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भारतीय शांति सैनिक: संयुक्त राष्ट्र में भारत का गौरव

भारतीय शांति सैनिक दक्षिण सूडान में सम्मानित। संयुक्त राष्ट्र मिशन के तहत भारत के 550 से अधिक जाबांजों को मिला यूएन मेडल ऑफ ऑनर।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतिष्ठित यूएन मेडल ऑफ ऑनर से नवाजा गया

प्रतिष्ठित यूएन मेडल ऑफ ऑनर से नवाजा गया

नई दिल्ली, दिल्ली। भारतीय शांति सैनिक एक बार फिर वैश्विक पटल पर भारत की साख बढ़ाते हुए नजर आए हैं। दक्षिण सूडान में तैनात संयुक्त राष्ट्र मिशन (UNMISS) के तहत काम कर रहे 550 से अधिक भारतीय शांति सैनिकों को वहां नागरिकों की सुरक्षा और शांति स्थापना के प्रयासों में उनके अद्वितीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया है। सोमवार को मलाकल शहर में आयोजित एक समारोह में इन 'ब्लू हेलमेट्स' को प्रतिष्ठित यूएन मेडल ऑफ ऑनर से नवाजा गया, जो भारत की बढ़ती वैश्विक जिम्मेदारी का प्रमाण है।[1]

संयुक्त राष्ट्र मिशन के अनुसार, सम्मानित किए गए 565 भारतीय शांति सैनिकों में 53 महिला सैनिक भी शामिल हैं। यह सम्मान केवल एक पदक नहीं है, बल्कि उस कठिन और संघर्षपूर्ण वातावरण में भारत के अनुशासन और परिचालन प्रभावशीलता की मान्यता है। जब दुनिया के कई देश अपनी सीमाओं के भीतर शांति बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तब भारत के ये जाबांज दुनिया के अशांत हिस्सों में उम्मीद की किरण बने हुए हैं।[2]

साहस की अनोखी मिसाल

भारतीय शांति सैनिक लगातार अपनी व्यावसायिकता और उच्च मानकों के लिए जाने जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र मिशन इन साउथ सूडान (UNMISS) के फोर्स कमांडर मेजर-जनरल जुनहुई वू ने कहा कि प्रत्येक पदक इन वीर सैनिकों के साहस और लचीलेपन का उत्सव है। उन्होंने बताया कि कैसे इन सैनिकों ने गश्त लगाने, पशु चिकित्सा शिविरों के संचालन, महिलाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने और लैंगिक हिंसा के विरुद्ध लड़ने जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए हैं, जिसने स्थानीय स्तर पर मानवीय पहुंच को आसान बनाया है।

"प्रत्येक पदक हमारे बहादुर शांति सैनिकों के साहस और लचीलेपन का उत्सव मनाता है, जो चुनौतीपूर्ण वातावरण में अनुशासन और टीम वर्क के उच्चतम मानक प्रदर्शित करते हैं।" - मेजर-जनरल जुनहुई वू, फोर्स कमांडर, UNMISS।

भारत संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में वर्दीधारी कर्मियों का दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता देश है। वर्तमान में भारत विभिन्न मिशनों में 4,200 से अधिक सैन्य और पुलिस कर्मियों का योगदान दे रहा है, जिसमें 155 महिलाएं भी शामिल हैं। क्या यह गर्व की बात नहीं है कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र वैश्विक शांति के लिए अपनी सेना का इतना बड़ा हिस्सा जोखिम में डालता है?

बलिदान और गर्व का सफर

भारतीय शांति सैनिक का इतिहास बलिदानों से भी भरा रहा है। अब तक लगभग 180 भारतीय शांति सैनिक अपना कर्तव्य निभाते हुए शहीद हो चुके हैं, जो किसी भी सैन्य योगदान देने वाले देशों में सबसे अधिक है। हाल ही में, अंतरराष्ट्रीय शांति सैनिक दिवस पर लांस हवलदार हरभजन सिंह और नायब सूबेदार सुजीत कुमार प्रधान को मरणोपरांत 'डैग हैमरस्क्योल्ड मेडल' से सम्मानित किया गया। यह पदक संयुक्त राष्ट्र का सर्वोच्च सम्मान है, जो ड्यूटी के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वालों को दिया जाता है।

"भारतीय ब्लू हेलमेट्स ने निरंतर अपने सभी परिचालन क्षेत्रों में व्यावसायिकता के उच्चतम मानकों को बरकरार रखा है।" - संयुक्त राष्ट्र में भारत का स्थायी मिशन।

भारत की एक और उपलब्धि में, मेजर अभिलाषा बराक को '2025 मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवार्ड' के लिए चुना गया है। लेबनान में तैनात मेजर बराक, जो भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट भी हैं, को वहां महिलाओं और लड़कियों के उत्थान के लिए किए गए उनके कार्यों के लिए सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह भारत की उन महिलाओं की भी जीत है जो अब युद्ध के मैदानों में भी अपना परचम लहरा रही हैं।

शांति का वैश्विक संदेश

भारतीय शांति सैनिक आज केवल एक वर्दीधारी सेना नहीं, बल्कि भारत की 'सॉफ्ट पावर' का सबसे शक्तिशाली उपकरण बन गए हैं। जहां दुनिया के बड़े-बड़े मुल्क शांति के नाम पर अपने हितों की राजनीति करते हैं, वहीं भारत के ये सैनिक बिना किसी राजनीतिक एजेंडे के वहां तैनात हैं जहां हिंसा और अराजकता ने मानवता को शर्मसार कर रखा है। क्या यह हमारी उस विदेश नीति का हिस्सा है जो 'वसुधैव कुटुंबकम' को सिर्फ भाषणों में नहीं, बल्कि जमीन पर भी लागू करती है?

जब दुनिया के ताकतवर देशों की सेनाएं अपने स्वार्थ के लिए विवादों में घिरी होती हैं, तब भारत के ये जवान शांति और अनुशासन का झंडा फहरा रहे होते हैं। यह सम्मान न केवल इन सैनिकों के लिए है, बल्कि उन करोड़ों भारतीयों के लिए भी है जो अपने देश के वीरों को वैश्विक मंच पर तिरंगा लहराते हुए देखते हैं। सरकारें बदलती हैं, नीतियां बदलती हैं, लेकिन भारत का यह शांतिदूतों वाला चरित्र हमेशा अविचल रहता है।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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