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सीबीएसई चेयरमैन का तबादला: पीएम मोदी के कड़े तेवर से बोर्ड में हड़कंप

सीबीएसई चेयरमैन का तबादला और बड़ी जांच का आदेश। बोर्ड में फैली गड़बड़ियों के बीच पीएम मोदी का सख्त एक्शन, दोषियों पर कसेगा शिकंजा।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

नई दिल्ली, दिल्ली। सीबीएसई चेयरमैन का तबादला होना कोई साधारण प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार और लापरवाही पर एक बड़ा प्रहार है। केंद्र सरकार ने मंगलवार को एक कड़े कदम के तहत सीबीएसई के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता को तत्काल प्रभाव से स्थानांतरित कर दिया है। यह कार्रवाई बोर्ड की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों और ओएसएम (On-Screen Marking) सिस्टम में हुई गंभीर गड़बड़ियों के बाद की गई है, जिसने छात्रों और अभिभावकों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया था।[1]

बोर्ड की परीक्षाओं में तकनीकी खामियां, भुगतान में विफलता और सत्यापन एवं पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में हो रही देरी ने बोर्ड की साख पर बट्टा लगा दिया था। पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर छात्र सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक अपनी आवाज उठा रहे थे। अब सरकार द्वारा किए गए इस बड़े बदलाव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शासन अब किसी भी सूरत में बोर्ड के कामकाज में कोताही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

जांच के दायरे में बोर्ड

सीबीएसई चेयरमैन का तबादला करने के साथ ही, केंद्र सरकार ने एक सदस्यीय समिति का भी गठन किया है। यह समिति सीबीएसई द्वारा ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली के लिए सेवाओं की खरीद और कार्यान्वयन में हुई अनियमितताओं की गहन जांच करेगी। सूत्रों का कहना है कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरे मामले और नीट पेपर लीक प्रकरण पर व्यक्तिगत रूप से नजर बनाए हुए हैं। यह कार्रवाई सीधे तौर पर प्रधानमंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बाद की गई है, जो बोर्ड के भीतर व्याप्त कुव्यवस्था को साफ करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

"सीबीएसई चेयरमैन का तबादला और जांच समिति का गठन प्रधानमंत्री के निर्देश पर किया गया है, ताकि बोर्ड की साख को दोबारा बहाल किया जा सके।" - आधिकारिक सूत्रों के अनुसार।

सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, इस समिति की अध्यक्षता क्षमता निर्माण आयोग (Capacity Building Commission) की अध्यक्ष एस. राधा चौहान करेंगी। उन्हें जरूरत पड़ने पर अन्य विभागों के अधिकारियों की सहायता लेने के लिए भी सशक्त बनाया गया है। समिति को अपना विस्तृत रिपोर्ट एक महीने के भीतर कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को सौंपनी होगी। यह समय सीमा इस मामले की गंभीरता को दर्शाती है कि सरकार अब केवल खानापूर्ति नहीं, बल्कि ठोस परिणाम चाहती है।

साख बचाने की कवायद

सीबीएसई चेयरमैन का तबादला महज शुरुआत हो सकती है, क्योंकि नीट और बोर्ड परीक्षाओं के विवादों ने शिक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की सक्रियता यह बताने के लिए पर्याप्त है कि आने वाले समय में बोर्ड के उन सभी अधिकारियों और निजी वेंडर कंपनियों पर गाज गिर सकती है, जिनकी मिलीभगत से छात्रों का भविष्य दांव पर लगा था। क्या यह केवल ऊपर के अधिकारियों का तबादला है, या इसके नीचे छिपे उन 'सिंडिकेट्स' की भी सफाई होगी जो बोर्ड को अपनी जागीर समझते हैं?

"समिति की अध्यक्षता एस. राधा चौहान करेंगी और इसे एक महीने के भीतर रिपोर्ट कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को देनी होगी।" - आधिकारिक सरकारी आदेश।

छात्रों का भविष्य किसी के प्रयोग का साधन नहीं हो सकता। सीबीएसई में लंबे समय से चल रही खामियों को अब सुधारने का समय आ गया है। जिस तरह से रातों-रात यह बड़ा एक्शन लिया गया, वह स्पष्ट करता है कि सरकार अब छात्रों के धैर्य की परीक्षा नहीं लेना चाहती। आने वाले एक महीने में जांच रिपोर्ट के बाद क्या किसी बड़े चेहरे पर कानूनी शिकंजा कसा जाएगा? यह तो समय बताएगा, लेकिन इतना तय है कि शिक्षा तंत्र में 'जीरो टॉलरेंस' का दौर शुरू हो चुका है।

सीबीएसई चेयरमैन का तबादला होने के बाद अब पूरे शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। बोर्ड के गलियारों में सन्नाटा पसरा है और पारदर्शिता की मांग और भी तेज हो गई है। बोर्ड के अधिकारियों को अब यह समझना होगा कि वे किसी भी तरह की लापरवाही या 'भ्रष्टाचार' को लंबे समय तक नहीं छिपा पाएंगे। आने वाले दिन सीबीएसई के उन सभी लोगों के लिए कठिन होने वाले हैं जो अब तक बोर्ड की कुर्सी को सुरक्षा कवच समझकर बैठे थे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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