WA Join our WhatsApp Group
Advertisement Advertisement
View in Newspaper Form

सीबीएसई री-इवैल्यूएशन पोर्टल ठप, छात्रों के भविष्य से हो रहा खिलवाड़

सीबीएसई री-इवैल्यूएशन पोर्टल की तकनीकी खामियों ने छात्रों की चिंता बढ़ाई। जोसा काउंसलिंग से पहले आवेदन को लेकर मचा है भारी हड़कंप।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

नई दिल्ली, दिल्ली। सीबीएसई री-इवैल्यूएशन पोर्टल की बदहाली ने उन लाखों छात्रों के सपनों पर पानी फेरने की तैयारी कर ली है, जो अपनी उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। बोर्ड ने भले ही आधिकारिक तौर पर पोर्टल को चालू करने का दावा किया हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। छात्र लगातार वेबसाइट क्रैश होने, एरर आने और फॉर्म भरते समय पेज बार-बार होमपेज पर रीडायरेक्ट होने की शिकायतें कर रहे हैं, जिससे छात्रों में भारी आक्रोश है।[1]

यह कोई सामान्य तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य के साथ सीधे तौर पर खिलवाड़ है। एक ओर जहां 12वीं के छात्र अपने अंकों में सुधार के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सीबीएसई का 'डिजिटल तंत्र' पूरी तरह से दम तोड़ता हुआ नजर आ रहा है। छात्र सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती सुना रहे हैं, लेकिन बोर्ड के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। क्या यह व्यवस्था इतनी अक्षम हो चुकी है कि एक सही से काम करने वाली वेबसाइट तक नहीं चला पा रही?

काउंसलिंग की दौड़ और चिंता

सीबीएसई री-इवैल्यूएशन पोर्टल के फेल होने से इंजीनियरिंग दाखिले की महत्वपूर्ण प्रक्रिया 'जोसा' (JoSAA) में भाग लेने वाले छात्रों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। काउंसलिंग शुरू होने वाली है और छात्र इस उम्मीद में हैं कि यदि उनके नंबर बढ़ते हैं, तो उन्हें बेहतर कॉलेज मिल सकेगा। छात्रों का आरोप है कि री-इवैल्यूएशन की प्रक्रिया पहले ही विलंबित थी, और अब तकनीकी खामियों ने इस कार्य को और भी दुष्कर बना दिया है।[2]

"वेबसाइट खुल नहीं रही है। हजारों छात्र लगातार प्रयास कर रहे हैं, फिर भी तकनीकी खराबी बनी हुई है। इस समस्या का समाधान कब होगा?" - सोशल मीडिया पर एक छात्र की व्यथा।

बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि आवेदन प्रक्रिया 2 जून, 2026 से 6 जून, 2026 (मध्यरात्रि) तक ही खुली रहेगी। इसके बाद किसी भी प्रकार का कोई आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। बोर्ड की यह समय सीमा ऐसे समय में एक क्रूर मजाक जैसी लग रही है जब पोर्टल ही काम नहीं कर रहा। क्या बोर्ड का यह रवैया छात्रों को जानबूझकर परेशान करने का एक हिस्सा है, ताकि वे आवेदन करने से चूक जाएं?

आवेदन का जटिल चक्र

सीबीएसई री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर आवेदन करने की प्रक्रिया भी किसी बड़ी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। वेरिफिकेशन के लिए 100 रुपये प्रति आंसर शीट और री-इवैल्यूएशन के लिए 25 रुपये प्रति प्रश्न का शुल्क निर्धारित किया गया है। छात्रों को ऑनलाइन भुगतान के लिए यूपीआई, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और नेट बैंकिंग का विकल्प दिया गया है। लेकिन, जब सिस्टम ही 'फ्रीज' हो रहा हो, तो इन विकल्पों का क्या औचित्य रह जाता है?

"वेरिफिकेशन ऑफ इश्यूज के लिए छात्र उन विषयों का चयन कर सकते हैं जिनकी उन्होंने पहले स्कैन की गई प्रतियां प्राप्त की हैं। पोर्टल पर तकनीकी खराबी के कारण छात्रों को बार-बार प्रक्रिया शुरू करनी पड़ रही है, जिससे उनका कीमती समय बर्बाद हो रहा है।" - सीबीएसई से जुड़े मामले की स्थिति।

बोर्ड ने छात्रों को आगाह किया है कि एक बार "फ्रीज एंड प्रोसीड टू पेमेंट" बटन पर क्लिक करने के बाद आवेदन में कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा। अब सवाल यह है कि यदि वेबसाइट बीच में ही एरर दिखाती है या डेटा गायब हो जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या बोर्ड ऐसे छात्रों को कोई वैकल्पिक रास्ता देगा, या फिर उन्हें 'सिस्टम एरर' के नाम पर दरकिनार कर दिया जाएगा?

क्या सुधार होगा संभव?

सीबीएसई री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर उपजे इस विवाद ने बोर्ड की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्र और उनके अभिभावक टैग कर करके बोर्ड अधिकारियों से जवाब मांग रहे हैं, लेकिन सन्नाटा पसरा हुआ है। यह डिजिटल युग का वह काला सच है जहां एक वेबसाइट का चलना भी किसी चमत्कार से कम नहीं रह गया है। सीबीएसई जैसे बड़े संस्थान से यह अपेक्षा करना कि वह छात्रों के भविष्य के लिए एक स्थिर पोर्टल बनाए रखेगा, क्या आज के दौर में बहुत बड़ी बात है?

बोर्ड ने भले ही ऑफलाइन आवेदन का कोई प्रावधान नहीं रखा है, लेकिन पोर्टल की इस विफलता के बाद छात्रों का धैर्य टूटता जा रहा है। यदि आने वाले 48 घंटों में भी स्थिति सामान्य नहीं हुई, तो सीबीएसई को न केवल छात्रों के गुस्से का सामना करना पड़ेगा, बल्कि उन युवाओं के करियर को होने वाले नुकसान के लिए भी जवाबदेह होना पड़ेगा। यह समय सीबीएसई के लिए अपनी साख बचाने का है, न कि छात्रों की मुश्किलों को बढ़ाने का।

Rex TV Verification Metrics
Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
Source Source