers for their 3+ Years of dedication and trust

न्यूयॉर्क, अमेरिका। अमेरिका में अवैध भारतीय ट्रक ड्राइवर के रूप में काम कर रहे करीब 30 लोगों की गिरफ्तारी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) की रिपोर्ट के अनुसार, 11 से 15 मई के बीच एरिज़ोना के यूमा सेक्टर में 'ऑपरेशन चेक-मेट' के दौरान कुल 52 लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिनमें से 36 सेमी-ट्रक चलाते हुए पकड़े गए। इन 36 चालकों में से 30 भारतीय नागरिक हैं, जो लंबे समय से अवैध तरीके से अमेरिकी सड़कों पर माल ढो रहे थे।[1]

यह मामला महज एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उस गहरी धांधली की बानगी है जो अमेरिकी रोजगार प्रणाली में घुसपैठ कर चुकी है। पकड़े गए इन ड्राइवरों के पास कैलिफोर्निया, न्यूयॉर्क, वाशिंगटन और वर्जीनिया जैसे राज्यों के कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस थे, जबकि कुछ के पास कोई वैध दस्तावेज नहीं था। अधिकांश ने बिडेन प्रशासन के दौरान मिले रोजगार प्राधिकरण दस्तावेजों (EAD) का उपयोग किया, जो अब पूरी तरह अवैध घोषित किए जा चुके हैं।

सुरक्षा पर बड़ा सवाल

अमेरिका में अवैध भारतीय ट्रक ड्राइवर का यह मुद्दा सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। यूमा सेक्टर के एक्टिंग चीफ पेट्रोल एजेंट डस्टिन कॉडल ने स्पष्ट किया है कि 'ऑपरेशन चेक-मेट' का उद्देश्य उन अवैध ड्राइवरों को पकड़ना है जो सड़कों पर घातक दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। बीते कुछ महीनों में भारतीय मूल के ट्रक ड्राइवरों द्वारा भीषण सड़क हादसों के कई मामले सामने आए हैं, जिसने अमेरिकी प्रशासन को सड़कों पर सख्ती करने के लिए मजबूर कर दिया है।

"ऑपरेशन चेक-मेट उन लोगों से समुदायों और सड़कों की सुरक्षा के लिए हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है जो अवैध रूप से मौजूद हैं और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए बड़ा जोखिम पैदा करते हैं।" - डस्टिन कॉडल, एक्टिंग चीफ पेट्रोल एजेंट।

क्या यह विफलता अमेरिकी प्रशासन की सुरक्षा नीतियों की है या उन बिचौलियों की जो मोटी रकम लेकर अवैध प्रवासियों को लाइसेंस और नौकरियां दिला रहे हैं? ट्रंप प्रशासन के दौरान विदेशी ड्राइवरों को कमर्शियल लाइसेंस जारी करने पर जो पाबंदी लगाई गई थी, वह अब फिर से चर्चा के केंद्र में है। सवाल यह है कि यदि नियमों की इतनी सख्ती है, तो आखिर ये लोग सिस्टम में इतनी आसानी से फिट कैसे हो रहे थे?

डिपोर्टेशन की प्रक्रिया

अमेरिका में अवैध भारतीय ट्रक ड्राइवर अब जल्द ही अपने वतन वापस भेजे जाएंगे, क्योंकि सभी को संघीय कानून के तहत डिपोर्टेशन की प्रक्रिया में डाला गया है। भारत सरकार द्वारा संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में ही 3,800 से अधिक भारतीय नागरिकों को अमेरिका से डिपोर्ट किया गया था, जिनमें से अधिकांश वाशिंगटन के माध्यम से वापस भेजे गए थे। यह आंकड़ा बढ़ती हुई अवैध घुसपैठ की गंभीरता को दर्शाता है।

"अमेरिका से 2025 में 3,800 से अधिक भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया गया, जिनमें से 3,414 को दिसंबर मध्य तक वापस भेजा गया।" - सरकारी डेटा (राज्यसभा)।

क्या यह भारतीय युवाओं के लिए एक कड़वा सबक नहीं है जो 'अमेरिकी सपने' (American Dream) को पूरा करने के चक्कर में अपनी गरिमा और कानूनी स्थिति को दांव पर लगा रहे हैं? जब तक बिचौलियों का यह काला कारोबार और फर्जी दस्तावेजों का खेल जारी रहेगा, तब तक अमेरिका में अवैध भारतीय ट्रक ड्राइवर जैसे मामले सामने आते रहेंगे और भारतीय पासपोर्ट की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगते रहेंगे। सड़कों पर होने वाली मौतों का जिम्मेदार आखिर कौन है—कानून की कमी या वह 'शॉर्टकट' खोजने वाली मानसिकता?

Thanks to all the readers for their 3+ Years of dedication and trust
Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
Source Source